जल्द शुरू हो रहा है। अभी हम ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। आप साइट देख सकते हैं; शुरुआत के लिए निःशुल्क दैनिक पंचांग देखें. Kael Tripton Ltd, Anthropic के Claude Startups प्रोग्राम का सदस्य है।

शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
English·न्यूज़लेटर·खाता
दिव्य पंचांगम्DivyaPanchangamपंचांग, मुहूर्त, मंदिर और हिंदू जगत — हर सुबह, हर शहर

नवग्रह · Shukra (Venus)

शुक्र

नवग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
शुक्रतुला2°30′Chitraवक्री2 सित॰ 20266 नव॰ 2026, 01:04→ कन्या (वक्री)

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

वक्री अवधि

शुक्र: राशि परिवर्तन

  1. सिंह → कन्या
  2. कन्या → तुला
  3. तुला → वृश्चिक
  4. वृश्चिक → धनु
  5. धनु → मकर
  6. मकर → कुंभ
  7. कुंभ → मीन
  8. मीन → मेष
  9. मेष → वृषभ
  10. वृषभ → मिथुन
  11. मिथुन → कर्क
  12. कर्क → सिंह
  13. सिंह → कन्या
  14. कन्या → तुला
पाश्चात्य नामVenus
स्वराशिवृषभ, तुला
उच्चमीन 27°
नीचकन्या 27°
स्वामित्व के नक्षत्रभरणी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
विंशोत्तरी दशा20 वर्ष
मित्रबुध, शनि
शत्रुसूर्य, चंद्र
सममंगल, गुरु
वारशुक्रवार
रत्नहीरा
बीज मंत्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
जप संख्या16,000
कारकत्वप्रेम, विवाह, सुख-सुविधा, कला

शुक्र (Venus) — वैदिक ज्योतिष में संदर्भ

शुक्र नवग्रहों में से एक हैं और वैदिक ज्योतिष में इनका स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। पाश्चात्य ज्योतिष में इन्हें Venus कहा जाता है। शुक्र प्रेम, विवाह, विलासिता और कलाओं के कारक माने जाते हैं। यह लेख एक संदर्भ-पथ है — व्यक्तिगत फलादेश नहीं। अपनी कुंडली के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है।

कुंडली में भूमिका

शुक्र को प्रेम, विवाह, विलासिता और कलाओं का कारक कहा जाता है। ज्योतिष की परंपरा में ये सौम्य ग्रहों में गिने जाते हैं। शुक्र की स्वामित्व वाली राशियाँ वृषभ (Taurus) और तुला (Libra) हैं। ये मिथुन, कन्या, तुला और वृषभ के स्वामी बुध तथा मकर और कुंभ के स्वामी शनि को मित्र माने जाते हैं। सूर्य और चंद्र शुक्र के शत्रु माने गए हैं, जबकि मंगल और बृहस्पति तटस्थ (neutral) हैं। शुक्र का वार शुक्रवार है।

शुक्र तीन नक्षत्रों के स्वामी हैं — भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वा आषाढ़ा। जिन जातकों का चंद्रमा इन नक्षत्रों में होता है, उनका जीवन शुक्र महादशा से आरंभ होता है।

बलवान और निर्बल स्थिति

शुक्र मीन राशि में 27° पर उच्च (exalted) और कन्या राशि में 27° पर नीच (debilitated) माने जाते हैं। उच्चता और नीचता की गणना में परंपराओं में कुछ भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं — कहीं अंश-सीमा पर बल दिया जाता है, कहीं राशि-आधार पर। इसलिए किसी एक मत को अंतिम न मानकर अपने ज्योतिषी से अपनी कुंडली के अनुसार समझना बेहतर होता है।

सामान्य संदर्भ में, शुक्र जिस भाव में बलवान हो वहाँ उसके कारकत्व — प्रेम, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा — अधिक स्पष्ट रूप से व्यक्त हो सकते हैं। निर्बल स्थिति में इन क्षेत्रों में साधना और संतुलन की आवश्यकता बताई जाती है। यह वर्णन सामान्य प्रवृत्ति का है, किसी व्यक्ति के जीवन का निश्चित फल नहीं।

भावों के अनुसार प्रभाव (संक्षेप)

शुक्र का भाव-फल उसकी राशि, दृष्टि, युति और भावेश की स्थिति पर निर्भर करता है। संक्षेप में:

यह सूची केवल सामान्य संकेत है। विस्तृत भाव-फल के लिए पूरी कुंडली का अध्ययन आवश्यक है।

दशा प्रभाव

विंशोत्तरी दशा में शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है। यह 120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र का एक भाग है। शुक्र महादशा के भीतर अंतर्दशाएँ उसी क्रम में चलती हैं जिस क्रम में ग्रहों की दशाएँ निर्धारित होती हैं। जिन जातकों का जन्म भरणी, पूर्वा फाल्गुनी या पूर्वा आषाढ़ा नक्षत्र में होता है, उनका जीवन शुक्र महादशा से आरंभ होता है।

दशा-फल सदैव ग्रह की कुंडली में स्थिति, बल और अन्य ग्रहों के संबंधों पर निर्भर करता है। इसलिए दशा को केवल नाम से नहीं, पूरे चार्ट के संदर्भ में पढ

प्रश्न

शुक्र ग्रह किसका कारक है?

प्रेम, विवाह, सुख-सुविधा, कला।

शुक्र का मंत्र क्या है?

बीज मंत्र "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" है, जिसका परंपरा से 16,000 बार जप किया जाता है।

शुक्र किन नक्षत्रों का स्वामी है?

भरणी, पूर्व फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा। जिनका जन्म इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहते होता है, उनका जीवन शुक्र की महादशा से शुरू होता है।

शुक्र की महादशा कितने वर्ष की होती है?

120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में 20 वर्ष।

शुक्र कहाँ उच्च और कहाँ नीच का होता है?

उच्च मीन 27°, नीच कन्या 27°।

यह भी देखें

नवग्रह में और