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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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व्रत और उपवास · Ekadashi

एकादशी

अगली तिथि गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 · एकादशी तक 09:18 UTC

कबहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (वर्ष में 24–26)
देवताविष्णु
विधिअन्न का त्याग; अगली सुबह सूर्योदय के बाद द्वादशी के भीतर पारण

एकादशी 2026 की तिथियाँ

माघ कृष्ण
बुधवार, 14 जनवरी 2026एकादशी तक 12:23 UTC
माघ शुक्ल
गुरुवार, 29 जनवरी 2026एकादशी तक 08:25 UTC
फाल्गुन कृष्ण
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026एकादशी तक 08:56 UTC
फाल्गुन शुक्ल
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026एकादशी तक 17:03 UTC
चैत्र कृष्ण
रविवार, 15 मार्च 2026एकादशी तक 03:47 UTC
चैत्र शुक्ल
रविवार, 29 मार्च 2026एकादशी तक 02:16 UTC
वैशाख कृष्ण
सोमवार, 13 अप्रैल 2026एकादशी तक 19:39 UTC
वैशाख शुक्ल
सोमवार, 27 अप्रैल 2026एकादशी तक 12:46 UTC
ज्येष्ठ कृष्ण
बुधवार, 13 मई 2026एकादशी तक 08:00 UTC
ज्येष्ठ शुक्ल
मंगलवार, 26 मई 2026एकादशी तक 00:52 UTC
आषाढ़ कृष्ण
गुरुवार, 11 जून 2026एकादशी तक 17:06 UTC
ज्येष्ठ शुक्ल
गुरुवार, 25 जून 2026एकादशी तक 14:39 UTC
आषाढ़ कृष्ण
शनिवार, 11 जुलाई 2026द्वादशी तक 20:34 UTC
आषाढ़ शुक्ल
शनिवार, 25 जुलाई 2026एकादशी तक 06:04 UTC
श्रावण कृष्ण
रविवार, 9 अगस्त 2026एकादशी तक 05:35 UTC
श्रावण शुक्ल
रविवार, 23 अगस्त 2026एकादशी तक 22:49 UTC
भाद्रपद कृष्ण
सोमवार, 7 सितंबर 2026एकादशी तक 11:34 UTC
भाद्रपद शुक्ल
मंगलवार, 22 सितंबर 2026एकादशी तक 16:13 UTC
आश्विन कृष्ण
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026एकादशी तक 19:05 UTC
आश्विन शुक्ल
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026एकादशी तक 09:18 UTC
कार्तिक कृष्ण
गुरुवार, 5 नवंबर 2026एकादशी तक 05:06 UTC
कार्तिक शुक्ल
शनिवार, 21 नवंबर 2026द्वादशी तक 23:27 UTC
मार्गशीर्ष कृष्ण
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026एकादशी तक 18:15 UTC
मार्गशीर्ष शुक्ल
रविवार, 20 दिसंबर 2026एकादशी तक 14:45 UTC

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

महत्व

एकादशी प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को पड़ती है। वर्ष भर में यह लगभग 24 से 26 बार आती है, क्योंकि शुक्ल और कृष्ण — दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि इसी नाम से जानी जाती है। इस व्रत के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। परंपरा में एकादशी को विष्णु-आराधना का दिन माना गया है, और इसीलिए यह व्रत करने वाले साधक उस दिन अपना ध्यान जप, श्रवण, कीर्तन और सात्त्विक आचरण पर केंद्रित रखते हैं।

यह व्रत कोई एक समुदाय तक सीमित नहीं है। भारत में तथा प्रवासी समुदायों में अनेक श्रद्धालु इसे नियमित रूप से रखते हैं, कुछ वर्ष में कुछ ही एकादशियाँ, और कुछ सभी। जो लोग व्रत का संकल्प लेते हैं, वे सामान्यतः अपनी शारीरिक स्थिति, आयु, कार्य-परिस्थिति और पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए इसका पालन करते हैं। ज्योतिष या धर्म-परंपरा में व्यक्तिगत निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी या अपने कुल-गुरु से परामर्श लेना उचित माना जाता है।

