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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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27 नक्षत्र · Chitra

चित्रा

क्रम27 में से 14
स्वामी ग्रहमंगल
देवतात्वष्टा / विश्वकर्मा
प्रतीकमोती / रत्न
गणराक्षस
योनिव्याघ्र (मादा)
नाड़ीमध्य
राशि-चक्र में विस्तारकन्या 23°20′–तुला 6°40′
राशिकन्या / तुला
पद नवांश1: सिंह, 2: कन्या, 3: तुला, 4: वृश्चिक
नामाक्षरपे, पो, रा, री
विंशोत्तरी दशामंगल महादशा, 7 वर्ष

अर्थ और प्रतीकवाद

चित्रा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में चौदहवाँ है। इसका स्वामी मंगल है और अधिष्ठाता देवता त्वष्टा अथवा विश्वकर्मा माने जाते हैं — वे देव शिल्पकार जो रूप, रचना और सुंदरता से जुड़े हैं। इसका प्रतीक मोती अथवा रत्न है, जो चमक, निर्मलता और सजावट का संकेत देता है।

राशि-सीमा की दृष्टि से चित्रा कन्या 23°20′ से तुला 6°40′ तक फैला हुआ है, अर्थात् यह कन्या (विर्गो) और तुला (लिब्रा) दोनों राशियों में विस्तृत है। गण राक्षस, योनि बाघिनी (स्त्री) और नाड़ी मध्य है — ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में प्रयुक्त होते हैं। नाम-अक्षर पे, पो, रा, रि हैं, और विंशोत्तरी दशा मंगल महादशा (पूर्ण सात वर्ष) से आरंभ होती है; जन्म के समय शेष कितना है, यह चंद्रमा की चित्रा में गति पर निर्भर करता है।

इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का स्वभाव

चित्रा शब्द का भाव है — चमकता हुआ, विविध, विचित्र। मंगल के स्वामित्व और त्वष्टा के शिल्प-भाव के संयोग से इस नक्षत्र में जन्मे लोगों में रचनात्मकता, आकर्षण और निर्माण की प्रवृत्ति देखी जाती है। वे अक्सर अपने कार्य को सुंदर और टिकाऊ बनाने पर ध्यान देते हैं, और जो वे बनाते हैं उस पर उनका व्यक्तित्व झलकता है।

मंगल की ऊर्जा साहस, स्पष्टता और निर्णय-शक्ति देती है, परंतु यह ऊर्जा तीव्र भी हो सकती है — इसलिए धैर्य और संयम साधना का विषय बनते हैं। प्रतीक मोती की भाँति ये लोग बाहर से शांत और भीतर से मूल्यवान प्रतीत होते हैं। गण राक्षस होने से स्वभाव में तीव्रता, स्वतंत्रता और गहराई का भाव जुड़ता है; यह शुभ-अशुभ का निर्णय नहीं, केवल स्वभाव-चित्रण है।

चार पाद

चित्रा के चार पाद और उनके नवांश इस प्रकार हैं:

एक ही नक्षत्र के भिन्न पाद भिन्न रंग दिखाते हैं; इसलिए व्यक्ति-विश्लेषण में पाद और पूरी कुंडली दोनों देखे जाते हैं।

करियर और धन

त्वष्टा अथवा विश्वकर्मा की अधिष्ठातृता और मंगल के स्वामित्व को देखते हुए चित्रा को शिल्प, डिज़ाइन, निर्माण और रचनात्मक कार्यों से जोड़कर देखा जाता है। परंपरा में इसे तकनीकी कौशल, सजावट, वास्तु-शिल्प और ऐसे कार्यों से भी जोड़ा जाता है जहाँ रूप और उपयोगिता साथ आते हैं।

मंगल की महादशा का भाव यह है कि करियर में आरंभ, प्रयास और निर्णायक कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहाँ यह स्मरण रखें कि ज्योतिष स्वभाव और प्रवृत्ति का संकेत देता है; किसी विशेष धन-लाभ, नौकरी अथवा व्यापार-परिणाम की गारंटी नहीं देता। व्यक्तिगत निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली परामर्श लेना उचित है।

प्रेम, विवाह और अनुकूलता

अष्टकूट मिलान में चित्रा के लिए गण राक्षस, योनि बाघिनी और नाड़ी मध्य का उपयोग होता है। ये तीनों मिलान के आठ कूटों में से कुछ हैं; पूरा निर्णय सभी कूटों और द

प्रश्न

चित्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

चित्रा का स्वामी ग्रह मंगल है; इसके अधिष्ठाता देवता त्वष्टा / विश्वकर्मा हैं।

चित्रा नक्षत्र किस राशि में आता है?

चित्रा निरयण राशि-चक्र (लाहिरी अयनांश) में कन्या 23°20′–तुला 6°40′ तक फैला है।

चित्रा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर पे, पो, रा, री हैं।

चित्रा में जन्म लेने वाले की दशा किससे शुरू होती है?

विंशोत्तरी दशा मंगल महादशा (7 वर्ष पूर्ण) से शुरू होती है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा चित्रा में कितना आगे बढ़ चुका है।

चित्रा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण राक्षस, योनि व्याघ्र (मादा), नाड़ी मध्य। ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में काम आते हैं।

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यह भी देखें

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