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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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व्रत और उपवास · Solar eclipse (Surya Grahan)

सूर्य ग्रहण

अगली तिथि शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 · Not visible in India — no sutak

कबपंचांग गणना के अनुसार; 12 घंटे पहले से सूतक
देवतासूर्य
विधिसूतक: भोजन नहीं, मंदिर बंद; बाद में स्नान

सूर्य ग्रहण 2026 की तिथियाँ

सूर्य ग्रहण
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026Not visible in India — no sutak
सूर्य ग्रहण
बुधवार, 12 अगस्त 2026Not visible in India — no sutak

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

सूर्य ग्रहण — महत्व

सूर्य ग्रहण को ज्योतिष और धर्म दोनों परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका देवता सूर्य है, और ग्रहण काल में सूर्य की उपासना, जप तथा दान का विशेष विधान बताया गया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार ग्रहण की तिथि और समय पंचांग के गणित से निकलते हैं, इसलिए यह हर वर्ष बदलता रहता है। इस पृष्ठ पर इस वर्ष तथा आने वाले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग के अनुसार दी गई हैं।

सूर्य ग्रहण के समय सूतक का विधान है। मान्यता है कि सूतक ग्रहण से लगभग बारह घंटे पूर्व आरंभ हो जाता है। सूतक काल में भोजन नहीं किया जाता और मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं। ग्रहण के समाप्त होने पर स्नान करके शुद्धि की जाती है, और उसके बाद ही देव-दर्शन तथा भोजन आदि कार्य किए जाते हैं।

यह ध्यान रखना उपयुक्त है कि सूतक और ग्रहण संबंधी अनेक परंपराएँ क्षेत्र के अनुसार भिन्न हैं। उत्तर और दक्षिण भारत, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में सूतक के समय और नियमों को लेकर मतभेद मिलते हैं। इसी प्रकार अमांत और पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार तिथियों का क्रम भी अलग हो सकता है। इसलिए अपने कुल-परंपरा अथवा स्थानीय पंचांग के अनुसार ही निर्णय लेना उचित माना जाता है। व्यक्तिगत कुंडली के संबंध में किसी भी निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना बेहतर होता है।

व्रत विधि — चरण दर चरण

सूर्य ग्रहण के अवसर पर जो व्रत या संयम रखा जाता है, उसकी सामान्य विधि इस प्रकार बताई जाती है। यह विधि सरल और व्यावहारिक है, और इसे श्रद्धा तथा शांति के साथ किया जाता है।

यह क्रम केवल परंपरागत मार्गदर्शन है। किसी भी चरण को अपनी सुविधा, स्वास्थ्य और स्थानीय रीति के अनुसार अपनाया जा सकता है।

क्या खाएँ और क्या टालें

सूतक काल में भोजन न करने का निर्देश दिया गया है। यह उपवास या संयम के रूप में पाला जाता है, और इसका उद्देश्य मन तथा शरीर को शांत रखना माना जाता है।

जो लोग स्वास्थ्य कारणों से उपवास नहीं रख सकते, वे अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लें। यहाँ कोई चिकित्सीय सलाह नहीं दी जा रही है; अपने शरीर की स्थिति को प्राथमिकता देना उचित है।

पारण नियम

पारण अर्थात व्रत या संयम का समाप

सूर्य ग्रहण 2027 की तिथियाँ

सूर्य ग्रहण
शनिवार, 6 फ़रवरी 2027Not visible in India — no sutak
सूर्य ग्रहण
सोमवार, 2 अगस्त 2027Not visible in India — no sutak

सूर्य ग्रहण 2028 की तिथियाँ

सूर्य ग्रहण
बुधवार, 26 जनवरी 2028Not visible in India — no sutak
सूर्य ग्रहण
शनिवार, 22 जुलाई 2028Not visible in India — no sutak

प्रश्न

सूर्य ग्रहण 2027 में कब है?

सूर्य ग्रहण शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 (Not visible in India — no sutak) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

अगला सूर्य ग्रहण कब है?

इस वर्ष और अगले दो वर्षों की तिथियाँ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।

सूर्य ग्रहण कैसे रखा जाता है?

सूतक: भोजन नहीं, मंदिर बंद; बाद में स्नान।

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