Debashree Sen
Pacific time readings in Bengali, English and Hindi
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शुभ मुहूर्त · Mundan Muhurat
अगली तिथि बुधवार, 27 जनवरी 2027 · 07:11–12:33, 13:54–17:56 IST · षष्ठी
| नक्षत्र | अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती |
|---|---|
| तिथियाँ | चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या को छोड़कर कोई भी |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| मास | चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, माघ, फाल्गुन (पूर्णिमांत) |
| वर्जित | अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक |
| समय खंड | सूर्योदय से सूर्यास्त तक वे घंटे जब नक्षत्र और तिथि दोनों उपयुक्त हों, राहु काल छोड़कर; कम से कम 48 मिनट |
| टिप्पणी | चूड़ाकरण, सामान्यतः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में; बच्चे का जन्म मास टाला जाता है (अपने पुरोहित से पूछें)। |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 27 जन॰ | 07:11–12:33, 13:54–17:56 IST | हस्त | षष्ठी |
| गुरु, 28 जन॰ | 07:11–13:54, 15:15–17:57 IST | चित्रा | सप्तमी |
| शुक्र, 29 जन॰ | 07:10–11:13, 12:34–17:57 IST | स्वाति | अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 1 फ़र॰ | 07:09–08:30, 09:52–18:00 IST | ज्येष्ठा | दशमी / एकादशी |
| सोम, 8 फ़र॰ | 07:04–08:27, 09:50–18:05 IST | शतभिषा | द्वितीया |
| गुरु, 11 फ़र॰ | 07:02–13:58, 15:21–18:08 IST | रेवती | पंचमी |
| शुक्र, 12 फ़र॰ | 07:02–11:12, 12:35–18:09 IST | अश्विनी | षष्ठी |
| गुरु, 18 फ़र॰ | 06:57–13:59, 15:24–18:13 IST | पुनर्वसु | द्वादशी / त्रयोदशी |
| शुक्र, 19 फ़र॰ | 06:56–11:10 IST | पुष्य | त्रयोदशी |
| गुरु, 25 फ़र॰ | 06:50–14:00, 15:26–18:18 IST | चित्रा / स्वाति | पंचमी |
| शुक्र, 26 फ़र॰ | 06:49–10:13 IST | स्वाति | षष्ठी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 5 मार्च | 06:42–11:05, 12:32–18:23 IST | श्रवण | द्वादशी / त्रयोदशी |
| बुध, 10 मार्च | 10:52–12:31, 14:00–18:26 IST | रेवती | द्वितीया / तृतीया |
| गुरु, 11 मार्च | 06:35–14:00 IST | रेवती / अश्विनी | तृतीया |
| सोम, 15 मार्च | 09:30–18:29 IST | मृगशिरा | सप्तमी / अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 21 अप्रैल | 05:49–12:20, 13:57–18:50 IST | स्वाति | प्रतिपदा |
| बुध, 28 अप्रैल | 17:30–18:54 IST | श्रवण | अष्टमी |
| गुरु, 29 अप्रैल | 05:42–13:57 IST | श्रवण | अष्टमी |
| शुक्र, 30 अप्रैल | 17:14–18:55 IST | धनिष्ठा | दशमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 10 मई | 18:08–19:01 IST | पुनर्वसु | पंचमी |
| बुध, 12 मई | 05:32–12:17, 13:59–14:56 IST | पुष्य | सप्तमी |
| मंगल, 18 मई | 05:28–07:11, 08:53–16:04 IST | चित्रा / स्वाति | त्रयोदशी |
| शुक्र, 21 मई | 15:43–19:08 IST | ज्येष्ठा | प्रतिपदा / द्वितीया |
| शनि, 22 मई | 05:26–10:35, 12:17–16:50 IST | ज्येष्ठा | द्वितीया |
| गुरु, 27 मई | 05:24–12:18, 14:01–19:11 IST | धनिष्ठा | सप्तमी |
| शुक्र, 28 मई | 05:24–14:01, 15:45–19:12 IST | धनिष्ठा / शतभिषा | सप्तमी / अष्टमी |
| शनि, 29 मई | 05:24–08:20 IST | शतभिषा | अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| मंगल, 1 जून | 05:23–07:07, 08:51–19:14 IST | रेवती / अश्विनी | एकादशी / द्वादशी |
