व्रत और उपवास · Masik Shivaratri
मासिक शिवरात्रि
अगली तिथि रविवार, 8 नवंबर 2026 · चतुर्दशी तक 05:58 UTC
| कब | हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी |
|---|---|
| देवता | शिव |
| विधि | रात्रि पूजा, चार प्रहर |
मासिक शिवरात्रि 2026 की तिथियाँ
- माघ कृष्ण
- शनिवार, 17 जनवरी 2026चतुर्दशी तक 18:34 UTC
- फाल्गुन कृष्ण
- सोमवार, 16 फ़रवरी 2026चतुर्दशी तक 12:04 UTC
- चैत्र कृष्ण
- बुधवार, 18 मार्च 2026चतुर्दशी तक 02:55 UTC
- वैशाख कृष्ण
- गुरुवार, 16 अप्रैल 2026चतुर्दशी तक 14:41 UTC
- ज्येष्ठ कृष्ण
- शनिवार, 16 मई 2026अमावस्या तक 20:01 UTC
- आषाढ़ कृष्ण
- रविवार, 14 जून 2026चतुर्दशी तक 06:50 UTC
- आषाढ़ कृष्ण
- सोमवार, 13 जुलाई 2026चतुर्दशी तक 13:20 UTC
- श्रावण कृष्ण
- मंगलवार, 11 अगस्त 2026चतुर्दशी तक 20:23 UTC
- भाद्रपद कृष्ण
- गुरुवार, 10 सितंबर 2026चतुर्दशी तक 05:03 UTC
- आश्विन कृष्ण
- शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026चतुर्दशी तक 16:06 UTC
- कार्तिक कृष्ण
- रविवार, 8 नवंबर 2026चतुर्दशी तक 05:58 UTC
- मार्गशीर्ष कृष्ण
- सोमवार, 7 दिसंबर 2026चतुर्दशी तक 22:43 UTC
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
मासिक शिवरात्रि — अर्थ और महत्व
मासिक शिवरात्रि का अर्थ है — हर माह आने वाली शिवरात्रि। पंचांग के अनुसार यह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है। जहाँ महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार आती है, वहीं मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह लौटती रहती है, और इसीलिए इसे साधक के लिए एक नियमित, शांत अभ्यास माना जाता है।
इस व्रत के अधिष्ठाता देव शिव हैं। परंपरा में कृष्ण चतुर्दशी की रात को जागरण, ध्यान और शिव-स्मरण के लिए उपयुक्त माना गया है। यह व्रत मन को स्थिर करने, इंद्रिय-संयम और भक्ति को दिशा देने का साधन है — न कि किसी भौतिक परिणाम की गारंटी।
यहाँ यह स्मरण रखें कि परंपराओं में कुछ भिन्नताएँ हैं। तिथि-गणना में अमांत और पूर्णिमांत पद्धतियों का अंतर होता है, और उत्तर तथा दक्षिण भारत की विधियों में भी स्थानीय रीति के अनुसार अंतर मिलता है। किसी एक को सर्वमान्य कहने के बजाय अपने कुल या क्षेत्रीय पंचांग और परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।
व्रत विधि — चरण दर चरण
मासिक शिवरात्रि का व्रत मुख्यतः रात्रि पूजा और चार प्रहर के आधार पर किया जाता है। प्रहर रात्रि के चार विभाग माने गए हैं, और प्रत्येक प्रहर में पूजा का क्रम चलता है।
- तैयारी: दिन में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा-स्थान को साफ करें और शिवलिंग अथवा शिव-प्रतिमा के समक्ष दीप, जल, बेलपत्र, फूल और धूप की व्यवस्था करें।
- संकल्प: व्रत का संकल्प लें — किस उद्देश्य से, किस नियम से, और कब तक यह व्रत रखा जाएगा। संकल्प मन में स्पष्टता लाता है।
- प्रथम प्रहर: संध्या के समय शिव का पूजन, जल और बेलपत्र अर्पित करें, नाम-जप या ध्यान करें।
- द्वितीय प्रहर: पुनः पूजा, स्तुति-पाठ और जप। इस समय मन को एक विषय पर टिकाना सहायक माना जाता है।
- तृतीय प्रहर: शिव-कथा या स्तोत्र का श्रवण-पाठ, कीर्तन या मौन जप।