यहाँ दी गई तिथियाँ पंचांग के आधार पर परिकलित की जाती हैं और इस पृष्ठ पर इस वर्ष तथा आने वाले दो वर्षों के लिए दिखाई जाती हैं। किसी विशेष स्थान के लिए स्थानीय सूर्योदय और पंचांग-पद्धति के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

व्रत विधि — चरण दर चरण

1. संकल्प और तैयारी

व्रत से पहले दिन या उसी प्रातः संकल्प लेने की परंपरा है। संकल्प में यह भाव रखा जाता है कि व्रत विष्णु-स्मरण के लिए किया जा रहा है। घर में स्वच्छता, स्नान और शांत वातावरण व्रत के अनुकूल माने जाते हैं।

2. दिन का पालन

एकादशी के दिन अन्न का त्याग किया जाता है। कई साधक पूर्ण उपवास रखते हैं, कई फलाहार लेते हैं, और कई केवल अन्न छोड़कर दूध, फल या जल ग्रहण करते हैं। यह चयन व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और परंपरा पर निर्भर करता है। दिन भर जप, ध्यान, विष्णु-सहस्रनाम या कीर्तन का अभ्यास इस व्रत का मुख्य अंग माना जाता है।

3. रात्रि-जागरण

कुछ परंपराओं में रात्रि-जागरण और भजन-कीर्तन का विधान है, तो कुछ में शांत चिंतन और स्वाध्याय को प्रधानता दी जाती है। दोनों में भाव एक ही है — मन को सांसारिक भोग से हटाकर स्मरण में लगाना।

4. पारण

व्रत का समापन अगले दिन प्रातः सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि के भीतर पारण से होता है। पारण का अर्थ है व्रत तोड़ना, और परंपरा में इसे द्वादशी के भीतर ही करने पर बल दिया जाता है।

क्या खाएँ, क्या छोड़ें

एकादशी का मुख्य नियम है — अन्न का त्याग। इसके अतिरिक्त कई साधक कुछ और वस्तुओं से भी परहेज़ करते हैं, पर इनकी सूची उत्तर और दक्षिण, स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में भिन्न-भिन्न है। इसलिए यहाँ कोई एक सूची थोपना उचित नहीं; अपने कुल या गुरु की परंपरा का पालन करना ही उपयुक्त माना जाता है।

व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि संयम और स्मरण है। इसलिए अनेक परंपराओं में यह कहा जाता है कि जो साधक

एकादशी 2027 की तिथियाँ

पौष कृष्ण
रविवार, 3 जनवरी 2027एकादशी तक 10:38 UTC
पौष शुक्ल
मंगलवार, 19 जनवरी 2027एकादशी तक 02:19 UTC
माघ कृष्ण
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027एकादशी तक 05:40 UTC
माघ शुक्ल
बुधवार, 17 फ़रवरी 2027एकादशी तक 12:02 UTC
फाल्गुन कृष्ण
बुधवार, 3 मार्च 2027एकादशी तक 01:54 UTC
फाल्गुन शुक्ल
गुरुवार, 18 मार्च 2027एकादशी तक 20:21 UTC
चैत्र कृष्ण
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027एकादशी तक 21:22 UTC
चैत्र शुक्ल
शनिवार, 17 अप्रैल 2027एकादशी तक 03:58 UTC
वैशाख कृष्ण
रविवार, 2 मई 2027एकादशी तक 14:22 UTC
वैशाख शुक्ल
रविवार, 16 मई 2027एकादशी तक 11:43 UTC
ज्येष्ठ कृष्ण
मंगलवार, 1 जून 2027एकादशी तक 04:10 UTC
ज्येष्ठ शुक्ल
सोमवार, 14 जून 2027एकादशी तक 20:38 UTC
आषाढ़ कृष्ण
बुधवार, 30 जून 2027एकादशी तक 15:01 UTC
आषाढ़ शुक्ल
बुधवार, 14 जुलाई 2027एकादशी तक 07:40 UTC
श्रावण कृष्ण
शुक्रवार, 30 जुलाई 2027द्वादशी तक 20:48 UTC
श्रावण शुक्ल
गुरुवार, 12 अगस्त 2027एकादशी तक 21:30 UTC
भाद्रपद कृष्ण
शनिवार, 28 अगस्त 2027एकादशी तक 07:12 UTC
भाद्रपद शुक्ल
शनिवार, 11 सितंबर 2027एकादशी तक 14:06 UTC
आश्विन कृष्ण
रविवार, 26 सितंबर 2027एकादशी तक 14:19 UTC
आश्विन शुक्ल
सोमवार, 11 अक्टूबर 2027एकादशी तक 08:39 UTC
कार्तिक कृष्ण
सोमवार, 25 अक्टूबर 2027एकादशी तक 21:52 UTC
कार्तिक शुक्ल
बुधवार, 10 नवंबर 2027एकादशी तक 03:41 UTC
मार्गशीर्ष कृष्ण
बुधवार, 24 नवंबर 2027एकादशी तक 06:41 UTC
मार्गशीर्ष शुक्ल
गुरुवार, 9 दिसंबर 2027एकादशी तक 21:50 UTC
पौष कृष्ण
गुरुवार, 23 दिसंबर 2027एकादशी तक 17:42 UTC

