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रविवार, 25 अक्टूबर 2026
English·न्यूज़लेटर·खाता
दिव्य पंचांगम्DivyaPanchangamपंचांग, मुहूर्त, मंदिर और हिंदू जगत — हर सुबह, हर शहर

व्रत और उपवास

आगामी व्रत (अगले 60 दिन)

अक्टूबर 2026

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026पूर्णिमा · आश्विन शुक्ल
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026संकष्टी चतुर्थी · कार्तिक कृष्ण

नवंबर 2026

रविवार, 1 नवंबर 2026अहोई अष्टमी
सोमवार, 2 नवंबर 2026कालाष्टमी · कार्तिक
गुरुवार, 5 नवंबर 2026एकादशी · कार्तिक कृष्ण
गुरुवार, 5 नवंबर 2026रमा एकादशी
शनिवार, 7 नवंबर 2026प्रदोष व्रत · कार्तिक कृष्ण
रविवार, 8 नवंबर 2026मासिक शिवरात्रि · कार्तिक कृष्ण
सोमवार, 9 नवंबर 2026अमावस्या · कार्तिक कृष्ण
शुक्रवार, 13 नवंबर 2026विनायक चतुर्थी · कार्तिक शुक्ल
रविवार, 15 नवंबर 2026स्कंद षष्ठी · कार्तिक
सोमवार, 16 नवंबर 2026संक्रांति · तुला
मंगलवार, 17 नवंबर 2026मासिक दुर्गाष्टमी · कार्तिक
शनिवार, 21 नवंबर 2026एकादशी · कार्तिक शुक्ल
रविवार, 22 नवंबर 2026प्रदोष व्रत · कार्तिक शुक्ल
मंगलवार, 24 नवंबर 2026पूर्णिमा · कार्तिक शुक्ल

दिसंबर 2026

मंगलवार, 1 दिसंबर 2026कालाष्टमी · मार्गशीर्ष
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026उत्पन्ना एकादशी
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026एकादशी · मार्गशीर्ष कृष्ण
रविवार, 6 दिसंबर 2026प्रदोष व्रत · मार्गशीर्ष कृष्ण
सोमवार, 7 दिसंबर 2026मासिक शिवरात्रि · मार्गशीर्ष कृष्ण
मंगलवार, 8 दिसंबर 2026अमावस्या · मार्गशीर्ष कृष्ण
रविवार, 13 दिसंबर 2026विनायक चतुर्थी · मार्गशीर्ष शुक्ल
मंगलवार, 15 दिसंबर 2026स्कंद षष्ठी · मार्गशीर्ष
बुधवार, 16 दिसंबर 2026संक्रांति · वृश्चिक
गुरुवार, 17 दिसंबर 2026मासिक दुर्गाष्टमी · मार्गशीर्ष
रविवार, 20 दिसंबर 2026मोक्षदा एकादशी
रविवार, 20 दिसंबर 2026एकादशी · मार्गशीर्ष शुक्ल
मंगलवार, 22 दिसंबर 2026प्रदोष व्रत · मार्गशीर्ष शुक्ल
गुरुवार, 24 दिसंबर 2026पूर्णिमा · पौष कृष्ण

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना।

सभी व्रत और उपवास

व्रत क्या है

व्रत का अर्थ केवल उपवास नहीं, बल्कि संकल्प, संयम और साधना का एक ढाँचा है। साधक दिन भर या आहार-नियमों में संयम रखता है, पूजा-पाठ करता है और अपने इष्ट देव या देवी का स्मरण करता है। परंपरा में व्रत को शरीर, वाणी और मन की साधना माना गया है, इसलिए इसे श्रद्धा और स्थिरता के साथ किया जाता है। यहाँ दी गई सूची में एकादशी, प्रदोष व्रत, पूर्णिमा, अमावस्या, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, मासिक दुर्गाष्टमी, स्कंद षष्ठी, संक्रांति, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण जैसे अवसर शामिल हैं। किसी भी व्रत का पालन करने से पहले अपनी परंपरा, स्वास्थ्य और दैनिक दिनचर्या को ध्यान में रखें। व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है।

मासिक और साप्ताहिक व्रत

व्रतों को मोटे तौर पर दो समूहों में समझा जा सकता है — तिथि आधारित और वार आधारित।

एकादशी की सूची में पापमोचनी, कामदा, वरूथिनी, मोहिनी, अपरा, निर्जला, योगिनी, देवशयनी, कामिका, श्रावण पुत्रदा, अजा, परिवर्तिनी, इंदिरा, पापांकुशा, रमा, उत्पन्ना, मोक्षदा, सफला, पौष पुत्रदा, ष