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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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नवग्रह · Budh (Mercury)

बुध

नवग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
बुधतुला23°25′Vishakhaवक्री26 सित॰ 20262 दिस॰ 2026, 17:27→ वृश्चिक

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

वक्री अवधि

बुध: राशि परिवर्तन

  1. कन्या → तुला
  2. तुला → वृश्चिक
  3. वृश्चिक → तुला (वक्री)
  4. तुला → वृश्चिक
  5. वृश्चिक → धनु
  6. धनु → मकर
  7. मकर → कुंभ
  8. कुंभ → मीन
  9. मीन → मेष
  10. मेष → वृषभ
  11. वृषभ → मिथुन
  12. मिथुन → कर्क
  13. कर्क → मिथुन (वक्री)
  14. मिथुन → कर्क
पाश्चात्य नामMercury
स्वराशिमिथुन, कन्या
उच्चकन्या 15°
नीचमीन 15°
स्वामित्व के नक्षत्रआश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
विंशोत्तरी दशा17 वर्ष
मित्रसूर्य, शुक्र
शत्रुचंद्र
सममंगल, गुरु, शनि
वारबुधवार
रत्नपन्ना
बीज मंत्रॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
जप संख्या9,000
कारकत्वबुद्धि, वाणी, व्यापार, संचार

बुध (Mercury) — परिचय

वैदिक ज्योतिष में बुध नवग्रहों में से एक हैं और पाश्चात्य ज्योतिष में उन्हें Mercury कहा जाता है। बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार के कारक माने जाते हैं। यह लेख एक संदर्भ-पथ है — इसमें बुध से जुड़े मूल तथ्य दिए गए हैं और यह बताया गया है कि कुंडली में उनकी स्थिति और उनके दशाकाल को किस दृष्टि से पढ़ा जाता है। किसी व्यक्ति की कुंडली का निर्णय केवल इन सामान्य बातों से नहीं किया जा सकता; उसके लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित माना जाता है।

कुंडली में भूमिका

बुध का स्वामित्व मिथुन (Gemini) और कन्या (Virgo) राशियों पर है। बुध कन्या 15° पर उच्च के और पिसीज़ 15° पर नीच के माने जाते हैं। नक्षत्रों में बुध आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती के स्वामी हैं।

बुध की मित्रता सूर्य और शुक्र से मानी जाती है, चंद्र से शत्रुता, और मंगल, बृहस्पति तथा शनि के साथ संबंध तटस्थ माने जाते हैं। बुध का वार बुधवार है।

ज्योतिष की परंपराओं में कई स्थानों पर मतभेद मिलते हैं — उत्तर और दक्षिण भारत की पद्धतियों में, स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में, तथा अमांत और पूर्णिमांत मास-गणना में। इन अंतरों को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी नियम को लागू करना चाहिए।

बुध के मुख्य तथ्य

बलवान और निर्बल स्थिति

जब बुध अपनी स्वगृही राशियों में या उच्च स्थान पर होते हैं, तो उनसे जुड़े विषय — बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार — सामान्यतः अधिक स्पष्ट और स्थिर दृष्टि से पढ़े जाते हैं। नीच स्थिति में इन विषयों पर अधिक ध्यान और साधना की आवश्यकता बताई जाती है। यह वर्णन सामान्य स्वरूप का है, किसी व्यक्ति के परिणाम की भविष्यवाणी नहीं।

किसी भी ग्रह का प्रभाव अकेले उसकी राशि से तय नहीं होता — भाव, दृष्टि, युति और दशाक्रम मिलकर चित्र बनाते हैं। इसीलिए एक ही स्थिति अलग-अलग कुंडलियों में अलग ढंग से फल देती दिखती है।

भावों के अनुसार संक्षिप्त संकेत

प्रश्न

बुध ग्रह किसका कारक है?

बुद्धि, वाणी, व्यापार, संचार।

बुध का मंत्र क्या है?

बीज मंत्र "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" है, जिसका परंपरा से 9,000 बार जप किया जाता है।

बुध किन नक्षत्रों का स्वामी है?

आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती। जिनका जन्म इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहते होता है, उनका जीवन बुध की महादशा से शुरू होता है।

बुध की महादशा कितने वर्ष की होती है?

120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में 17 वर्ष।

बुध कहाँ उच्च और कहाँ नीच का होता है?

उच्च कन्या 15°, नीच मीन 15°।

यह भी देखें

नवग्रह में और