Debashree Sen
Pacific time readings in Bengali, English and Hindi
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शुभ मुहूर्त · Griha Pravesh Muhurat
अगली तिथि गुरुवार, 28 जनवरी 2027 · 07:11–13:54, 15:15–17:57 IST · सप्तमी
| नक्षत्र | रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती |
|---|---|
| तिथियाँ | चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या को छोड़कर कोई भी |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| मास | वैशाख, ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन (पूर्णिमांत) |
| वर्जित | अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक |
| समय खंड | सूर्योदय से सूर्यास्त तक वे घंटे जब नक्षत्र और तिथि दोनों उपयुक्त हों, राहु काल छोड़कर; कम से कम 48 मिनट |
| टिप्पणी | नए घर में पहला प्रवेश; माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ श्रेष्ठ मास माने जाते हैं। |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| गुरु, 28 जन॰ | 07:11–13:54, 15:15–17:57 IST | चित्रा | सप्तमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| गुरु, 4 फ़र॰ | 15:32–16:31 IST | उत्तराषाढ़ा | त्रयोदशी |
| गुरु, 11 फ़र॰ | 07:02–13:58, 15:21–18:08 IST | रेवती | पंचमी |
| सोम, 22 फ़र॰ | 11:55–18:16 IST | उत्तर फाल्गुनी | द्वितीया |
| गुरु, 25 फ़र॰ | 06:50–09:33 IST | चित्रा | पंचमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| गुरु, 4 मार्च | 06:43–14:00, 15:28–18:22 IST | उत्तराषाढ़ा | एकादशी / द्वादशी |
| बुध, 10 मार्च | 06:36–12:31, 14:00–18:26 IST | उत्तर भाद्रपद / रेवती | द्वितीया / तृतीया |
| गुरु, 11 मार्च | 06:35–11:20 IST | रेवती | तृतीया |
| सोम, 15 मार्च | 06:31–08:01, 09:30–18:29 IST | रोहिणी / मृगशिरा | सप्तमी / अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 23 अप्रैल | 05:47–10:41, 12:19–18:51 IST | अनुराधा | तृतीया |
| बुध, 28 अप्रैल | 05:43–12:18, 13:57–17:30 IST | उत्तराषाढ़ा | सप्तमी / अष्टमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 3 मई | 05:39–07:18, 08:58–18:57 IST | उत्तर भाद्रपद | द्वादशी |
| मंगल, 18 मई | 05:28–07:11, 08:53–11:43 IST | चित्रा | त्रयोदशी |
| गुरु, 20 मई | 14:00–19:07 IST | अनुराधा | पूर्णिमा / प्रतिपदा |
| शुक्र, 21 मई | 05:27–14:00 IST | अनुराधा | प्रतिपदा |
| मंगल, 25 मई | 05:25–07:08, 08:51–19:10 IST | उत्तराषाढ़ा | पंचमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| मंगल, 1 जून | 05:23–07:07, 08:51–12:50 IST | रेवती | एकादशी / द्वादशी |
| शनि, 5 जून | 05:22–10:35, 12:19–19:16 IST | रोहिणी / मृगशिरा | प्रतिपदा |
| शुक्र, 11 जून | 17:27–19:19 IST | उत्तर फाल्गुनी | अष्टमी |
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के लिए गणना; समय IST में। अपने शहर और परिवार के लिए सटीक समय अपने पुरोहित से तय कराएँ।
गृह प्रवेश का अर्थ है नए घर में पहला प्रवेश। हमारी परंपरा में इसे केवल एक सामाजिक अवसर नहीं, बल्कि एक संस्कार माना गया है। इसीलिए शास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कार्य किस दिन, किस नक्षत्र और किस तिथि में किया जाए। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ पंचांग की गणना पर आधारित हैं, और नीचे उन्हीं शास्त्रीय नियमों को सरल भाषा में समझाया गया है जिनके आधार पर ये तिथियाँ छाँटी जाती हैं।
