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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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व्रत और उपवास · Lunar eclipse (Chandra Grahan)

चंद्र ग्रहण

अगली तिथि शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 · Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)

कबपंचांग गणना के अनुसार; 9 घंटे पहले से सूतक
देवताचंद्र
विधिसूतक के नियम; ग्रहण के दौरान मंत्र जप

चंद्र ग्रहण 2026 की तिथियाँ

चंद्र ग्रहण
मंगलवार, 3 मार्च 2026Sutak from 2026-03-03T02:33 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026Sutak from 2026-08-27T19:12 UTC (if visible)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

चंद्र ग्रहण का महत्व

चंद्र ग्रहण को ज्योतिष और धर्म दोनों परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान चंद्र इस व्रत के अधिष्ठाता देवता हैं। पंचांग के अनुसार ग्रहण का समय निर्धारित होता है, और ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक आरंभ माना जाता है। सूतक काल में पारंपरिक रूप से कुछ नियमों का पालन किया जाता है, और ग्रहण के दौरान मंत्र जप को विशेष महत्व दिया गया है।

यह ध्यान रखना उचित है कि ग्रहण की तिथियाँ पंचांग और एफेमेरिस के आधार पर गणना की जाती हैं। इस पृष्ठ पर इस वर्ष और आने वाले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से निकालकर दी गई हैं। परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं — उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में सूतक और विधि को लेकर भिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं। अतः अपनी कुल परंपरा या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है।

व्रत विधि — चरण दर चरण

चंद्र ग्रहण के अवसर पर व्रत रखने वाले साधक सामान्यतः निम्नलिखित क्रम का पालन करते हैं। यह विधि सामान्य मार्गदर्शन है; स्थानीय और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।

कुछ परंपराओं में ग्रहण काल में भोजन पूर्णतः वर्जित माना जाता है, तो कुछ में केवल सूतक काल में। अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

क्या खाएँ और क्या टालें

ग्रहण और सूतक के संबंध में आहार नियम परंपरा के अनुसार भिन्न होते हैं। सामान्यतः निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:

रोगी, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और वृद्ध — इनके लिए परंपरागत छूट का उल्लेख मिलता है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें; यहाँ दी गई जानकारी केवल परंपरा का वर्णन है।

पारण नियम

पारण का अर्थ है व्रत का समापन। चंद्र ग्रहण के व्रत में सामान्यतः ग्रहण समाप्त होने और स्नान-शुद्धि के पश्चात पारण किया जाता है। कुछ परंपराओं में ग्रहण के पूर्णतः समाप्त होने की प्रतीक्षा की जाती है, तो कुछ में मोक्ष काल के बाद पारण का विधान मिलता है।

पारण से पूर्व भगवान चंद्र का स्मरण और जप किया जाता है। पारण का समय और विधि स्थानीय पंचांग तथा कुल परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है,

चंद्र ग्रहण 2027 की तिथियाँ

चंद्र ग्रहण
शनिवार, 20 फ़रवरी 2027Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण
रविवार, 18 जुलाई 2027Sutak from 2027-07-18T07:03 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण
मंगलवार, 17 अगस्त 2027Sutak from 2027-08-16T22:13 UTC (if visible)

चंद्र ग्रहण 2028 की तिथियाँ

चंद्र ग्रहण
बुधवार, 12 जनवरी 2028Sutak from 2028-01-11T19:13 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण
गुरुवार, 6 जुलाई 2028Sutak from 2028-07-06T09:19 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण
रविवार, 31 दिसंबर 2028Sutak from 2028-12-31T07:52 UTC (if visible)

प्रश्न

चंद्र ग्रहण 2027 में कब है?

चंद्र ग्रहण शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 (Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

अगला चंद्र ग्रहण कब है?

इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।

चंद्र ग्रहण कैसे रखा जाता है?

सूतक के नियम; ग्रहण के दौरान मंत्र जप।

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