शुभ मुहूर्त · Vahan Kharid Muhurat
वाहन खरीद मुहूर्त
| नक्षत्र | अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती |
|---|---|
| तिथियाँ | चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या को छोड़कर कोई भी |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| मास | कोई भी, नीचे दिए वर्जित समय को छोड़कर |
| वर्जित | अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष |
| समय खंड | सूर्योदय से सूर्यास्त तक वे घंटे जब नक्षत्र और तिथि दोनों उपयुक्त हों, राहु काल छोड़कर; कम से कम 48 मिनट |
| टिप्पणी | वाहन ख़रीदना या उसकी डिलीवरी लेना। |
वाहन खरीद मुहूर्त: शुभ समय क्यों देखा जाता है
वाहन खरीदना या उसकी डिलीवरी लेना एक ऐसा अवसर माना जाता है जिसमें नया साधन, नई यात्रा और नई जिम्मेदारी जुड़ती है। परंपरागत ज्योतिष में ऐसे अवसरों के लिए मुहूर्त देखने की प्रथा है, ताकि कार्य की शुरुआत एक संतुलित और शुभ समय में हो। यह गणना किसी व्यक्ति के भाग्य का दावा नहीं करती; यह केवल पंचांग के दिन-स्तरीय नियमों पर आधारित एक सहायक सूची है।
तिथि-सूची को कैसे पढ़ें
इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के लिए गणना किए गए पंचांग से निकाली जाती हैं। सूची में वे ही दिन आते हैं जिनमें नीचे दिए गए सभी नियम एक साथ पूरे होते हैं। हर प्रविष्टि के साथ वह समय-खिड़की दिखाई जाती है जिसमें नक्षत्र और तिथि दोनों योग्य रहते हैं।
समय-खिड़की सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच की होती है, राहु काल को छोड़कर, और कम से कम 48 मिनट की होती है। यदि किसी दिन योग्य नक्षत्र और तिथि का संगम 48 मिनट से कम रहता है, तो वह दिन सूची में नहीं आता।
यह सूची दिन-स्तर की जाँच है। इसे अंतिम निर्णय न मानें — इसे अपने पुरोहित या ज्योतिषी के साथ चर्चा का आधार मानें।
लागू किए जाने वाले नियम
नीचे वे शास्त्रीय नियम दिए गए हैं जिनके आधार पर यह सूची बनाई जाती है।
नक्षत्र
- अश्विनी
- पुनर्वसु
- पुष्य
- हस्त
- चित्रा
- स्वाति
- अनुराधा
- श्रवण
- धनिष्ठा
- शतभिषा
- रेवती
तिथि
कोई भी तिथि ली जा सकती है, केवल इन्हें छोड़कर:
- चतुर्थी
- नवमी
- चतुर्दशी
- अमावस्या
चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी को रिक्ता तिथियाँ कहा जाता है, इसलिए इन्हें मुहूर्त के लिए नहीं लिया जाता।
वार (दिन)
- सोमवार
- बुधवार
- गुरुवार
- शुक्रवार
महीना
किसी भी महीने में योग्य दिन हो सकता है, बशर्ते नीचे दिए गए निषेध लागू न हों।
कब नहीं
- अधिक (अतिरिक्त) चंद्र मास के दौरान
- पितृ पक्ष के दौरान
समय-खिड़की
सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच वे घंटे जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों योग्य हों, राहु काल को छोड़कर, और जो कम से कम 48 मिनट के हों।
उपयोग
यह मुहूर्त वाहन खरीदने या उसकी डिलीवरी लेने के लिए देखा जाता है।
यदि कोई मुहूर्त न मिले तो क्या करें
कभी-कभी किसी सुविधाजनक अवधि में ऊपर के सभी नियम एक साथ पूरे नहीं होते। ऐसी स्थिति में परंपरा में कई रास्ते बताए गए हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों या संप्रदायों में इनका पालन भिन्न हो सकता है।
- अपने पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श करें; वे जन्म कुंडली, ताराबल और चंद्रबल देखकर कोई उपयुक्त विकल्प सुझा सकते हैं।
- कुछ परंपराओं में शुभ दिन पर केवल बुकिंग या भुगतान करके डिलीवरी बाद में लेने की प्रथा है, तो कुछ में दोनों के लिए अलग समय देखा जाता है।
- उत्तर और दक्षिण भारत की पद्धतियों में, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में, अ
प्रश्न
वाहन खरीद मुहूर्त की तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
नई दिल्ली के गणना किए गए पंचांग से: कोई दिन तभी सूची में आता है जब उसका वार और मास उपयुक्त हों, इनमें से कुछ न चल रहा हो (अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष), और राहु काल के बाहर कम से कम 48 मिनट तक नक्षत्र और तिथि दोनों ऊपर की सूची में हों।
वाहन खरीद मुहूर्त के लिए कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।
क्या इस सूची की तिथि अपने आप में पर्याप्त है?
नहीं। यह सूची केवल दिन-स्तर का पंचांग देखती है। व्यक्तिगत बातें (संबंधित लोगों की कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न और कुल की परंपरा) समय तय करने से पहले आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं।