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प्रदोष व्रत 2027 · इंदौर

तिथिनामतिथि समयप्रदोष काल
सोम, 4 जनवरीअगला सोम प्रदोषपौष · कृष्ण सोम, 4 जन॰, 18:16 → मंगल, 5 जन॰, 20:40 17:55 – 20:19
बुध, 20 जनवरी प्रदोष व्रतपौष · शुक्ल बुध, 20 जन॰, 04:41 → गुरु, 21 जन॰, 01:12 18:06 – 20:30
बुध, 3 फ़रवरी प्रदोष व्रतमाघ · कृष्ण बुध, 3 फ़र॰, 13:50 → गुरु, 4 फ़र॰, 16:31 18:15 – 20:39
गुरु, 18 फ़रवरी प्रदोष व्रतमाघ · शुक्ल गुरु, 18 फ़र॰, 14:28 → शुक्र, 19 फ़र॰, 11:14 18:24 – 20:48
शुक्र, 5 मार्च प्रदोष व्रतफाल्गुन · कृष्ण शुक्र, 5 मार्च, 09:54 → शनि, 6 मार्च, 12:04 18:31 – 20:55
शनि, 20 मार्च शनि प्रदोषफाल्गुन · शुक्ल शुक्र, 19 मार्च, 23:17 → शनि, 20 मार्च, 20:45 18:37 – 21:01
रवि, 4 अप्रैल प्रदोष व्रतचैत्र · कृष्ण रवि, 4 अप्रैल, 04:27 → सोम, 5 अप्रैल, 05:23 18:43 – 21:07
रवि, 18 अप्रैल प्रदोष व्रतचैत्र · शुक्ल रवि, 18 अप्रैल, 07:42 → सोम, 19 अप्रैल, 06:08 18:48 – 21:12
सोम, 3 मई सोम प्रदोषवैशाख · कृष्ण सोम, 3 मई, 20:04 → मंगल, 4 मई, 19:31 18:54 – 21:18
सोम, 17 मई सोम प्रदोषवैशाख · शुक्ल सोम, 17 मई, 16:28 → मंगल, 18 मई, 16:04 19:00 – 21:24
बुध, 2 जून प्रदोष व्रतज्येष्ठ · कृष्ण बुध, 2 जून, 08:29 → गुरु, 3 जून, 06:35 19:08 – 21:32
बुध, 16 जून प्रदोष व्रतज्येष्ठ · शुक्ल बुध, 16 जून, 02:31 → गुरु, 17 जून, 03:20 19:13 – 21:37
गुरु, 1 जुलाई प्रदोष व्रतआषाढ़ · कृष्ण गुरु, 1 जुल॰, 18:15 → शुक्र, 2 जुल॰, 15:23 19:15 – 21:39
गुरु, 15 जुलाई प्रदोष व्रतआषाढ़ · शुक्ल गुरु, 15 जुल॰, 14:40 → शुक्र, 16 जुल॰, 16:35 19:14 – 21:38
शनि, 31 जुलाई शनि प्रदोषश्रावण · कृष्ण शनि, 31 जुल॰, 02:18 → शनि, 31 जुल॰, 22:58 19:08 – 21:32
शनि, 14 अगस्त शनि प्रदोषश्रावण · शुक्ल शनि, 14 अग॰, 05:21 → रवि, 15 अग॰, 07:54 18:59 – 21:23
रवि, 29 अगस्त प्रदोष व्रतभाद्रपद · कृष्ण रवि, 29 अग॰, 09:36 → सोम, 30 अग॰, 06:13 18:47 – 21:11
सोम, 13 सितंबर सोम प्रदोषभाद्रपद · शुक्ल रवि, 12 सित॰, 22:13 → मंगल, 14 सित॰, 00:40 18:32 – 20:56
सोम, 27 सितंबर सोम प्रदोषआश्विन · कृष्ण सोम, 27 सित॰, 16:55 → मंगल, 28 सित॰, 13:55 18:18 – 20:42
मंगल, 12 अक्टूबर भौम प्रदोषआश्विन · शुक्ल मंगल, 12 अक्टू॰, 16:14 → बुध, 13 अक्टू॰, 17:48 18:04 – 20:28
बुध, 27 अक्टूबर प्रदोष व्रतकार्तिक · कृष्ण बुध, 27 अक्टू॰, 01:03 → बुध, 27 अक्टू॰, 22:50 17:52 – 20:16
गुरु, 11 नवंबर प्रदोष व्रतकार्तिक · शुक्ल गुरु, 11 नव॰, 10:07 → शुक्र, 12 नव॰, 10:21 17:44 – 20:08
गुरु, 25 नवंबर प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष · कृष्ण गुरु, 25 नव॰, 10:51 → शुक्र, 26 नव॰, 09:48 17:41 – 20:05
शनि, 11 दिसंबर शनि प्रदोषमार्गशीर्ष · शुक्ल शनि, 11 दिस॰, 02:53 → रवि, 12 दिस॰, 01:43 17:42 – 20:06
शनि, 25 दिसंबर शनि प्रदोषपौष · कृष्ण शुक्र, 24 दिस॰, 23:08 → शनि, 25 दिस॰, 23:32 17:48 – 20:12

तिथियाँ इस शहर के सूर्योदय पर उदया तिथि नियम (स्मार्त) से हैं।

Questions

इंदौर में अगली प्रदोष व्रत कब है?

सोम, 4 जनवरी (सोम प्रदोष)। तिथि सोम, 4 जन॰, 18:16 से मंगल, 5 जन॰, 20:40 तक (इंदौर का समय)।

अन्य शहर

जानकारी प्रदोष व्रत →

महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को, प्रदोष काल में रखा जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय माना जाता है — सामान्यतः सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा पहले और लगभग डेढ़ घंटा बाद तक। इसी संधि-काल में शिव की पूजा का विधान है।

परंपरा में प्रदोष व्रत को शिव की कृपा, संकल्प-शुद्धि और मन की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। यह व्रत उपवास, जप और पूजा के माध्यम से साधक को दिनचर्या में अनुशासन और स्मरण बनाए रखने में सहायक माना गया है। यहाँ यह स्पष्ट करना उचित है कि यह विवरण परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है; किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में किसी विशेष फल का दावा या आश्वासन इस लेख का उद्देश्य नहीं है।

प्रदोष व्रत कौन रखता है — इसमें कोई कठोर नियम नहीं कि केवल एक वर्ग ही इसे कर सकता है। सामान्यतः वे श्रद्धालु इसे रखते हैं जो शिव-उपासना में रुचि रखते हैं और जिनकी दिनचर्या उपवास तथा सायंकालीन पूजा के अनुकूल हो। घर-गृहस्थी वाले, विद्यार्थी और वृद्ध — सभी अपनी शारीरिक स्थिति और सुविधा के अनुसार इसे अपना सकते हैं। उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में तिथि-गणना (अमांत/पूर्णिमांत) और विधि-विवरण में कुछ भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं; इसलिए अपने क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार पंचांग देखकर निर्णय लेना उचित रहता है।

व्रत विधि — चरण दर चरण

नीचे दी गई विधि सामान्य परंपरा का सरल रूप है। विस्तृत या विशिष्ट विधान के लिए अपने पुरोहित या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।

यह व्रत श्रद्धा और नियमितता पर आधारित है। इसे किसी दबाव या भय से नहीं, बल्कि शांत मन से किया जाना चाहिए।

क्या खाएँ और क्या टालें

उपवास के दिन भोजन को लेकर परंपराएँ अलग-अलग हैं, पर कुछ सामान्य बातें सभी में मिलती हैं।

यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी स्थ