| शनि, 5 जून | 07:02–10:35, 12:19–19:16 IST | मृगशिरा | प्रतिपदा |
| मंगल, 8 जून | 12:22–19:17 IST | पुष्य | पंचमी |
| मंगल, 15 जून | 05:22–07:07, 08:52–18:23 IST | स्वाति | द्वादशी |
| शुक्र, 18 जून | 05:23–14:07, 15:51–19:21 IST | ज्येष्ठा | पूर्णिमा |
| मंगल, 22 जून | 08:53–13:07 IST | श्रवण | तृतीया |
| गुरु, 24 जून | 05:24–12:23, 14:08–19:22 IST | धनिष्ठा / शतभिषा | पंचमी / षष्ठी |
| शुक्र, 25 जून | 05:24–14:08, 15:53–17:07 IST | शतभिषा | षष्ठी |
| मंगल, 29 जून | 05:25–07:10, 08:55–19:23 IST | अश्विनी | दशमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| मंगल, 6 जुल॰ | 05:28–06:34 IST | पुष्य | तृतीया |
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के लिए गणना; समय IST में। अपने शहर और परिवार के लिए सटीक समय अपने पुरोहित से तय कराएँ।
मुंडन, जिसे चूड़ाकरण भी कहा जाता है, बालक के पहले केश-कर्तन का संस्कार है। परंपरा में यह संस्कार प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में किया जाता है। ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो मुहूर्त का अर्थ केवल "शुभ दिन" ढूँढ़ना नहीं है — यह देखना है कि उस दिन और उस समय आकाशीय गणना किस प्रकार की स्थिति बना रही है। पंचांग के पाँच अंगों में तिथि, वार, नक्षत्र और योग का संबंध इस संस्कार से जोड़ा गया है।
यहाँ यह स्पष्ट कर देना उचित है कि यह सूची केवल दिन-स्तर के पंचांग की जाँच करती है। यह किसी बालक के जन्म-कुंडली का आकलन नहीं करती और न ही किसी परिणाम का वचन देती है। शास्त्रीय परंपरा में मुहूर्त को "समय का चयन" माना गया है, "परिणाम का निर्धारण" नहीं। इसलिए इसे एक सहायक सूची की तरह पढ़ें, अंतिम निर्णय की तरह नहीं।
इस पृष्ठ पर दिखाई जाने वाली तिथियाँ नई दिल्ली के लिए गणना किए गए पंचांग से बनाई गई हैं। किसी दिन को सूची में तभी रखा जाता है जब वह नीचे दिए गए सभी स्तरों पर उत्तीर्ण हो:
सूची में दिखाई जाने वाली तिथियाँ और समय-खिड़कियाँ इस पृष्ठ पर डेटाबेस से प्रदर्शित की जाती हैं। यहाँ गद्य में कोई तिथि नहीं लिखी गई है, क्योंकि समय-खिड़कियाँ स्थान और वर्ष के अनुसार बदलती रहती हैं। मोबाइल पर पढ़ते समय प्रत्येक दिन के सामने दी गई खिड़की को ध्यान से देखें — कभी-कभी एक ही दिन में नक्षत्र बदलने से खिड़की छोटी या बड़ी हो सकती है।
नीचे वे शास्त्रीय मानदंड दिए गए हैं जिनके आधार पर दिन-सूची बनाई जाती है।
अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती — ये नक्षत्र मुंडन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।
चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (ऋक्ता) और अमावस्या को छोड़कर शेष सभी तिथियाँ ली जाती हैं।
वार — सोम, बुध, गुरु, शुक्र। मास — चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, माघ, फाल्गुन (पूर्णिमांत)।
अधिक मास, पितृ पक्ष, गुरु या शुक्र का अस्त, खरमास, चातुर्मास और होलाष्टक — इन अवधियों में मुंडन नहीं रखा जाता।
जब नक्षत्र और तिथि दोनों पात्र हों, सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच, राहु काल को छोड़कर, और कम से कम 48 मिनट की अवधि उपलब्ध हो — ऐसी खिड़की ही सूची में आती है।
यह भी ध्यान रखें कि परंपराएँ भिन्न-भिन
