व्रत और उपवास · Lunar eclipse (Chandra Grahan)
चंद्र ग्रहण
अगली तिथि शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 · Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)
| कब | पंचांग गणना के अनुसार; 9 घंटे पहले से सूतक |
|---|---|
| देवता | चंद्र |
| विधि | सूतक के नियम; ग्रहण के दौरान मंत्र जप |
चंद्र ग्रहण 2026 की तिथियाँ
- चंद्र ग्रहण
- मंगलवार, 3 मार्च 2026Sutak from 2026-03-03T02:33 UTC (if visible)
- चंद्र ग्रहण
- शुक्रवार, 28 अगस्त 2026Sutak from 2026-08-27T19:12 UTC (if visible)
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
चंद्र ग्रहण का महत्व
चंद्र ग्रहण को ज्योतिष और धर्म दोनों परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान चंद्र इस व्रत के अधिष्ठाता देवता हैं। पंचांग के अनुसार ग्रहण का समय निर्धारित होता है, और ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक आरंभ माना जाता है। सूतक काल में पारंपरिक रूप से कुछ नियमों का पालन किया जाता है, और ग्रहण के दौरान मंत्र जप को विशेष महत्व दिया गया है।
यह ध्यान रखना उचित है कि ग्रहण की तिथियाँ पंचांग और एफेमेरिस के आधार पर गणना की जाती हैं। इस पृष्ठ पर इस वर्ष और आने वाले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से निकालकर दी गई हैं। परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं — उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में सूतक और विधि को लेकर भिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं। अतः अपनी कुल परंपरा या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है।
व्रत विधि — चरण दर चरण
चंद्र ग्रहण के अवसर पर व्रत रखने वाले साधक सामान्यतः निम्नलिखित क्रम का पालन करते हैं। यह विधि सामान्य मार्गदर्शन है; स्थानीय और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
- संकल्प: ग्रहण से पूर्व स्नान करके भगवान चंद्र का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लें।
- सूतक का पालन: ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक आरंभ माना जाता है। इस अवधि में पारंपरिक रूप से भोजन बनाना, देव-पूजा में स्पर्श करना आदि टाला जाता है। जो लोग सूतक नहीं मानते, वे भी ग्रहण काल में जप और ध्यान को महत्व देते हैं।
- ग्रहण काल में जप: ग्रहण के दौरान मंत्र जप प्रमुख साधना मानी जाती है। चंद्र से संबंधित मंत्रों का जप, या अपने इष्ट मंत्र का जप, इस समय किया जाता है।
- स्नान और शुद्धि: ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करके पुनः शुद्धि मानी जाती है।
- पारण: तत्पश्चात व्रत खोला जाता है (नीचे पारण नियम देखें)।
कुछ परंपराओं में ग्रहण काल में भोजन पूर्णतः वर्जित माना जाता है, तो कुछ में केवल सूतक काल में। अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लें।
क्या खाएँ और क्या टालें
ग्रहण और सूतक के संबंध में आहार नियम परंपरा के अनुसार भिन्न होते हैं। सामान्यतः निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:
- सूतक काल में: ताज़ा भोजन बनाना और ग्रहण करना पारंपरिक रूप से टाला जाता है। पहले से बने अन्न का भी प्रयोग सीमित किया जाता है।
- ग्रहण काल में: अनेक साधक पूर्ण उपवास रखते हैं; कुछ जल या फल तक सीमित रहते हैं।
- ग्रहण के बाद: स्नान के पश्चात ताज़ा भोजन ग्रहण किया जाता है।
रोगी, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और वृद्ध — इनके लिए परंपरागत छूट का उल्लेख मिलता है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें; यहाँ दी गई जानकारी केवल परंपरा का वर्णन है।
पारण नियम
पारण का अर्थ है व्रत का समापन। चंद्र ग्रहण के व्रत में सामान्यतः ग्रहण समाप्त होने और स्नान-शुद्धि के पश्चात पारण किया जाता है। कुछ परंपराओं में ग्रहण के पूर्णतः समाप्त होने की प्रतीक्षा की जाती है, तो कुछ में मोक्ष काल के बाद पारण का विधान मिलता है।
पारण से पूर्व भगवान चंद्र का स्मरण और जप किया जाता है। पारण का समय और विधि स्थानीय पंचांग तथा कुल परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है,
चंद्र ग्रहण 2027 की तिथियाँ
- चंद्र ग्रहण
- शनिवार, 20 फ़रवरी 2027Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)
- चंद्र ग्रहण
- रविवार, 18 जुलाई 2027Sutak from 2027-07-18T07:03 UTC (if visible)
- चंद्र ग्रहण
- मंगलवार, 17 अगस्त 2027Sutak from 2027-08-16T22:13 UTC (if visible)
चंद्र ग्रहण 2028 की तिथियाँ
- चंद्र ग्रहण
- बुधवार, 12 जनवरी 2028Sutak from 2028-01-11T19:13 UTC (if visible)
- चंद्र ग्रहण
- गुरुवार, 6 जुलाई 2028Sutak from 2028-07-06T09:19 UTC (if visible)
- चंद्र ग्रहण
- रविवार, 31 दिसंबर 2028Sutak from 2028-12-31T07:52 UTC (if visible)
प्रश्न
चंद्र ग्रहण 2027 में कब है?
