प्रदोष व्रत 2026 · न्यूयॉर्क
| तिथि | नाम | तिथि समय | प्रदोष काल |
|---|---|---|---|
| गुरु, 15 जनवरी | प्रदोष व्रतमाघ · कृष्ण | गुरु, 15 जन॰, 09:47 → शुक्र, 16 जन॰, 11:52 | 16:53 – 19:17 |
| शुक्र, 30 जनवरी | प्रदोष व्रतमाघ · शुक्ल | शुक्र, 30 जन॰, 00:39 → शुक्र, 30 जन॰, 21:56 | 17:11 – 19:35 |
| शनि, 14 फ़रवरी | शनि प्रदोषफाल्गुन · कृष्ण | शनि, 14 फ़र॰, 05:32 → रवि, 15 फ़र॰, 06:35 | 17:29 – 19:53 |
| शनि, 28 फ़रवरी | शनि प्रदोषफाल्गुन · शुक्ल | शनि, 28 फ़र॰, 10:13 → रवि, 1 मार्च, 08:39 | 17:46 – 20:10 |
| सोम, 16 मार्च | सोम प्रदोषचैत्र · कृष्ण | सोम, 16 मार्च, 00:11 → सोम, 16 मार्च, 23:53 | 19:04 – 21:28 |
| रवि, 29 मार्च | प्रदोष व्रतचैत्र · शुक्ल | रवि, 29 मार्च, 21:40 → सोम, 30 मार्च, 21:26 | 19:17 – 21:41 |
| मंगल, 14 अप्रैल | भौम प्रदोषवैशाख · कृष्ण | मंगल, 14 अप्रैल, 14:42 → बुध, 15 अप्रैल, 13:01 | 19:34 – 21:58 |
| मंगल, 28 अप्रैल | भौम प्रदोषवैशाख · शुक्ल | मंगल, 28 अप्रैल, 09:22 → बुध, 29 अप्रैल, 10:22 | 19:49 – 22:13 |
| गुरु, 14 मई | प्रदोष व्रतज्येष्ठ · कृष्ण | गुरु, 14 मई, 01:51 → गुरु, 14 मई, 23:01 | 20:05 – 22:29 |
| बुध, 27 मई | प्रदोष व्रतज्येष्ठ (अधिक) · शुक्ल | बुध, 27 मई, 22:27 → शुक्र, 29 मई, 00:21 | 20:17 – 22:41 |
| शुक्र, 12 जून | प्रदोष व्रतआषाढ़ (अधिक) · कृष्ण | शुक्र, 12 जून, 10:07 → शनि, 13 जून, 06:38 | 20:27 – 22:51 |
| शुक्र, 26 जून | प्रदोष व्रतज्येष्ठ · शुक्ल | शुक्र, 26 जून, 12:52 → शनि, 27 जून, 15:13 | 20:31 – 22:55 |
| शनि, 11 जुलाई | शनि प्रदोषआषाढ़ · कृष्ण | शनि, 11 जुल॰, 16:34 → रवि, 12 जुल॰, 13:00 | 20:28 – 22:52 |
| रवि, 26 जुलाई | प्रदोष व्रतआषाढ़ · शुक्ल | रवि, 26 जुल॰, 04:28 → सोम, 27 जुल॰, 06:45 | 20:17 – 22:41 |
| सोम, 24 अगस्त | सोम प्रदोषश्रावण · शुक्ल | सोम, 24 अग॰, 20:51 → मंगल, 25 अग॰, 22:29 | 19:40 – 22:04 |
| मंगल, 8 सितंबर | भौम प्रदोषभाद्रपद · कृष्ण | मंगल, 8 सित॰, 05:13 → बुध, 9 सित॰, 03:01 | 19:16 – 21:40 |
| बुध, 23 सितंबर | प्रदोष व्रतभाद्रपद · शुक्ल | बुध, 23 सित॰, 13:21 → गुरु, 24 सित॰, 13:48 | 18:51 – 21:15 |
| बुध, 7 अक्टूबरअगला | प्रदोष व्रतआश्विन · कृष्ण | बुध, 7 अक्टू॰, 13:47 → गुरु, 8 अक्टू॰, 12:46 | 18:28 – 20:52 |
| शुक्र, 23 अक्टूबर | प्रदोष व्रतआश्विन · शुक्ल | शुक्र, 23 अक्टू॰, 05:06 → शनि, 24 अक्टू॰, 04:07 | 18:04 – 20:28 |
| शुक्र, 6 नवंबर | प्रदोष व्रतकार्तिक · कृष्ण | शुक्र, 6 नव॰, 00:01 → शनि, 7 नव॰, 00:18 | 16:46 – 19:10 |
| शनि, 21 नवंबर | शनि प्रदोषकार्तिक · शुक्ल | शनि, 21 नव॰, 18:26 → रवि, 22 नव॰, 16:07 | 16:33 – 18:57 |
| शनि, 5 दिसंबर | शनि प्रदोषमार्गशीर्ष · कृष्ण | शनि, 5 दिस॰, 14:22 → रवि, 6 दिस॰, 15:52 | 16:28 – 18:52 |
| सोम, 21 दिसंबर | सोम प्रदोषमार्गशीर्ष · शुक्ल | सोम, 21 दिस॰, 07:06 → मंगल, 22 दिस॰, 03:54 | 16:32 – 18:56 |
तिथियाँ इस शहर के सूर्योदय पर उदया तिथि नियम (स्मार्त) से हैं।
Questions
न्यूयॉर्क में अगली प्रदोष व्रत कब है?
