व्रत और उपवास · Sankranti
संक्रांति
अगली तिथि शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · सप्तमी तक 02:58 UTC
| कब | सूर्य का हर राशि में प्रवेश (वर्ष में 12) |
|---|---|
| देवता | सूर्य |
| विधि | स्नान, दान; पुण्य काल |
संक्रांति 2026 की तिथियाँ
- धनु
- बुधवार, 14 जनवरी 2026एकादशी तक 12:23 UTC
- मकर
- गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026दशमी तक 06:52 UTC
- कुंभ
- शनिवार, 14 मार्च 2026दशमी तक 02:41 UTC
- मीन
- मंगलवार, 14 अप्रैल 2026द्वादशी तक 18:42 UTC
- मेष
- शुक्रवार, 15 मई 2026त्रयोदशी तक 03:01 UTC
- वृषभ
- सोमवार, 15 जून 2026अमावस्या तक 02:54 UTC
- मिथुन
- गुरुवार, 16 जुलाई 2026द्वितीया तक 03:23 UTC
- कर्क
- सोमवार, 17 अगस्त 2026पंचमी तक 11:30 UTC
- सिंह
- गुरुवार, 17 सितंबर 2026षष्ठी तक 05:18 UTC
- कन्या
- शनिवार, 17 अक्टूबर 2026सप्तमी तक 02:58 UTC
- तुला
- सोमवार, 16 नवंबर 2026सप्तमी तक 22:50 UTC
- वृश्चिक
- बुधवार, 16 दिसंबर 2026सप्तमी तक 17:16 UTC
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
महत्व
संक्रांति वह समय है जब सूर्य एक राशि से निकलकर अगली राशि में प्रवेश करते हैं। वर्ष में यह बारह बार होता है, इसलिए संक्रांति का संबंध सूर्य की गति से है। इस व्रत और पर्व के अधिष्ठाता देवता सूर्य हैं — जीवन, प्रकाश और ऊर्जा के स्रोत।
पंचांग परंपरा में संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ जो समय जुड़ा होता है, उसे पुण्य काल कहा जाता है; यही समय स्नान, जप और दान के लिए उपयुक्त माना जाता है। संक्रांति को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में रीति-रिवाजों के विवरण भिन्न-भिन्न मिलते हैं। इन अंतरों को स्थानीय परंपरा और कुलाचार के अनुसार समझना उचित है।
यह व्रत मुख्य रूप से उन श्रद्धालुओं द्वारा रखा जाता है जो सूर्य उपासना से जुड़े हैं, तथा जिनकी पारिवारिक परंपरा में संक्रांति पर व्रत या विशेष पूजन का विधान है। जो लोग व्रत नहीं रखते, वे भी इस दिन स्नान, दान और सूर्य को जल अर्पित करने जैसे सरल उपाय कर सकते हैं।
व्रत विधि — चरण दर चरण
संक्रांति की विधि सरल है और इसका केंद्र स्नान तथा दान है। नीचे दिए चरण सामान्य मार्गदर्शन हैं; अपनी कुल परंपरा या किसी योग्य ज्योतिषी से व्यक्तिगत विधान की पुष्टि कर लेना अच्छा रहता है।
- संकल्प: प्रातः उठकर स्नान से पहले या बाद में यथासंभव शुद्ध होकर व्रत का संकल्प लें।
- स्नान: संक्रांति के दिन स्नान का विशेष महत्व है। पुण्य काल में स्नान करना उत्तम माना जाता है।
- सूर्य पूजन: सूर्य देवता को जल अर्पित करें, दीप या धूप से पूजन करें, और यथाशक्ति स्तोत्र या सूर्य से जुड़े मंत्रों का जप करें।
- दान: पुण्य काल में दान करें। अन्न, वस्त्र, तिल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार कोई भी वस्तु दान की जा सकती है। दान का भाव और श्रद्धा मुख्य है।
- जप एवं पाठ: जो लोग व्रत रखते हैं, वे दिन में जप, पाठ या ध्यान में समय देते हैं।
- पारण: व्रत का पारण नियत समय और नियम के अनुसार किया जाता है।
कुछ परंपराओं में संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल का दान और तिल का उपयोग शुभ माना जाता है; कहीं केवल स्नान-दान पर बल दिया जाता है। दोनों में से जो आपकी परंपरा में प्रचलित हो, उसे अपनाएँ।
क्या खाएँ और क्या टालें
संक्रांति के व्रत में भोजन के नियम परंपरा के अनुसार बदलते हैं, इसलिए एक ही नियम सब पर लागू नहीं होता। सामान्य रूप से व्रत रखने वाले श्रद्धालु हल्का और सात्त्विक भोजन चुनते हैं।
- सामान्यतः लिए जाने वाले: फल, दूध, तिल, गुड़, तथा व्रत में अनुमत अनाज या मिष्टान्न — जैसा आपकी परंपरा में स्वीकार्य हो।
- सामान्यतः टाले जाने वाले: प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, और मांस-मदिरा। कई परिवार अन्न भी छोड़ते हैं।
- परंपरा का भेद: उत्तर भारत और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव घरों में भोजन नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