- चतुर्थ प्रहर: अंतिम पूजा, क्षमा-प्रार्थना और प्रार्थना कि यह साधना सबके कल्याण हेतु हो। इसके बाद जागरण पूर्ण होता है।
यह क्रम सरल भी है और लचीला भी। जो पूरी रात जागरण नहीं कर सकते, वे अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार विधि को सरल बना सकते हैं — भाव और नियमितता को मुख्य माना जाता है।
क्या खाएँ और क्या टालें
व्रत के दिन भोजन को लेकर परंपरा में विविध रीतियाँ प्रचलित हैं, और यह भी क्षेत्र तथा कुल-परंपरा पर निर्भर करता है। सामान्य दिशा यह है कि अन्न-त्याग और सात्विक आहार पर बल रहता है।
- सामान्यतः लिए जाने वाले: फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा, राजगिरा, कुट्टू, समक-चावल, भुने हुए अनाज, गुड़, और शुद्ध जल।
- सामान्यतः टाले जाने वाले: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तामसिक भोजन, और व्रत-विधान में वर्जित माने जाने वाले अनाज।
- चिकित्सकीय सावधानी: यदि आपको कोई स्वास्थ्य स्थिति है, गर्भावस्था है, या आप दवा ले रहे हैं, तो उपवास का निर्णय अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही लें। व्रत किसी भी उपचार का विकल्प नहीं है।
- भाव: भोजन-नियम का उद्देश्य संयम और स्मरण है, शरीर को हानि पहुँचाना नहीं।
पारण के नियम
मासिक शिवरात्रि 2027 की तिथियाँ
- पौष कृष्ण
- बुधवार, 6 जनवरी 2027चतुर्दशी तक 17:44 UTC
- माघ कृष्ण
- शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2027चतुर्दशी तक 13:35 UTC
- फाल्गुन कृष्ण
- रविवार, 7 मार्च 2027चतुर्दशी तक 08:16 UTC
- चैत्र कृष्ण
- सोमवार, 5 अप्रैल 2027चतुर्दशी तक 00:10 UTC
- वैशाख कृष्ण
- बुधवार, 5 मई 2027चतुर्दशी तक 12:47 UTC
- ज्येष्ठ कृष्ण
- शुक्रवार, 4 जून 2027अमावस्या तक 19:40 UTC
- आषाढ़ कृष्ण
- शनिवार, 3 जुलाई 2027चतुर्दशी तक 06:36 UTC
- श्रावण कृष्ण
- रविवार, 1 अगस्त 2027चतुर्दशी तक 13:50 UTC
- भाद्रपद कृष्ण
- मंगलवार, 31 अगस्त 2027अमावस्या तक 17:41 UTC
- आश्विन कृष्ण
- बुधवार, 29 सितंबर 2027चतुर्दशी तक 05:25 UTC
- कार्तिक कृष्ण
- गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027चतुर्दशी तक 15:18 UTC
- मार्गशीर्ष कृष्ण
- शनिवार, 27 नवंबर 2027चतुर्दशी तक 03:37 UTC
- पौष कृष्ण
- रविवार, 26 दिसंबर 2027चतुर्दशी तक 18:53 UTC
मासिक शिवरात्रि 2028 की तिथियाँ
- माघ कृष्ण
- मंगलवार, 25 जनवरी 2028चतुर्दशी तक 12:47 UTC
- फाल्गुन कृष्ण
- गुरुवार, 24 फ़रवरी 2028चतुर्दशी तक 07:57 UTC
- चैत्र कृष्ण
- शुक्रवार, 24 मार्च 2028चतुर्दशी तक 02:27 UTC
- वैशाख कृष्ण
- रविवार, 23 अप्रैल 2028चतुर्दशी तक 18:51 UTC
- ज्येष्ठ कृष्ण
- मंगलवार, 23 मई 2028चतुर्दशी तक 08:40 UTC
- आषाढ़ कृष्ण
- बुधवार, 21 जून 2028चतुर्दशी तक 20:08 UTC
- श्रावण कृष्ण
- शुक्रवार, 21 जुलाई 2028चतुर्दशी तक 05:48 UTC
- भाद्रपद कृष्ण
- शनिवार, 19 अगस्त 2028चतुर्दशी तक 14:17 UTC
- आश्विन कृष्ण
- सोमवार, 18 सितंबर 2028अमावस्या तक 18:23 UTC
- कार्तिक कृष्ण
- मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028चतुर्दशी तक 06:35 UTC
- मार्गशीर्ष कृष्ण
- बुधवार, 15 नवंबर 2028चतुर्दशी तक 16:04 UTC
- पौष कृष्ण
- शुक्रवार, 15 दिसंबर 2028चतुर्दशी तक 03:31 UTC
प्रश्न
मासिक शिवरात्रि 2026 में कब है?
