प्रदोष व्रत 2027 · टोरंटो
| तिथि | नाम | तिथि समय | प्रदोष काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 4 जनवरीअगला | सोम प्रदोषपौष · कृष्ण | सोम, 4 जन॰, 07:46 → मंगल, 5 जन॰, 10:10 | 16:54 – 19:18 |
| मंगल, 19 जनवरी | भौम प्रदोषपौष · शुक्ल | मंगल, 19 जन॰, 18:11 → बुध, 20 जन॰, 14:42 | 17:11 – 19:35 |
| बुध, 3 फ़रवरी | प्रदोष व्रतमाघ · कृष्ण | बुध, 3 फ़र॰, 03:20 → गुरु, 4 फ़र॰, 06:01 | 17:31 – 19:55 |
| गुरु, 18 फ़रवरी | प्रदोष व्रतमाघ · शुक्ल | गुरु, 18 फ़र॰, 03:58 → शुक्र, 19 फ़र॰, 00:44 | 17:51 – 20:15 |
| शुक्र, 5 मार्च | प्रदोष व्रतफाल्गुन · कृष्ण | गुरु, 4 मार्च, 23:24 → शनि, 6 मार्च, 01:34 | 18:11 – 20:35 |
| शुक्र, 19 मार्च | प्रदोष व्रतफाल्गुन · शुक्ल | शुक्र, 19 मार्च, 13:47 → शनि, 20 मार्च, 11:15 | 19:28 – 21:52 |
| शनि, 3 अप्रैल | शनि प्रदोषचैत्र · कृष्ण | शनि, 3 अप्रैल, 18:57 → रवि, 4 अप्रैल, 19:53 | 19:46 – 22:10 |
| शनि, 17 अप्रैल | शनि प्रदोषचैत्र · शुक्ल | शनि, 17 अप्रैल, 22:12 → रवि, 18 अप्रैल, 20:38 | 20:03 – 22:27 |
| सोम, 3 मई | सोम प्रदोषवैशाख · कृष्ण | सोम, 3 मई, 10:34 → मंगल, 4 मई, 10:01 | 20:22 – 22:46 |
| सोम, 17 मई | सोम प्रदोषवैशाख · शुक्ल | सोम, 17 मई, 06:58 → मंगल, 18 मई, 06:34 | 20:38 – 23:02 |
| मंगल, 1 जून | भौम प्रदोषज्येष्ठ · कृष्ण | मंगल, 1 जून, 22:59 → बुध, 2 जून, 21:05 | 20:52 – 23:16 |
| मंगल, 15 जून | भौम प्रदोषज्येष्ठ · शुक्ल | मंगल, 15 जून, 17:01 → बुध, 16 जून, 17:50 | 21:01 – 23:25 |
| गुरु, 1 जुलाई | प्रदोष व्रतआषाढ़ · कृष्ण | गुरु, 1 जुल॰, 08:45 → शुक्र, 2 जुल॰, 05:53 | 21:03 – 23:27 |
| गुरु, 15 जुलाई | प्रदोष व्रतआषाढ़ · शुक्ल | गुरु, 15 जुल॰, 05:10 → शुक्र, 16 जुल॰, 07:05 | 20:57 – 23:21 |
| शुक्र, 30 जुलाई | प्रदोष व्रतश्रावण · कृष्ण | शुक्र, 30 जुल॰, 16:48 → शनि, 31 जुल॰, 13:28 | 20:43 – 23:07 |
| शुक्र, 13 अगस्त | प्रदोष व्रतश्रावण · शुक्ल | शुक्र, 13 अग॰, 19:51 → शनि, 14 अग॰, 22:24 | 20:24 – 22:48 |
| रवि, 29 अगस्त | प्रदोष व्रतभाद्रपद · कृष्ण | रवि, 29 अग॰, 00:06 → रवि, 29 अग॰, 20:43 | 19:58 – 22:22 |
| रवि, 12 सितंबर | प्रदोष व्रतभाद्रपद · शुक्ल | रवि, 12 सित॰, 12:43 → सोम, 13 सित॰, 15:10 | 19:33 – 21:57 |
| सोम, 27 सितंबर | सोम प्रदोषआश्विन · कृष्ण | सोम, 27 सित॰, 07:25 → मंगल, 28 सित॰, 04:25 | 19:06 – 21:30 |
| मंगल, 12 अक्टूबर | भौम प्रदोषआश्विन · शुक्ल | मंगल, 12 अक्टू॰, 06:44 → बुध, 13 अक्टू॰, 08:18 | 18:39 – 21:03 |
| मंगल, 26 अक्टूबर | भौम प्रदोषकार्तिक · कृष्ण | मंगल, 26 अक्टू॰, 15:33 → बुध, 27 अक्टू॰, 13:20 | 18:17 – 20:41 |
| गुरु, 11 नवंबर | प्रदोष व्रतकार्तिक · शुक्ल | बुध, 10 नव॰, 23:37 → गुरु, 11 नव॰, 23:51 | 16:56 – 19:20 |
| गुरु, 25 नवंबर | प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष · कृष्ण | गुरु, 25 नव॰, 00:21 → गुरु, 25 नव॰, 23:18 | 16:44 – 19:08 |
| शुक्र, 10 दिसंबर | प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष · शुक्ल | शुक्र, 10 दिस॰, 16:23 → शनि, 11 दिस॰, 15:13 | 16:40 – 19:04 |
| शुक्र, 24 दिसंबर | प्रदोष व्रतपौष · कृष्ण | शुक्र, 24 दिस॰, 12:38 → शनि, 25 दिस॰, 13:02 | 16:45 – 19:09 |
तिथियाँ इस शहर के सूर्योदय पर उदया तिथि नियम (स्मार्त) से हैं।
Questions
टोरंटो में अगली प्रदोष व्रत कब है?