यदि आप कोई औषधि लेते हैं या स्वास्थ्य संबंधी कोई स्थिति है, तो व्रत के भोजन नियम अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही तय करें। यहाँ दिया विवरण केवल परंपरा का परिचय है, चिकित्सीय सलाह नहीं।
पारण के नियम
पारण का अर्थ है व्रत का समापन। संक्रांति के व्रत का पार
संक्रांति 2027 की तिथियाँ
- धनु
- गुरुवार, 14 जनवरी 2027षष्ठी तक 08:29 UTC
- मकर
- शनिवार, 13 फ़रवरी 2027सप्तमी तक 20:37 UTC
- कुंभ
- सोमवार, 15 मार्च 2027सप्तमी तक 05:21 UTC
- मीन
- बुधवार, 14 अप्रैल 2027अष्टमी तक 09:54 UTC
- मेष
- शनिवार, 15 मई 2027दशमी तक 12:47 UTC
- वृषभ
- मंगलवार, 15 जून 2027द्वादशी तक 21:01 UTC
- मिथुन
- शनिवार, 17 जुलाई 2027चतुर्दशी तक 13:18 UTC
- कर्क
- मंगलवार, 17 अगस्त 2027पूर्णिमा तक 07:28 UTC
- सिंह
- शुक्रवार, 17 सितंबर 2027द्वितीया तक 01:14 UTC
- कन्या
- रविवार, 17 अक्टूबर 2027द्वितीया तक 13:13 UTC
- तुला
- मंगलवार, 16 नवंबर 2027तृतीया तक 22:12 UTC
- वृश्चिक
- गुरुवार, 16 दिसंबर 2027तृतीया तक 07:52 UTC
संक्रांति 2028 की तिथियाँ
- धनु
- शुक्रवार, 14 जनवरी 2028तृतीया तक 17:47 UTC
- मकर
- रविवार, 13 फ़रवरी 2028तृतीया तक 04:10 UTC
- कुंभ
- मंगलवार, 14 मार्च 2028चतुर्थी तक 12:53 UTC
- मीन
- गुरुवार, 13 अप्रैल 2028चतुर्थी तक 01:59 UTC
- मेष
- रविवार, 14 मई 2028षष्ठी तक 19:19 UTC
- वृषभ
- बुधवार, 14 जून 2028सप्तमी तक 15:16 UTC
- मिथुन
- रविवार, 16 जुलाई 2028नवमी तक 10:51 UTC
- कर्क
- बुधवार, 16 अगस्त 2028एकादशी तक 22:19 UTC
- सिंह
- शनिवार, 16 सितंबर 2028द्वादशी तक 05:21 UTC
- कन्या
- मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028चतुर्दशी तक 06:35 UTC
- तुला
- गुरुवार, 16 नवंबर 2028अमावस्या तक 13:18 UTC
- वृश्चिक
- शुक्रवार, 15 दिसंबर 2028चतुर्दशी तक 03:31 UTC
प्रश्न
संक्रांति 2026 में कब है?
संक्रांति अगली बार शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 (सप्तमी तक 02:58 UTC) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
अगला संक्रांति कब है?
इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।
संक्रांति कैसे रखा जाता है?
स्नान, दान; पुण्य काल।
व्रत और उपवास में और
- अजा एकादशीAja Ekadashi
- अहोई अष्टमीAhoi Ashtami
- अमावस्याAmavasya
- आमलकी एकादशीAmalaki Ekadashi
- अपरा एकादशीApara Ekadashi
- देवशयनी एकादशीDevshayani Ekadashi
- मासिक दुर्गाष्टमीMasik Durgashtami
- एकादशीEkadashi
- गुरुवार व्रतGuruvar Vrat
- हल षष्ठीHal Shashti
- इंदिरा एकादशीIndira Ekadashi
- जया एकादशीJaya Ekadashi
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)Jivitputrika Vrat (Jitiya)
- कजरी तीजKajari Teej
- कामिका एकादशीKamika Ekadashi
- चंद्र ग्रहणLunar eclipse (Chandra Grahan)
- कामदा एकादशीKamada Ekadashi
- मंगलवार व्रतMangalvar Vrat
- कालाष्टमीKalashtami
- मासिक शिवरात्रिMasik Shivaratri
- मोक्षदा एकादशीMokshada Ekadashi
- निर्जला एकादशीNirjala Ekadashi
- पापांकुशा एकादशीPapankusha Ekadashi
- मोहिनी एकादशीMohini Ekadashi
- पापमोचनी एकादशीPapmochani Ekadashi
- परिवर्तिनी एकादशीParivartini Ekadashi
- प्रदोष व्रतPradosh Vrat
- पूर्णिमाPurnima
- रमा एकादशीRama Ekadashi
- पौष पुत्रदा एकादशीPausha Putrada Ekadashi
- ऋषि पंचमीRishi Panchami
- सकट चौथSakat Chauth
- संकष्टी चतुर्थीSankashti Chaturthi
- संतोषी माता व्रतSantoshi Mata Vrat
- सफला एकादशीSaphala Ekadashi
- शनिवार व्रतShanivar Vrat
- षटतिला एकादशीShattila Ekadashi
- शीतला अष्टमीSheetala Ashtami
- श्रावण पुत्रदा एकादशीShravana Putrada Ekadashi
- स्कंद षष्ठीSkanda Shashti
- सोमवार व्रतSomvar Vrat
- सूर्य ग्रहणSolar eclipse (Surya Grahan)
- उत्पन्ना एकादशीUtpanna Ekadashi
- वरूथिनी एकादशीVaruthini Ekadashi
- वरलक्ष्मी व्रतम्Varalakshmi Vratam
- वट पूर्णिमा व्रतVat Purnima Vrat
- वट सावित्री व्रतVat Savitri Vrat
- विजया एकादशीVijaya Ekadashi
- विनायक चतुर्थीVinayaka Chaturthi
- योगिनी एकादशीYogini Ekadashi