चंद्र ग्रहण शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 (Sutak from 2027-02-20T14:12 UTC (if visible)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
अगला चंद्र ग्रहण कब है?
इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।
चंद्र ग्रहण कैसे रखा जाता है?
सूतक के नियम; ग्रहण के दौरान मंत्र जप।
व्रत और उपवास में और
- अजा एकादशीAja Ekadashi
- अहोई अष्टमीAhoi Ashtami
- अमावस्याAmavasya
- आमलकी एकादशीAmalaki Ekadashi
- अपरा एकादशीApara Ekadashi
- देवशयनी एकादशीDevshayani Ekadashi
- मासिक दुर्गाष्टमीMasik Durgashtami
- एकादशीEkadashi
- गुरुवार व्रतGuruvar Vrat
- हल षष्ठीHal Shashti
- इंदिरा एकादशीIndira Ekadashi
- जया एकादशीJaya Ekadashi
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)Jivitputrika Vrat (Jitiya)
- कजरी तीजKajari Teej
- कामिका एकादशीKamika Ekadashi
- कामदा एकादशीKamada Ekadashi
- मंगलवार व्रतMangalvar Vrat
- कालाष्टमीKalashtami
- मासिक शिवरात्रिMasik Shivaratri
- मोक्षदा एकादशीMokshada Ekadashi
- निर्जला एकादशीNirjala Ekadashi
- पापांकुशा एकादशीPapankusha Ekadashi
- मोहिनी एकादशीMohini Ekadashi
- पापमोचनी एकादशीPapmochani Ekadashi
- परिवर्तिनी एकादशीParivartini Ekadashi
- प्रदोष व्रतPradosh Vrat
- पूर्णिमाPurnima
- रमा एकादशीRama Ekadashi
- पौष पुत्रदा एकादशीPausha Putrada Ekadashi
- ऋषि पंचमीRishi Panchami
- सकट चौथSakat Chauth
- संकष्टी चतुर्थीSankashti Chaturthi
- संक्रांतिSankranti
- संतोषी माता व्रतSantoshi Mata Vrat
- सफला एकादशीSaphala Ekadashi
- शनिवार व्रतShanivar Vrat
- षटतिला एकादशीShattila Ekadashi
- शीतला अष्टमीSheetala Ashtami
- श्रावण पुत्रदा एकादशीShravana Putrada Ekadashi
- स्कंद षष्ठीSkanda Shashti
- सोमवार व्रतSomvar Vrat
- सूर्य ग्रहणSolar eclipse (Surya Grahan)
- उत्पन्ना एकादशीUtpanna Ekadashi
- वरूथिनी एकादशीVaruthini Ekadashi
- वरलक्ष्मी व्रतम्Varalakshmi Vratam
- वट पूर्णिमा व्रतVat Purnima Vrat
- वट सावित्री व्रतVat Savitri Vrat
- विजया एकादशीVijaya Ekadashi
- विनायक चतुर्थीVinayaka Chaturthi
- योगिनी एकादशीYogini Ekadashi