मासिक शिवरात्रि अगली बार रविवार, 8 नवंबर 2026 (चतुर्दशी तक 05:58 UTC) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
अगला मासिक शिवरात्रि कब है?
इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।
मासिक शिवरात्रि कैसे रखा जाता है?
रात्रि पूजा, चार प्रहर।
व्रत और उपवास में और
- अजा एकादशीAja Ekadashi
- अहोई अष्टमीAhoi Ashtami
- अमावस्याAmavasya
- आमलकी एकादशीAmalaki Ekadashi
- अपरा एकादशीApara Ekadashi
- देवशयनी एकादशीDevshayani Ekadashi
- मासिक दुर्गाष्टमीMasik Durgashtami
- एकादशीEkadashi
- गुरुवार व्रतGuruvar Vrat
- हल षष्ठीHal Shashti
- इंदिरा एकादशीIndira Ekadashi
- जया एकादशीJaya Ekadashi
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)Jivitputrika Vrat (Jitiya)
- कजरी तीजKajari Teej
- कामिका एकादशीKamika Ekadashi
- चंद्र ग्रहणLunar eclipse (Chandra Grahan)
- कामदा एकादशीKamada Ekadashi
- मंगलवार व्रतMangalvar Vrat
- कालाष्टमीKalashtami
- मोक्षदा एकादशीMokshada Ekadashi
- निर्जला एकादशीNirjala Ekadashi
- पापांकुशा एकादशीPapankusha Ekadashi
- मोहिनी एकादशीMohini Ekadashi
- पापमोचनी एकादशीPapmochani Ekadashi
- परिवर्तिनी एकादशीParivartini Ekadashi
- प्रदोष व्रतPradosh Vrat
- पूर्णिमाPurnima
- रमा एकादशीRama Ekadashi
- पौष पुत्रदा एकादशीPausha Putrada Ekadashi
- ऋषि पंचमीRishi Panchami
- सकट चौथSakat Chauth
- संकष्टी चतुर्थीSankashti Chaturthi
- संक्रांतिSankranti
- संतोषी माता व्रतSantoshi Mata Vrat
- सफला एकादशीSaphala Ekadashi
- शनिवार व्रतShanivar Vrat
- षटतिला एकादशीShattila Ekadashi
- शीतला अष्टमीSheetala Ashtami
- श्रावण पुत्रदा एकादशीShravana Putrada Ekadashi
- स्कंद षष्ठीSkanda Shashti
- सोमवार व्रतSomvar Vrat
- सूर्य ग्रहणSolar eclipse (Surya Grahan)
- उत्पन्ना एकादशीUtpanna Ekadashi
- वरूथिनी एकादशीVaruthini Ekadashi
- वरलक्ष्मी व्रतम्Varalakshmi Vratam
- वट पूर्णिमा व्रतVat Purnima Vrat
- वट सावित्री व्रतVat Savitri Vrat
- विजया एकादशीVijaya Ekadashi
- विनायक चतुर्थीVinayaka Chaturthi
- योगिनी एकादशीYogini Ekadashi