एकादशी 2028 की तिथियाँ

पौष शुक्ल
शनिवार, 8 जनवरी 2028एकादशी तक 14:06 UTC
माघ कृष्ण
शनिवार, 22 जनवरी 2028एकादशी तक 07:34 UTC
माघ शुक्ल
सोमवार, 7 फ़रवरी 2028एकादशी तक 03:55 UTC
फाल्गुन कृष्ण
रविवार, 20 फ़रवरी 2028एकादशी तक 00:16 UTC
फाल्गुन शुक्ल
मंगलवार, 7 मार्च 2028एकादशी तक 15:00 UTC
चैत्र कृष्ण
मंगलवार, 21 मार्च 2028एकादशी तक 18:44 UTC
चैत्र शुक्ल
गुरुवार, 6 अप्रैल 2028द्वादशी तक 20:22 UTC
वैशाख कृष्ण
गुरुवार, 20 अप्रैल 2028एकादशी तक 13:17 UTC
वैशाख शुक्ल
शुक्रवार, 5 मई 2028एकादशी तक 06:03 UTC
ज्येष्ठ कृष्ण
शनिवार, 20 मई 2028एकादशी तक 06:31 UTC
ज्येष्ठ शुक्ल
शनिवार, 3 जून 2028एकादशी तक 11:56 UTC
आषाढ़ कृष्ण
रविवार, 18 जून 2028एकादशी तक 21:45 UTC
आषाढ़ शुक्ल
रविवार, 2 जुलाई 2028एकादशी तक 18:34 UTC
श्रावण कृष्ण
मंगलवार, 18 जुलाई 2028एकादशी तक 10:56 UTC
श्रावण शुक्ल
मंगलवार, 1 अगस्त 2028एकादशी तक 03:21 UTC
भाद्रपद कृष्ण
बुधवार, 16 अगस्त 2028एकादशी तक 22:19 UTC
भाद्रपद शुक्ल
बुधवार, 30 अगस्त 2028एकादशी तक 15:17 UTC
आश्विन कृष्ण
शुक्रवार, 15 सितंबर 2028एकादशी तक 08:12 UTC
आश्विन शुक्ल
शुक्रवार, 29 सितंबर 2028एकादशी तक 06:37 UTC
कार्तिक कृष्ण
शनिवार, 14 अक्टूबर 2028एकादशी तक 16:59 UTC
कार्तिक शुक्ल
शनिवार, 28 अक्टूबर 2028एकादशी तक 00:51 UTC
मार्गशीर्ष कृष्ण
सोमवार, 13 नवंबर 2028एकादशी तक 01:12 UTC
मार्गशीर्ष शुक्ल
सोमवार, 27 नवंबर 2028एकादशी तक 20:48 UTC
पौष कृष्ण
मंगलवार, 12 दिसंबर 2028एकादशी तक 09:43 UTC
पौष शुक्ल
बुधवार, 27 दिसंबर 2028एकादशी तक 16:57 UTC

प्रश्न

एकादशी 2026 में कब है?

एकादशी अगली बार गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 (एकादशी तक 09:18 UTC) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

अगला एकादशी कब है?

इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।

एकादशी कैसे रखा जाता है?

अन्न का त्याग; अगली सुबह सूर्योदय के बाद द्वादशी के भीतर पारण।

व्रत और उपवास में और