गृह प्रवेश को जीवन की एक नई शुरुआत माना जाता है — एक ऐसा क्षण जब परिवार नए स्थान से जुड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए ऐसे समय का चयन किया जाता है जब दिन का स्वभाव स्थिरता, शांति और शुभता का हो। यह चयन व्यक्ति के भाग्य का निर्णय नहीं, बल्कि परंपरा के अनुसार शुभ समय का सम्मान है। इसीलिए नक्षत्र, तिथि, वार और महीने — इन चारों को साथ देखा जाता है।
इस पृष्ठ पर दिखाई जाने वाली तिथियाँ नई दिल्ली के लिए गणना किए गए पंचांग से निकाली जाती हैं। एक दिन सूची में तभी आता है जब:
सूची में दिया गया समय उसी खिड़की को दर्शाता है जिसमें नक्षत्र और तिथि दोनों की योग्यता एक साथ बनी रहती है। यह समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने नगर का पंचांग देखना उपयुक्त रहता है।
गृह प्रवेश के लिए शास्त्रों में जो मुख्य नियम बताए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
इनके अतिरिक्त कुछ अवधियाँ हैं जिनमें गृह प्रवेश नहीं किया जाता — अधिक मास, पितृ पक्ष, गुरु या शुक्र का अस्त होना, खरमास, चातुर्मास और होलाष्टक। ये सब मिलकर एक ऐसा ढाँचा बनाते हैं जिससे दिन-प्रतिदिन की गणना में शुभ दिन छाँटे जाते हैं।
यहाँ यह भी ध्यान रखें कि परंपराओं में मतभेद होते हैं। उत्तर और दक्षिण भारत की गणना पद्धतियों में, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में, कुछ नियमों को लेकर अंतर मिलता है; अमांत और पूर्णिमांत महीने की गणना भी भिन्न होती है। इसलिए यदि आपके कुल या क्षे
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 21 जन॰ | 07:13–11:12, 12:32–17:51 IST | अनुराधा | दशमी / एकादशी |
| सोम, 31 जन॰ | 07:15–08:31, 09:52–17:59 IST | उत्तर भाद्रपद | पंचमी |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| बुध, 2 फ़र॰ | 07:08–09:58 IST | रेवती | षष्ठी |
| सोम, 7 फ़र॰ | 07:05–08:28, 09:50–11:09 IST | मृगशिरा | एकादशी / द्वादशी |
| सोम, 14 फ़र॰ | 14:33–18:10 IST | चित्रा | पंचमी |
| गुरु, 17 फ़र॰ | 12:32–13:59, 15:23–18:12 IST | अनुराधा | अष्टमी |
| सोम, 28 फ़र॰ | 06:47–08:14, 09:40–18:20 IST | उत्तर भाद्रपद / रेवती | तृतीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| सोम, 17 अप्रैल | 05:53–07:30, 09:07–11:11 IST | उत्तराषाढ़ा | अष्टमी |
| गुरु, 27 अप्रैल | 07:33–13:57, 15:36–18:54 IST | रोहिणी | तृतीया |
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 5 मई | 05:36–10:37, 12:18–18:59 IST | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी / द्वादशी |
| बुध, 10 मई | 05:33–12:17, 13:58–15:53 IST | अनुराधा | द्वितीया |
| शुक्र, 19 मई | 07:53–14:00, 15:42–19:07 IST | उत्तर भाद्रपद | दशमी / एकादशी |
| शनि, 20 मई | 05:27–10:35, 12:17–19:08 IST | उत्तर भाद्रपद / रेवती | एकादशी / द्वादशी |
| गुरु, 25 मई | 05:25–12:18, 14:01–19:11 IST | रोहिणी / मृगशिरा | प्रतिपदा / द्वितीया |
| शुक्र, 26 मई | 05:25–14:01 IST | मृगशिरा | द्वितीया / तृतीया |
नई दिल्ली के गणना किए गए पंचांग से: कोई दिन तभी सूची में आता है जब उसका वार और मास उपयुक्त हों, इनमें से कुछ न चल रहा हो (अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक), और राहु काल के बाहर कम से कम 48 मिनट तक नक्षत्र और तिथि दोनों ऊपर की सूची में हों।
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती।
नहीं। यह सूची केवल दिन-स्तर का पंचांग देखती है। व्यक्तिगत बातें (संबंधित लोगों की कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न और कुल की परंपरा) समय तय करने से पहले आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं।
अपनी कुंडली के बारे में प्रश्न? अपनी भाषा बोलने वाले ज्योतिषी से बात करें।
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