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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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व्रत और उपवास · Skanda Shashti

स्कंद षष्ठी

अगली तिथि रविवार, 15 नवंबर 2026 · शुक्ल षष्ठी

कबहर महीने की शुक्ल षष्ठी
देवताकार्तिकेय
विधिउपवास, मुरुगन पूजा

स्कंद षष्ठी 2026 की तिथियाँ

माघ
शनिवार, 24 जनवरी 2026शुक्ल षष्ठी
फाल्गुन
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026शुक्ल षष्ठी
चैत्र
मंगलवार, 24 मार्च 2026शुक्ल षष्ठी
वैशाख
बुधवार, 22 अप्रैल 2026शुक्ल षष्ठी
ज्येष्ठ
शुक्रवार, 22 मई 2026शुक्ल षष्ठी
आषाढ़
रविवार, 19 जुलाई 2026शुक्ल षष्ठी
श्रावण
मंगलवार, 18 अगस्त 2026शुक्ल षष्ठी
भाद्रपद
गुरुवार, 17 सितंबर 2026शुक्ल षष्ठी
आश्विन
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026शुक्ल षष्ठी
कार्तिक
रविवार, 15 नवंबर 2026शुक्ल षष्ठी
मार्गशीर्ष
मंगलवार, 15 दिसंबर 2026शुक्ल षष्ठी

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

स्कंद षष्ठी का महत्व

स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। कार्तिकेय को स्कंद और मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखकर मुरुगन की पूजा की जाती है।

परंपरा में स्कंद षष्ठी को भगवान कार्तिकेय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण व्रत माना गया है। जो लोग इसे रखते हैं, वे इस दिन सादगी, संयम और भक्ति को प्राथमिकता देते हैं। यह व्रत किसी फल की मांग के बिना भी श्रद्धा और अनुशासन के साथ रखा जाता है।

यह ध्यान रखें कि व्रत रखने की परंपराएँ क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। उत्तर और दक्षिण भारत में, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में विधि और नियमों में अंतर देखने को मिलता है। इसलिए अपने परिवार या क्षेत्र में प्रचलित विधि का पालन करना उचित माना जाता है।

व्रत विधि — चरण दर चरण

स्कंद षष्ठी की विधि सरल है, पर इसे नियम और श्रद्धा के साथ करने की परंपरा है।

व्रत की विधि में जटिलता आवश्यक नहीं है। जो भी विधि आप अपनाते हैं, उसे पूर्ण श्रद्धा और मन की एकाग्रता के साथ करें।

क्या खाएँ और क्या टालें

व्रत के दिन भोजन को लेकर परंपरागत नियम हैं। इनका उद्देश्य शरीर और मन को हल्का रखना तथा पूजा में ध्यान लगाना है।

यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, तो व्रत रखने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श करें। व्रत का उद्देश्य कष्ट नहीं, बल्कि साधना है।

पारण के नियम

पारण का अर्थ है व्रत तोड़ना। स्कंद षष्ठी का पारण सामान्यतः षष्ठी तिथि के पूर्ण होने और सप्तमी तिथि के आरंभ के बाद किया जाता है।

स्कंद षष्ठी 2027 की तिथियाँ

पौष
गुरुवार, 14 जनवरी 2027शुक्ल षष्ठी
माघ
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2027शुक्ल षष्ठी
फाल्गुन
रविवार, 14 मार्च 2027शुक्ल षष्ठी
चैत्र
सोमवार, 12 अप्रैल 2027शुक्ल षष्ठी
वैशाख
मंगलवार, 11 मई 2027शुक्ल षष्ठी
ज्येष्ठ
गुरुवार, 10 जून 2027शुक्ल षष्ठी
आषाढ़
शुक्रवार, 9 जुलाई 2027शुक्ल षष्ठी
श्रावण
शनिवार, 7 अगस्त 2027शुक्ल षष्ठी
भाद्रपद
सोमवार, 6 सितंबर 2027शुक्ल षष्ठी
आश्विन
मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027शुक्ल षष्ठी
कार्तिक
गुरुवार, 4 नवंबर 2027शुक्ल षष्ठी
मार्गशीर्ष
शनिवार, 4 दिसंबर 2027शुक्ल षष्ठी

स्कंद षष्ठी 2028 की तिथियाँ

पौष
सोमवार, 3 जनवरी 2028शुक्ल षष्ठी
माघ
बुधवार, 2 फ़रवरी 2028शुक्ल षष्ठी
फाल्गुन
गुरुवार, 2 मार्च 2028शुक्ल षष्ठी
चैत्र
शनिवार, 1 अप्रैल 2028शुक्ल षष्ठी
वैशाख
रविवार, 30 अप्रैल 2028शुक्ल षष्ठी
आषाढ़
बुधवार, 28 जून 2028शुक्ल षष्ठी
श्रावण
गुरुवार, 27 जुलाई 2028शुक्ल षष्ठी
भाद्रपद
शुक्रवार, 25 अगस्त 2028शुक्ल षष्ठी
आश्विन
रविवार, 24 सितंबर 2028शुक्ल षष्ठी
कार्तिक
सोमवार, 23 अक्टूबर 2028शुक्ल षष्ठी
मार्गशीर्ष
बुधवार, 22 नवंबर 2028शुक्ल षष्ठी

प्रश्न

स्कंद षष्ठी 2026 में कब है?

स्कंद षष्ठी अगली बार रविवार, 15 नवंबर 2026 (शुक्ल षष्ठी) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

अगला स्कंद षष्ठी कब है?

इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।

स्कंद षष्ठी कैसे रखा जाता है?

उपवास, मुरुगन पूजा।

व्रत और उपवास में और