शुभ मुहूर्त · Annaprashan Muhurat
अन्नप्राशन मुहूर्त
| नक्षत्र | अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तर भाद्रपद, रेवती |
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| तिथियाँ | द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, त्रयोदशी (दोनों पक्ष) |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| मास | कोई भी, नीचे दिए वर्जित समय को छोड़कर |
| वर्जित | अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; खरमास (सूर्य धनु या मीन में) |
| समय खंड | सूर्योदय से सूर्यास्त तक वे घंटे जब नक्षत्र और तिथि दोनों उपयुक्त हों, राहु काल छोड़कर; कम से कम 48 मिनट |
| टिप्पणी | पहला अन्न: लड़के के लिए छठे या आठवें महीने में, लड़की के लिए पाँचवें या सातवें में। तिथियाँ द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी और त्रयोदशी। |
अन्नप्राशन मुहूर्त: क्यों मायने रखता है समय
अन्नप्राशन वह संस्कार है जब शिशु को पहली बार अन्न (ठोस आहार) दिया जाता है। यह केवल आहार की शुरुआत नहीं, बल्कि परिवार द्वारा शिशु के स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना का अवसर माना जाता है। ज्योतिष परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की तरह इसके लिए भी ऐसा समय चुना जाता है जिसमें दिन, नक्षत्र और तिथि का संयोग अनुकूल हो।
यहाँ यह स्पष्ट कर देना उचित है कि मुहूर्त का अर्थ किसी परिणाम की गारंटी नहीं है। यह परंपरा द्वारा सुझाया गया एक शुभ और शांत समय है, जिसे परिवार अपने आस्था और कुल-रीति के अनुसार चुनता है। व्यक्तिगत फल, स्वास्थ्य या भविष्य के बारे में कोई दावा इस लेख का उद्देश्य नहीं है।
तिथि-सूची को कैसे पढ़ें
इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ पंचांग की गणना से निकाली जाती हैं। सूची में कोई दिन तभी शामिल होता है जब उसका वार और माह स्वीकार्य हों, ऊपर बताए गए निषेध काल (अधिक मास, पितृ पक्ष, खरमास) में से कोई भी न चल रहा हो, और सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच कम से कम 48 मिनट का ऐसा समय उपलब्ध हो जिसमें नक्षत्र और तिथि दोनों सूची के अनुसार हों तथा राहु काल न पड़े।
इसका अर्थ यह है कि सूची दिन-स्तर की जाँच है। यह आपके परिवार के व्यक्तिगत कारकों को नहीं देखती। इसलिए किसी तिथि को देखकर यह न मान लें कि वह आपके लिए अंतिम रूप से उपयुक्त है।
- सूची में दिया गया समय-खिड़की सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच का है, और राहु काल को छोड़कर गिना जाता है।
- हर प्रविष्टि में नक्षत्र और तिथि दोनों का योगदान होता है; एक के अभाव में वह अंतराल नहीं गिना जाता।
- माह कोई भी हो सकता है, बशर्ते वह निषेध काल में न आए।
- तिथियों की वास्तविक सूची इस पृष्ठ पर डेटाबेस से दिखाई जाती है; यहाँ उन्हें पाठ में नहीं लिखा गया।
परिवार की परंपरा के अनुसार कुछ स्थानों पर अमांत और कुछ में पूर्णिमांत मास गणना मानी जाती है। स्मार्त और वैष्णव रीतियों में भी कुछ अंतर देखने को मिलते हैं। इसलिए अपने कुल की परंपरा को ध्यान में रखें।
लागू किए जाने वाले नियम
शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथों में अन्नप्राशन के लिए जो नियम बताए गए हैं, इस गणना में वही आधार लिए गए हैं:
- नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती।
- तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी और त्रयोदशी — दोनों पक्षों में।
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार।
- माह: कोई भी, परंतु नीचे दिए निषेधों के अधीन।
- जब न करें: अधिक (अतिरिक्त) चांद्र मास, पितृ पक्ष, तथा खरमास (सूर्य का धनु या मीन में होना)।
- समय-खिड़की: सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच वे घंटे जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों योग्य हों, राहु काल को छोड़कर, और कम से कम 48 मिनट का अंतराल हो।
शिशु की आयु के विषय में परंपरा कहती है कि पहला ठोस आहार बालक के लिए छठे या आठवें माह में, और बालिका के लिए पाँचवें या सातवें माह में दिया जाता है। इ
प्रश्न
अन्नप्राशन मुहूर्त की तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
नई दिल्ली के गणना किए गए पंचांग से: कोई दिन तभी सूची में आता है जब उसका वार और मास उपयुक्त हों, इनमें से कुछ न चल रहा हो (अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; खरमास (सूर्य धनु या मीन में)), और राहु काल के बाहर कम से कम 48 मिनट तक नक्षत्र और तिथि दोनों ऊपर की सूची में हों।
अन्नप्राशन मुहूर्त के लिए कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तर भाद्रपद, रेवती।
क्या इस सूची की तिथि अपने आप में पर्याप्त है?
नहीं। यह सूची केवल दिन-स्तर का पंचांग देखती है। व्यक्तिगत बातें (संबंधित लोगों की कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न और कुल की परंपरा) समय तय करने से पहले आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं।