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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
English·न्यूज़लेटर·खाता
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व्रत और उपवास · Sankranti

संक्रांति

अगली तिथि शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · सप्तमी तक 02:58 UTC

कबसूर्य का हर राशि में प्रवेश (वर्ष में 12)
देवतासूर्य
विधिस्नान, दान; पुण्य काल

संक्रांति 2026 की तिथियाँ

धनु
बुधवार, 14 जनवरी 2026एकादशी तक 12:23 UTC
मकर
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026दशमी तक 06:52 UTC
कुंभ
शनिवार, 14 मार्च 2026दशमी तक 02:41 UTC
मीन
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026द्वादशी तक 18:42 UTC
मेष
शुक्रवार, 15 मई 2026त्रयोदशी तक 03:01 UTC
वृषभ
सोमवार, 15 जून 2026अमावस्या तक 02:54 UTC
मिथुन
गुरुवार, 16 जुलाई 2026द्वितीया तक 03:23 UTC
कर्क
सोमवार, 17 अगस्त 2026पंचमी तक 11:30 UTC
सिंह
गुरुवार, 17 सितंबर 2026षष्ठी तक 05:18 UTC
कन्या
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026सप्तमी तक 02:58 UTC
तुला
सोमवार, 16 नवंबर 2026सप्तमी तक 22:50 UTC
वृश्चिक
बुधवार, 16 दिसंबर 2026सप्तमी तक 17:16 UTC

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

महत्व

संक्रांति वह समय है जब सूर्य एक राशि से निकलकर अगली राशि में प्रवेश करते हैं। वर्ष में यह बारह बार होता है, इसलिए संक्रांति का संबंध सूर्य की गति से है। इस व्रत और पर्व के अधिष्ठाता देवता सूर्य हैं — जीवन, प्रकाश और ऊर्जा के स्रोत।

पंचांग परंपरा में संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ जो समय जुड़ा होता है, उसे पुण्य काल कहा जाता है; यही समय स्नान, जप और दान के लिए उपयुक्त माना जाता है। संक्रांति को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में रीति-रिवाजों के विवरण भिन्न-भिन्न मिलते हैं। इन अंतरों को स्थानीय परंपरा और कुलाचार के अनुसार समझना उचित है।

यह व्रत मुख्य रूप से उन श्रद्धालुओं द्वारा रखा जाता है जो सूर्य उपासना से जुड़े हैं, तथा जिनकी पारिवारिक परंपरा में संक्रांति पर व्रत या विशेष पूजन का विधान है। जो लोग व्रत नहीं रखते, वे भी इस दिन स्नान, दान और सूर्य को जल अर्पित करने जैसे सरल उपाय कर सकते हैं।

व्रत विधि — चरण दर चरण

संक्रांति की विधि सरल है और इसका केंद्र स्नान तथा दान है। नीचे दिए चरण सामान्य मार्गदर्शन हैं; अपनी कुल परंपरा या किसी योग्य ज्योतिषी से व्यक्तिगत विधान की पुष्टि कर लेना अच्छा रहता है।

कुछ परंपराओं में संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल का दान और तिल का उपयोग शुभ माना जाता है; कहीं केवल स्नान-दान पर बल दिया जाता है। दोनों में से जो आपकी परंपरा में प्रचलित हो, उसे अपनाएँ।

क्या खाएँ और क्या टालें

संक्रांति के व्रत में भोजन के नियम परंपरा के अनुसार बदलते हैं, इसलिए एक ही नियम सब पर लागू नहीं होता। सामान्य रूप से व्रत रखने वाले श्रद्धालु हल्का और सात्त्विक भोजन चुनते हैं।

यदि आप कोई औषधि लेते हैं या स्वास्थ्य संबंधी कोई स्थिति है, तो व्रत के भोजन नियम अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही तय करें। यहाँ दिया विवरण केवल परंपरा का परिचय है, चिकित्सीय सलाह नहीं।

पारण के नियम

पारण का अर्थ है व्रत का समापन। संक्रांति के व्रत का पार

संक्रांति 2027 की तिथियाँ

धनु
गुरुवार, 14 जनवरी 2027षष्ठी तक 08:29 UTC
मकर
शनिवार, 13 फ़रवरी 2027सप्तमी तक 20:37 UTC
कुंभ
सोमवार, 15 मार्च 2027सप्तमी तक 05:21 UTC
मीन
बुधवार, 14 अप्रैल 2027अष्टमी तक 09:54 UTC
मेष
शनिवार, 15 मई 2027दशमी तक 12:47 UTC
वृषभ
मंगलवार, 15 जून 2027द्वादशी तक 21:01 UTC
मिथुन
शनिवार, 17 जुलाई 2027चतुर्दशी तक 13:18 UTC
कर्क
मंगलवार, 17 अगस्त 2027पूर्णिमा तक 07:28 UTC
सिंह
शुक्रवार, 17 सितंबर 2027द्वितीया तक 01:14 UTC
कन्या
रविवार, 17 अक्टूबर 2027द्वितीया तक 13:13 UTC
तुला
मंगलवार, 16 नवंबर 2027तृतीया तक 22:12 UTC
वृश्चिक
गुरुवार, 16 दिसंबर 2027तृतीया तक 07:52 UTC

संक्रांति 2028 की तिथियाँ

धनु
शुक्रवार, 14 जनवरी 2028तृतीया तक 17:47 UTC
मकर
रविवार, 13 फ़रवरी 2028तृतीया तक 04:10 UTC
कुंभ
मंगलवार, 14 मार्च 2028चतुर्थी तक 12:53 UTC
मीन
गुरुवार, 13 अप्रैल 2028चतुर्थी तक 01:59 UTC
मेष
रविवार, 14 मई 2028षष्ठी तक 19:19 UTC
वृषभ
बुधवार, 14 जून 2028सप्तमी तक 15:16 UTC
मिथुन
रविवार, 16 जुलाई 2028नवमी तक 10:51 UTC
कर्क
बुधवार, 16 अगस्त 2028एकादशी तक 22:19 UTC
सिंह
शनिवार, 16 सितंबर 2028द्वादशी तक 05:21 UTC
कन्या
मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028चतुर्दशी तक 06:35 UTC
तुला
गुरुवार, 16 नवंबर 2028अमावस्या तक 13:18 UTC
वृश्चिक
शुक्रवार, 15 दिसंबर 2028चतुर्दशी तक 03:31 UTC

प्रश्न

संक्रांति 2026 में कब है?

संक्रांति अगली बार शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 (सप्तमी तक 02:58 UTC) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

अगला संक्रांति कब है?

इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।

संक्रांति कैसे रखा जाता है?

स्नान, दान; पुण्य काल।

व्रत और उपवास में और