शुभ मुहूर्त
- विवाह मुहूर्त Vivah Muhurat
- अगला: बुधवार, 25 नवंबर 202606:51–12:07, 13:27–06:52 (+1) IST · प्रतिपदा / द्वितीया · अगले 12 महीनों में 71 दिन
- गृह प्रवेश मुहूर्त Griha Pravesh Muhurat
- अगला: गुरुवार, 28 जनवरी 202707:11–13:54, 15:15–17:57 IST · सप्तमी · अगले 12 महीनों में 19 दिन
- मुंडन मुहूर्त Mundan Muhurat
- अगला: बुधवार, 27 जनवरी 202707:11–12:33, 13:54–17:56 IST · षष्ठी · अगले 12 महीनों में 37 दिन
- नामकरण मुहूर्त Namkaran Muhurat
- अगला: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 202606:31–09:04 IST · पंचमी · अगले 12 महीनों में 105 दिन
- अन्नप्राशन मुहूर्त Annaprashan Muhurat
- अगला: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 202606:31–09:04 IST · पंचमी · अगले 12 महीनों में 57 दिन
- वाहन खरीद मुहूर्त Vahan Kharid Muhurat
- अगला: शुक्रवार, 6 नवंबर 202606:36–10:42, 12:04–17:32 IST · द्वादशी / त्रयोदशी · अगले 12 महीनों में 80 दिन
- संपत्ति खरीद मुहूर्त Property Purchase Muhurat
- अगला: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 202606:31–09:04 IST · पंचमी · अगले 12 महीनों में 70 दिन
- व्यापार आरंभ मुहूर्त Business Opening Muhurat
- अगला: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 202606:31–09:04 IST · पंचमी · अगले 12 महीनों में 72 दिन
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के लिए गणना; समय IST में। सूची का दिन शास्त्रीय दिन-स्तर के नियमों पर खरा है; सटीक समय आपके पुरोहित तय करते हैं।
मुहूर्त क्या है
ज्योतिष परंपरा में मुहूर्त का अर्थ है — किसी शुभ कार्य को आरंभ करने के लिए चुना गया वह समय, जो पंचांग के कई अंगों को एक साथ देखकर निकाला जाता है। यह केवल कोई एक तिथि या वार देख लेना नहीं है; मुहूर्त उस क्षण की गणना है जहाँ तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण आदि अंग विचार किए जाते हैं।
इस पृष्ठ पर दिए गए मुहूर्त संस्कार और व्यावहारिक अवसरों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखे गए हैं:
- विवाह मुहूर्त
- गृह प्रवेश मुहूर्त
- मुंडन मुहूर्त
- नामकरण मुहूर्त
- अन्नप्राशन मुहूर्त
- वाहन खरीद मुहूर्त
- संपत्ति खरीद मुहूर्त
- व्यापार आरंभ मुहूर्त
पंचांग के जिन अंगों की जाँच होती है
पारंपरिक विधि में मुहूर्त निकालते समय पंचांग के मुख्य अंगों पर विचार किया जाता है — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनके साथ ही सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार दिन का विभाजन, तथा किसी कार्य के लिए अनुकूल या प्रतिकूल माने जाने वाले कालखंड भी देखे जाते हैं। प्रत्येक संस्कार या कार्य की अपनी अलग अपेक्षाएँ होती हैं — विवाह के लिए जो अंग महत्वपूर्ण माने जाते हैं, वे गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ के लिए भिन्न हो सकते हैं। इसी कारण एक ही दिन सभी कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
यह भी ध्यान रखें कि परंपराओं में मतभेद हो सकता है। उत्तर और दक्षिण भारत की पद्धतियाँ, तथा स्मार्त और वैष्णव जैसी शाखाएँ, कुछ अंगों को अलग-अलग महत्व देती हैं। इसी प्रकार अमांत और पूर्णिमांत मास गणना का अंतर भी तिथियों के निर्धारण को प्रभावित करता है। इसलिए किसी एक पद्धति को सर्वमान्य मान लेना उचित नहीं होता।
सामान्य मुहूर्त सूची की सीमाएँ
यह सूची सामान्य गणना पर आधारित है, जो अनेक लोगों के लिए एक सामान्य दिशा देती