27 नक्षत्र · Jyeshtha
ज्येष्ठा
| क्रम | 27 में से 18 |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध |
| देवता | इंद्र |
| प्रतीक | कुंडल / छत्र |
| गण | राक्षस |
| योनि | मृग (नर) |
| नाड़ी | आदि |
| राशि-चक्र में विस्तार | वृश्चिक 16°40′–30° |
| राशि | वृश्चिक |
| पद नवांश | 1: धनु, 2: मकर, 3: कुंभ, 4: मीन |
| नामाक्षर | नो, या, यी, यू |
| विंशोत्तरी दशा | बुध महादशा, 17 वर्ष |
ज्येष्ठा नक्षत्र — परिचय
ज्येष्ठा 27 नक्षत्रों में 18वाँ नक्षत्र है। इसका स्वामी ग्रह बुध है और अधिष्ठाता देवता इंद्र हैं। इसका प्रतीक कुंडल अथवा छत्र माना गया है। ज्येष्ठा वृश्चिक राशि के 16°40′ से 30° तक फैला हुआ है। गण दृष्टि से यह राक्षस गण में आता है, योनि मृग (नर) है और नाड़ी आदि है। इन तीनों का उपयोग अष्टकूट कुंडली मिलान में किया जाता है।
यदि आपने अभी-अभी अपना जन्म नक्षत्र जाना है और वह ज्येष्ठा निकला है, तो यह पृष्ठ आपके लिए एक संदर्भ-सामग्री है — न कि भविष्यवाणी। ज्योतिष व्यक्तिगत कुंडली के संदर्भ में ही फलादेश देता है, और उसके लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है।
अर्थ और प्रतीकात्मकता
"ज्येष्ठा" शब्द ज्येष्ठ अर्थात बड़े, वरिष्ठ या अग्रज की ओर संकेत करता है। परंपरा में इसे कुल के बड़े, अग्रणी या नेतृत्व करने वाले भाव से जोड़ा जाता है। प्रतीक कुंडल और छत्र दोनों ही गरिमा, आत्म-सम्मान और शीर्ष पर स्थित होने का संकेत देते हैं।
इसके देवता इंद्र हैं — देवताओं के राजा, वर्षा और शक्ति से जुड़े। इंद्र का भाव नेतृत्व, सामर्थ्य और अधिकार का है, किंतु साथ ही यह स्मरण भी कराता है कि अधिकार संयम के साथ रखा जाए। स्वामी ग्रह बुध बुद्धि, वाणी, गणना और संवाद का ग्रह है। इस प्रकार ज्येष्ठा में नेतृत्व (इंद्र) और बुद्धि (बुध) का संयोजन दिखाई देता है।
इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का स्वभाव
ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्र के आधार पर स्वभाव की सामान्य प्रवृत्तियाँ बताई जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ संकेतात्मक हैं, निश्चित नहीं — कुंडली के अन्य कारक भी साथ मिलकर फल देते हैं।
- स्वाभिमान और आत्म-सम्मान की भावना प्रबल मानी जाती है।
- उत्तरदायित्व लेने और नेतृत्व करने की प्रवृत्ति।
- बुध के प्रभाव से वाणी, गणना और संवाद में रुचि।
- राक्षस गण के कारण तीव्रता और दृढ़ता का भाव।
- भीतर से संवेदनशीलता, जो सदा प्रकट नहीं होती।
यह भी ध्यान रखें कि वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है, अतः राशि और नक्षत्र दोनों मिलकर स्वभाव को आकार देते हैं।
चार पाद
ज्येष्ठा के चार पाद हैं, और प्रत्येक पाद का नवांश भिन्न राशि में पड़ता है:
- पहला पाद: धनु नवांश
- दूसरा पाद: मकर नवांश
- तीसरा पाद: कुंभ नवांश
- चौथा पाद: मीन नवांश
नामकरण के लिए पारंपरिक अक्षर इस प्रकार हैं — नो, या, यी, यू। उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं में नाम-अक्षरों के रूप में कहीं-कहीं थोड़ा अंतर देखने को मिलता है, इसलिए अपनी कुल-परंपरा के अनुसार पुष्टि कर लेना उचित है।
व्यवसाय और धन
बुध के स्वामित्व और इंद्र की अधिष्ठातृता के कारण ज्येष्ठा को बौद्धिक, संवादात्मक और नेतृत्व-संबंधी कार्यक्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है — जैसे लेखन, गणना, प्रबंधन, परामर्श या निर्णय लेने वाली भूमिकाएँ। यह केवल प्रवृत्ति का संकेत है; वास्तविक व्यवसाय-चयन अनेक कारकों पर निर्भर करता है। धन के विषय में कोई निश्चित फल कहना उचित नहीं; कुंडली के भाव और दशाएँ ही दिशा तय करते हैं।
प्रेम, विवाह और अनुकूलता
विवाह-मिलान में ज्येष्ठा के लिए गण राक्षस, योनि मृग (नर) और नाड़ी आदि का प्रयोग होता है। अष्टकूट
प्रश्न
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
ज्येष्ठा का स्वामी ग्रह बुध है; इसके अधिष्ठाता देवता इंद्र हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?
ज्येष्ठा निरयण राशि-चक्र (लाहिरी अयनांश) में वृश्चिक 16°40′–30° तक फैला है।
ज्येष्ठा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर नो, या, यी, यू हैं।
ज्येष्ठा में जन्म लेने वाले की दशा किससे शुरू होती है?
विंशोत्तरी दशा बुध महादशा (17 वर्ष पूर्ण) से शुरू होती है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा ज्येष्ठा में कितना आगे बढ़ चुका है।
ज्येष्ठा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण राक्षस, योनि मृग (नर), नाड़ी आदि। ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में काम आते हैं।
संबंधित
यह भी देखें
27 नक्षत्र में और
- अनुराधाAnuradha
- आश्लेषाAshlesha
- आर्द्राArdra
- अश्विनीAshwini
- भरणीBharani
- चित्राChitra
- धनिष्ठाDhanishta
- कृत्तिकाKrittika
- हस्तHasta
- मघाMagha
- मृगशिराMrigashira
- मूलMula
- पुनर्वसुPunarvasu
- पूर्वाषाढ़ाPurva Ashadha
- पूर्व भाद्रपदPurva Bhadrapada
- पुष्यPushya
- रेवतीRevati
- रोहिणीRohini
- पूर्व फाल्गुनीPurva Phalguni
- शतभिषाShatabhisha
- श्रवणShravana
- स्वातिSwati
- उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha
- उत्तर भाद्रपदUttara Bhadrapada
- उत्तर फाल्गुनीUttara Phalguni
- विशाखाVishakha