सोम, 4 जनवरी (सोम प्रदोष)। तिथि सोम, 4 जन॰, 07:46 से मंगल, 5 जन॰, 10:10 तक (टोरंटो का समय)।
अन्य शहर
- मार्कहमMarkham
- ब्रैम्पटनBrampton
- डेट्राइटDetroit
- ओटावाOttawa
- पिट्सबर्गPittsburgh
- मॉन्ट्रियलMontreal
- कोलंबसColumbus
- एडिसनEdison
- फिलाडेल्फियाPhiladelphia
- न्यूयॉर्कNew York
- वॉशिंगटनWashington
- बॉस्टनBoston
- शिकागोChicago
- रैलेRaleigh
- शार्लटCharlotte
- मिनियापोलिसMinneapolis
- अटलांटाAtlanta
- विनिपेगWinnipeg
- ऑरलैंडोOrlando
- टैम्पाTampa
- डैलसDallas
- मायामीMiami
- ह्यूस्टनHouston
- डेनवरDenver
महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को, प्रदोष काल में रखा जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय माना जाता है — सामान्यतः सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा पहले और लगभग डेढ़ घंटा बाद तक। इसी संधि-काल में शिव की पूजा का विधान है।
परंपरा में प्रदोष व्रत को शिव की कृपा, संकल्प-शुद्धि और मन की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। यह व्रत उपवास, जप और पूजा के माध्यम से साधक को दिनचर्या में अनुशासन और स्मरण बनाए रखने में सहायक माना गया है। यहाँ यह स्पष्ट करना उचित है कि यह विवरण परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है; किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में किसी विशेष फल का दावा या आश्वासन इस लेख का उद्देश्य नहीं है।
प्रदोष व्रत कौन रखता है — इसमें कोई कठोर नियम नहीं कि केवल एक वर्ग ही इसे कर सकता है। सामान्यतः वे श्रद्धालु इसे रखते हैं जो शिव-उपासना में रुचि रखते हैं और जिनकी दिनचर्या उपवास तथा सायंकालीन पूजा के अनुकूल हो। घर-गृहस्थी वाले, विद्यार्थी और वृद्ध — सभी अपनी शारीरिक स्थिति और सुविधा के अनुसार इसे अपना सकते हैं। उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में तिथि-गणना (अमांत/पूर्णिमांत) और विधि-विवरण में कुछ भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं; इसलिए अपने क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार पंचांग देखकर निर्णय लेना उचित रहता है।
व्रत विधि — चरण दर चरण
नीचे दी गई विधि सामान्य परंपरा का सरल रूप है। विस्तृत या विशिष्ट विधान के लिए अपने पुरोहित या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।
- संकल्प: प्रातः स्नान के बाद दिन का संकल्प लें कि आज प्रदोष व्रत रखा जाएगा और सायंकाल शिव-पूजा की जाएगी।
- उपवास: दिन भर उपवास रखा जाता है — कुछ लोग निर्जल रहते हैं, कुछ फलाहार लेते हैं। यह अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तय करें।
- सायं तैयारी: सूर्यास्त से पहले स्नान करके पूजा-स्थान स्वच्छ करें। शिवलिंग या शिव-प्रतिमा के समक्ष दीप, जल, बेलपत्र, फूल और धूप अर्पित करें।
- प्रदोष काल में पूजा: प्रदोष काल के भीतर शिव का पूजन, ॐ नमः शिवाय का जप तथा शिव-स्तोत्र या स्तुति का पाठ करें।
- कथा श्रवण: प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें, और उसका भाव मन में रखें।
- समापन: पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और अगले दिन परना करें।
यह व्रत श्रद्धा और नियमितता पर आधारित है। इसे किसी दबाव या भय से नहीं, बल्कि शांत मन से किया जाना चाहिए।
क्या खाएँ और क्या टालें
उपवास के दिन भोजन को लेकर परंपराएँ अलग-अलग हैं, पर कुछ सामान्य बातें सभी में मिलती हैं।
- फलाहार: फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा और समय-समय पर स्वीकृत व्रत-अनाज लिए जा सकते हैं।
- अनाज और भारी भोजन: सामान्य अनाज, दाल, प्याज-लहसुन तथा तामसिक माने जाने वाले भोजन से बचा जाता है।
- मादक वस्तुएँ: मद्य, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ वर्जित माने जाते हैं।
- संयम: कई लोग सात्त्विक भोजन और मितभाषण को भी व्रत का अंग मानते हैं।
यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी स्थ