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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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27 नक्षत्र · Purva Ashadha

पूर्वाषाढ़ा

क्रम27 में से 20
स्वामी ग्रहशुक्र
देवताआपः (जल देवता)
प्रतीकपंखा / सूप
गणमनुष्य
योनिवानर (नर)
नाड़ीमध्य
राशि-चक्र में विस्तारधनु 13°20′–26°40′
राशिधनु
पद नवांश1: सिंह, 2: कन्या, 3: तुला, 4: वृश्चिक
नामाक्षरभू, धा, फा, ढा
विंशोत्तरी दशाशुक्र महादशा, 20 वर्ष

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र — परिचय

पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ नक्षत्र है। यह धनु (सगिटेरियस) राशि में 13°20′ से 26°40′ तक फैला हुआ है। इसके स्वामी ग्रह शुक्र (वीनस) हैं और अधिष्ठात्री देवता आपः (जल) हैं। इसका प्रतीक पंखा या सूप माना गया है। गण मनुष्य, योनि वानर (नर) तथा नाड़ी मध्य है।

अर्थ और प्रतीक-भाव

पूर्वाषाढ़ा का प्रतीक सूप या पंखा है — वह उपकरण जिससे अनाज से भूसी अलग की जाती है। यह भाव सूक्ष्म है: धान या गेहूँ को हवा में उड़ाकर अनावश्यक हिस्से को हटाना और सारभूत को बचाना। इसी प्रकार यह नक्षत्र शुद्धिकरण, छँटाई और सार-ग्रहण के विचार से जुड़ा माना जाता है।

देवता आपः जल की देवी हैं। जल जीवन देता है, बहता है, रास्ता बनाता है और अपने मार्ग में आने वाली चीज़ों को घिसकर चिकना कर देता है। इसलिए इस नक्षत्र में जल-तत्व की तरह लचीलापन और निरंतर गति का संकेत देखा जाता है। स्वामी शुक्र सौंदर्य, सामंजस्य और संबंधों का ग्रह है।

यह नक्षत्र शुक्र की महादशा से जुड़ा है, जिसकी पूर्ण अवधि 20 वर्ष मानी गई है। विंशोत्तरी दशा में जन्म के समय शेष कितना शुक्र दशा बचा है, यह इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा में कितनी दूर तक आगे बढ़ चुका था।

इस नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव

ज्योतिष शास्त्र में पूर्वाषाढ़ा में जन्मे जातकों के स्वभाव को प्रायः इस प्रकार वर्णित किया जाता है:

ये केवल सामान्य प्रवृत्तियाँ हैं; व्यक्ति का वास्तविक स्वभाव पूरी कुंडली, ग्रह-स्थितियों और दशाओं के संयुक्त अध्ययन से समझा जाता है। किसी व्यक्तिगत फलादेश के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित है।

चार पाद

पूर्वाषाढ़ा के चार पाद हैं, और प्रत्येक पाद का अपना नवांश स्वामी राशि है:

नामकरण की परंपरा में इस नक्षत्र के पादों के लिए ये अक्षर प्रयुक्त होते हैं: भू, धा, फा, ढा। ये अक्षर शिशु के नाम के पहले अक्षर के रूप में प्रचलित हैं।

करियर और धन

पूर्वाषाढ़ा में जन्मे जातकों के लिए शुक्र और जल-तत्व से जुड़े क्षेत्र प्रायः स्वाभाविक रुचि के माने जाते हैं — जैसे कला, सौंदर्य, संबंध-प्रबंधन, संवाद और सामंजस्य-आधारित कार्य। सूप के प्रतीक से छँटाई, चयन और शोध से जुड़े कार्यों का भी संकेत मिलता है। धनु राशि का संबंध लक्ष्य, दिशा और विस्तार से है, इसलिए दूरगामी योजना और सीखने की प्रवृत्ति भी देखी जाती है।

यहाँ यह स्पष्ट रखना आवश्यक है कि ये केवल सामान्य झुकाव हैं। किसी विशेष व्यक्ति के करियर या आर्थिक परिणाम की कोई गारंटी ज्योतिष से नहीं दी जा सकती; निर्णय अपनी परिस्थिति और योग्य सलाह

प्रश्न

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

पूर्वाषाढ़ा का स्वामी ग्रह शुक्र है; इसके अधिष्ठाता देवता आपः (जल देवता) हैं।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?

पूर्वाषाढ़ा निरयण राशि-चक्र (लाहिरी अयनांश) में धनु 13°20′–26°40′ तक फैला है।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर भू, धा, फा, ढा हैं।

पूर्वाषाढ़ा में जन्म लेने वाले की दशा किससे शुरू होती है?

विंशोत्तरी दशा शुक्र महादशा (20 वर्ष पूर्ण) से शुरू होती है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा में कितना आगे बढ़ चुका है।

पूर्वाषाढ़ा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण मनुष्य, योनि वानर (नर), नाड़ी मध्य। ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में काम आते हैं।

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