बुध, 7 अक्टूबर (प्रदोष व्रत)। तिथि बुध, 7 अक्टू॰, 13:47 से गुरु, 8 अक्टू॰, 12:46 तक (न्यूयॉर्क का समय)।
अन्य शहर
- एडिसनEdison
- फिलाडेल्फियाPhiladelphia
- बॉस्टनBoston
- वॉशिंगटनWashington
- पिट्सबर्गPittsburgh
- मॉन्ट्रियलMontreal
- ओटावाOttawa
- टोरंटोToronto
- मार्कहमMarkham
- ब्रैम्पटनBrampton
- रैलेRaleigh
- कोलंबसColumbus
- डेट्राइटDetroit
- शार्लटCharlotte
- शिकागोChicago
- अटलांटाAtlanta
- ऑरलैंडोOrlando
- टैम्पाTampa
- मिनियापोलिसMinneapolis
- मायामीMiami
- विनिपेगWinnipeg
- डैलसDallas
- ह्यूस्टनHouston
- ऑस्टिनAustin
महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को, प्रदोष काल में रखा जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय माना जाता है — सामान्यतः सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा पहले और लगभग डेढ़ घंटा बाद तक। इसी संधि-काल में शिव की पूजा का विधान है।
परंपरा में प्रदोष व्रत को शिव की कृपा, संकल्प-शुद्धि और मन की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। यह व्रत उपवास, जप और पूजा के माध्यम से साधक को दिनचर्या में अनुशासन और स्मरण बनाए रखने में सहायक माना गया है। यहाँ यह स्पष्ट करना उचित है कि यह विवरण परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है; किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में किसी विशेष फल का दावा या आश्वासन इस लेख का उद्देश्य नहीं है।
प्रदोष व्रत कौन रखता है — इसमें कोई कठोर नियम नहीं कि केवल एक वर्ग ही इसे कर सकता है। सामान्यतः वे श्रद्धालु इसे रखते हैं जो शिव-उपासना में रुचि रखते हैं और जिनकी दिनचर्या उपवास तथा सायंकालीन पूजा के अनुकूल हो। घर-गृहस्थी वाले, विद्यार्थी और वृद्ध — सभी अपनी शारीरिक स्थिति और सुविधा के अनुसार इसे अपना सकते हैं। उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में तिथि-गणना (अमांत/पूर्णिमांत) और विधि-विवरण में कुछ भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं; इसलिए अपने क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार पंचांग देखकर निर्णय लेना उचित रहता है।
व्रत विधि — चरण दर चरण
नीचे दी गई विधि सामान्य परंपरा का सरल रूप है। विस्तृत या विशिष्ट विधान के लिए अपने पुरोहित या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।
- संकल्प: प्रातः स्नान के बाद दिन का संकल्प लें कि आज प्रदोष व्रत रखा जाएगा और सायंकाल शिव-पूजा की जाएगी।
- उपवास: दिन भर उपवास रखा जाता है — कुछ लोग निर्जल रहते हैं, कुछ फलाहार लेते हैं। यह अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तय करें।
- सायं तैयारी: सूर्यास्त से पहले स्नान करके पूजा-स्थान स्वच्छ करें। शिवलिंग या शिव-प्रतिमा के समक्ष दीप, जल, बेलपत्र, फूल और धूप अर्पित करें।
- प्रदोष काल में पूजा: प्रदोष काल के भीतर शिव का पूजन, ॐ नमः शिवाय का जप तथा शिव-स्तोत्र या स्तुति का पाठ करें।
- कथा श्रवण: प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें, और उसका भाव मन में रखें।
- समापन: पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और अगले दिन परना करें।
यह व्रत श्रद्धा और नियमितता पर आधारित है। इसे किसी दबाव या भय से नहीं, बल्कि शांत मन से किया जाना चाहिए।
क्या खाएँ और क्या टालें
उपवास के दिन भोजन को लेकर परंपराएँ अलग-अलग हैं, पर कुछ सामान्य बातें सभी में मिलती हैं।
- फलाहार: फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा और समय-समय पर स्वीकृत व्रत-अनाज लिए जा सकते हैं।
- अनाज और भारी भोजन: सामान्य अनाज, दाल, प्याज-लहसुन तथा तामसिक माने जाने वाले भोजन से बचा जाता है।
- मादक वस्तुएँ: मद्य, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ वर्जित माने जाते हैं।
- संयम: कई लोग सात्त्विक भोजन और मितभाषण को भी व्रत का अंग मानते हैं।
यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी स्थ