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 17 जन॰ | 07:30–08:33, 09:52–17:47 IST | हस्त | षष्ठी / सप्तमी |
| बुध, 19 जन॰ | 07:14–12:29 IST | स्वाति | अष्टमी |
| गुरु, 27 जन॰ | 07:11–13:54, 15:14–17:56 IST | श्रवण | प्रतिपदा |
| शुक्र, 28 जन॰ | 07:11–11:13, 12:34–17:56 IST | धनिष्ठा | द्वितीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 2 फ़र॰ | 07:08–12:34, 13:56–18:00 IST | रेवती / अश्विनी | षष्ठी / सप्तमी |
| गुरु, 3 फ़र॰ | 07:08–11:39 IST | अश्विनी | सप्तमी |
| सोम, 7 फ़र॰ | 07:05–08:28, 09:50–11:09 IST | मृगशिरा | एकादशी / द्वादशी |
| सोम, 14 फ़र॰ | 07:00–08:24, 09:48–18:10 IST | हस्त / चित्रा | पंचमी |
| बुध, 16 फ़र॰ | 06:59–12:26 IST | स्वाति | सप्तमी |
| बुध, 23 फ़र॰ | 06:52–10:44 IST | श्रवण | त्रयोदशी |
| शुक्र, 25 फ़र॰ | 16:07–18:18 IST | शतभिषा | प्रतिपदा |
| सोम, 28 फ़र॰ | 13:39–18:20 IST | रेवती | तृतीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 1 मार्च | 06:45–12:33, 14:00–17:53 IST | अश्विनी | पंचमी |
| सोम, 13 मार्च | 06:32–08:02, 09:31–18:28 IST | चित्रा | तृतीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 19 अप्रैल | 05:51–12:20, 13:57–18:49 IST | धनिष्ठा / शतभिषा | दशमी / एकादशी |
| गुरु, 20 अप्रैल | 05:50–13:57, 15:35–18:50 IST | शतभिषा | एकादशी / द्वादशी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 1 मई | 05:40–07:19, 08:59–18:56 IST | पुनर्वसु / पुष्य | सप्तमी |
| सोम, 8 मई | 05:34–07:15, 08:56–17:42 IST | स्वाति | पूर्णिमा |
| बुध, 10 मई | 15:53–19:02 IST | ज्येष्ठा | द्वितीया |
| गुरु, 11 मई | 05:32–13:59 IST | ज्येष्ठा | तृतीया |
| सोम, 15 मई | 05:30–07:11, 08:53–19:05 IST | श्रवण | सप्तमी |
| मंगल, 16 मई | 05:29–07:11, 08:53–19:05 IST | धनिष्ठा | अष्टमी |
| शनि, 20 मई | 12:17–19:08 IST | रेवती | द्वादशी |
| गुरु, 25 मई | 14:38–19:11 IST | मृगशिरा | द्वितीया |
| शुक्र, 26 मई | 05:25–14:01 IST | मृगशिरा | द्वितीया / तृतीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| मंगल, 13 जून | 05:22–07:07, 08:51–19:20 IST | धनिष्ठा / शतभिषा | षष्ठी / सप्तमी |
| शनि, 17 जून | 05:23–10:37, 12:22–19:21 IST | रेवती | दशमी |
| शनि, 24 जून | 05:24–10:38, 12:23–19:22 IST | पुनर्वसु | द्वितीया |
| गुरु, 29 जून | 10:51–12:24, 14:09–19:23 IST | हस्त | अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| शनि, 1 जुल॰ | 05:26–10:40, 12:25–19:23 IST | चित्रा / स्वाति | दशमी |
नई दिल्ली के गणना किए गए पंचांग से: कोई दिन तभी सूची में आता है जब उसका वार और मास उपयुक्त हों, इनमें से कुछ न चल रहा हो (अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक), और राहु काल के बाहर कम से कम 48 मिनट तक नक्षत्र और तिथि दोनों ऊपर की सूची में हों।
अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।
नहीं। यह सूची केवल दिन-स्तर का पंचांग देखती है। व्यक्तिगत बातें (संबंधित लोगों की कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न और कुल की परंपरा) समय तय करने से पहले आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं।
अपनी कुंडली के बारे में प्रश्न? अपनी भाषा बोलने वाले ज्योतिषी से बात करें।
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