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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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दिव्य पंचांगम्DivyaPanchangamपंचांग, मुहूर्त, मंदिर और हिंदू जगत — हर सुबह, हर शहर

नवग्रह स्थिति · 28 अक्टूबर 2026

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
सूर्यतुला10°23′Swatiमार्गी17 अक्टू॰ 202616 नव॰ 2026, 19:43→ वृश्चिक
चंद्रवृषभ5°44′Krittikaमार्गीलगभग हर सवा दो दिन में राशि बदलता है; दैनिक पंचांग देखें
मंगलकर्क22°22′Ashleshaमार्गी18 सित॰ 202612 नव॰ 2026, 20:18→ सिंह
बुधतुला25°45′Vishakhaवक्री26 सित॰ 20262 दिस॰ 2026, 17:27→ वृश्चिक
गुरुकर्क29°35′Ashleshaमार्गी2 जून 202631 अक्टू॰ 2026, 12:02→ सिंह
शुक्रतुला4°10′Chitraवक्री2 सित॰ 20266 नव॰ 2026, 01:04→ कन्या (वक्री)
शनिमीन15°18′Uttara Bhadrapadaवक्री29 मार्च 20253 जून 2027, 05:28→ मेष
राहुकुंभ2°02′Dhanishtaवक्री18 मई 20255 दिस॰ 2026, 22:32→ मकर
केतुसिंह2°02′Maghaवक्री18 मई 20255 दिस॰ 2026, 22:32→ कर्क

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

वक्री अवधि

नौ ग्रह

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों की गणना की जाती है। इस पृष्ठ पर इन नौ ग्रहों की प्रविष्टियाँ दी गई हैं — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।

इनमें सात ग्रह भौतिक खगोलीय पिंड हैं, जबकि राहु और केतु चंद्रमा के पथ से जुड़े बिंदु माने जाते हैं। परंपरा में प्रत्येक ग्रह का अपना स्वभाव, दृष्टि और कारकत्व बताया गया है। कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति, उसकी राशि, भाव और अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंध को मिलाकर पढ़ा जाता है — अकेले एक ग्रह से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।

यह ध्यान रखें कि उत्तर और दक्षिण भारत की पद्धतियों, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में कुछ विवरण भिन्न रूप में मिलते हैं। इसी प्रकार अमांत और पूर्णिमांत मास-गणना का अंतर भी कहीं-कहीं दिखता है। इसलिए इस पृष्ठ की सामग्री को सामान्य परिचय के रूप में पढ़ें।

शुभ और अशुभ ग्रह

शास्त्रीय वर्गीकरण में ग्रहों को शुभ और अशुभ के रूप में देखा जाता है। गुरु और शुक्र को सामान्यतः शुभ, तथा सूर्य, मंगल और शनि को अशुभ कहा जाता है। बुध और चंद्र की गणना उनके संबंध और अवस्था के अनुसार बदलती है। राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है।

यह वर्गीकरण स्थिर और अंतिम नहीं है — किसी ग्रह का प्रभाव उसकी राशि, भाव, दृष्टि और साथी ग्रहों पर निर्भर करता है। इसीलिए केवल नाम देखकर शुभ या अशुभ का निर्णय नहीं किया जाता।

गोचर और दशा

ज्योतिष में समय को दो मुख्य दृष्टियों से देखा जाता है। गोचर में ग्रहों की वर्तमान आकाशीय चाल को जन्म-कुंडली के सापेक्ष पढ़ा जाता है। दशा में जन्म के समय के आधार पर ग्रहों के कालखंड क्रम से चलते हैं और उन्हीं के अनुसार फल-