रविवार, 27 सितंबर 2026
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पूर्णिमा 2026 · सिंगापुर

तिथिनामतिथि समयचंद्रोदय
शनि, 3 जनवरी पूर्णिमापौष · शुक्ल शुक्र, 2 जन॰, 21:23 → शनि, 3 जन॰, 18:02 19:13
रवि, 1 फ़रवरी पूर्णिमामाघ · शुक्लक्षय तिथि रवि, 1 फ़र॰, 08:23 → सोम, 2 फ़र॰, 06:09 18:55
मंगल, 3 मार्च पूर्णिमाफाल्गुन · शुक्ल सोम, 2 मार्च, 20:26 → मंगल, 3 मार्च, 19:37 19:16
गुरु, 2 अप्रैल पूर्णिमाचैत्र · शुक्ल बुध, 1 अप्रैल, 09:36 → गुरु, 2 अप्रैल, 10:12 19:21
शुक्र, 1 मई पूर्णिमावैशाख · शुक्ल गुरु, 30 अप्रैल, 23:43 → शनि, 2 मई, 01:23 18:46
रवि, 31 मई पूर्णिमाज्येष्ठ (अधिक) · शुक्ल शनि, 30 मई, 14:28 → रवि, 31 मई, 16:45 19:07
सोम, 29 जून पूर्णिमाज्येष्ठ · शुक्लदो सूर्योदयों पर तिथि; पहला दिन लिया गया सोम, 29 जून, 05:36 → मंगल, 30 जून, 07:56 18:46
बुध, 29 जुलाई पूर्णिमाआषाढ़ · शुक्ल मंगल, 28 जुल॰, 20:49 → बुध, 29 जुल॰, 22:35 19:10
शुक्र, 28 अगस्त पूर्णिमाश्रावण · शुक्ल गुरु, 27 अग॰, 11:39 → शुक्र, 28 अग॰, 12:18 19:19
शनि, 26 सितंबर पूर्णिमाभाद्रपद · शुक्ल शनि, 26 सित॰, 01:37 → रवि, 27 सित॰, 00:49 18:41
सोम, 26 अक्टूबरअगला पूर्णिमाआश्विन · शुक्ल रवि, 25 अक्टू॰, 14:26 → सोम, 26 अक्टू॰, 12:11 18:56
मंगल, 24 नवंबर पूर्णिमाकार्तिक · शुक्ल मंगल, 24 नव॰, 02:12 → मंगल, 24 नव॰, 22:53 18:35
गुरु, 24 दिसंबर पूर्णिमामार्गशीर्ष · शुक्ल बुध, 23 दिस॰, 13:17 → गुरु, 24 दिस॰, 09:28 19:30

तिथियाँ इस शहर के सूर्योदय पर उदया तिथि नियम (स्मार्त) से हैं।

Questions

सिंगापुर में अगली पूर्णिमा कब है?

सोम, 26 अक्टूबर (Ashwin)। तिथि रवि, 25 अक्टू॰, 14:26 से सोम, 26 अक्टू॰, 12:11 तक (सिंगापुर का समय)।

अन्य शहर

जानकारी पूर्णिमा →

पूर्णिमा व्रत — महत्व, विधि और पारण

महत्व

पूर्णिमा प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जब चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप में दिखाई देता है। पंचांग के अनुसार यह तिथि हर माह आती है, और इसका धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। पूर्णिमा से जुड़े व्रत का संबंध भगवान विष्णु तथा सत्यनारायण भगवान से माना जाता है।

परंपरा में पूर्णिमा को सत्यनारायण व्रत के लिए उपयुक्त तिथि बताया गया है। भक्त सत्यनारायण कथा का श्रवण और दान-पुण्य करते हैं। यह व्रत मुख्यतः श्रद्धा, संकल्प और कृतज्ञता के भाव से जुड़ा है, न कि किसी विशेष फल की मांग से।

यह ध्यान रखना उपयुक्त है कि परंपराएँ क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार भिन्न हो सकती हैं — उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में विधि और नियमों में अंतर देखने को मिलता है। साथ ही अमांत और पूर्णिमांत मास गणना के कारण तिथि की गणना में भी मतभेद हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।

व्रत विधि — चरणबद्ध

पूर्णिमा व्रत की विधि सामान्यतः इस प्रकार बताई जाती है:

व्रत रखने वाले भक्त प्रायः पूरे दिन उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ में समय व्यतीत करते हैं। विधि के विवरण स्थानीय परंपरा के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं।

क्या खाएँ और क्या टालें

पूर्णिमा व्रत में आहार संबंधी नियम परंपरा के अनुसार भिन्न होते हैं। सामान्य रूप से निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:

स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें। व्रत की अवधि और आहार नियम अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार चुनें।

पारण के नियम

पारण अर्थात व्रत का समापन। पूर्णिमा व्रत का पारण सामान्यतः पूजा और कथा के समापन के बाद किया जाता है।