27 नक्षत्र · Uttara Phalguni
उत्तर फाल्गुनी
| क्रम | 27 में से 12 |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | सूर्य |
| देवता | अर्यमा |
| प्रतीक | पलंग के पिछले पाए |
| गण | मनुष्य |
| योनि | गौ (नर) |
| नाड़ी | आदि |
| राशि-चक्र में विस्तार | सिंह 26°40′–कन्या 10° |
| राशि | सिंह / कन्या |
| पद नवांश | 1: धनु, 2: मकर, 3: कुंभ, 4: मीन |
| नामाक्षर | टे, टो, पा, पी |
| विंशोत्तरी दशा | सूर्य महादशा, 6 वर्ष |
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र — परिचय
उत्तर फाल्गुनी 27 नक्षत्रों में बारहवाँ नक्षत्र है। यह सूर्य द्वारा शासित है और इसके अधिष्ठाता देवता अर्यमन हैं। इसका प्रतीक शय्या के पिछले पैर हैं। यह नक्षत्र सिंह राशि के 26°40′ से कन्या राशि के 10° तक फैला हुआ है, अर्थात् इसका कुछ भाग सिंह (लियो) में और शेष भाग कन्या (वर्गो) में पड़ता है। गण मनुष्य, योनि गाय (नर) और नाड़ी आदि है। विंशोत्तरी दशा में यह सूर्य महादशा से आरम्भ होता है, जिसकी पूर्ण अवधि छह वर्ष मानी जाती है — जन्म के समय शेष दशा इस पर निर्भर करती है कि चन्द्रमा इस नक्षत्र में कितनी दूर तक चल चुका है।
अर्थ और प्रतीकात्मकता
उत्तर फाल्गुनी का सम्बन्ध अर्यमन से है, जिन्हें परम्परा में सौहार्द, आतिथ्य और सामाजिक बन्धनों के संरक्षक के रूप में देखा जाता है। प्रतीक — शय्या के पिछले पैर — विश्राम, स्थिरता और सहारे का संकेत देता है। यह नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी के बाद आता है और उसे संयम तथा परिपक्वता की दिशा में आगे बढ़ाता है। सूर्य की अधिपति होने से इसमें गरिमा, आत्मविश्वास और उत्तरदायित्व का भाव जुड़ा माना जाता है। ज्योतिष में इसे शुभ और स्थिर प्रकृति का नक्षत्र कहा जाता है, जो सम्बन्धों और प्रतिबद्धताओं को महत्व देता है।
इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का स्वभाव
परम्परागत वर्णन के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मे लोग स्वभाव से स्नेही, विश्वसनीय और मिलनसार माने जाते हैं। वे प्रायः दूसरों की सहायता करने में रुचि लेते हैं और सामाजिक दायित्वों को गम्भीरता से निभाते हैं। सूर्य की छाया से उनमें आत्मसम्मान और नेतृत्व की प्रवृत्ति दिखती है, जबकि कन्या राशि के सम्पर्क से व्यवस्था और विवेक का पुट आता है। यह स्वभाव-चित्रण सामान्य प्रवृत्तियों का संकेत है, किसी व्यक्ति की निश्चित भविष्यवाणी नहीं; पूरी कुण्डली के अन्य ग्रह-भाव भी निर्णायक होते हैं।
चार पाद
उत्तर फाल्गुनी के चार पाद हैं, और प्रत्येक पाद का नवांश भिन्न राशि में पड़ता है:
- प्रथम पाद — धनु नवांश; नाम अक्षर ते
- द्वितीय पाद — मकर नवांश; नाम अक्षर तो
- तृतीय पाद — कुम्भ नवांश; नाम अक्षर प
- चतुर्थ पाद — मीन नवांश; नाम अक्षर पी
नामकरण की ये चार अक्षर — ते, तो, प, पी — परम्परा में इस नक्षत्र से जोड़े जाते हैं। पाद के अनुसार नवांश राशि बदलने से स्वभाव की बारीकियाँ भिन्न मानी जाती हैं।
करियर और धन
शास्त्रीय वर्णन में इस नक्षत्र को सहयोग, संगठन और जन-सम्पर्क से जोड़ा जाता है। सूर्य की अधिपति और अर्यमन की अधिष्ठाता होने के कारण नेतृत्व, प्रबन्धन, परामर्श, शिक्षण तथा ऐसे कार्य जिनमें लोगों के साथ विश्वास का सम्बन्ध बनता है, स्वाभाविक रूप से अनुकूल माने जाते हैं। धन के विषय में यह स्मरण रहे कि ज्योतिष प्रवृत्तियों का संकेत देता है, किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं देता। व्यक्तिगत निर्णयों के लिए योग्य ज्योतिषी से पूरी कुण्डली का परामर्श लेना उचित है।
प्रेम, विवाह और अनुकूलता
विवाह-मिलान में इस नक्षत्र की तीन विशेषताएँ प्रयुक्त होती हैं: गण मनुष्य, योनि गाय (नर) और नाड़ी आदि। अष्टकूट मिलान में इन्हें अन्य कूटों के साथ जोड़ा जाता है। अर्यमन की उपस्थिति से इस नक्षत्र को सम्बन्धों में निष्ठा और स्थायित्व से जोड़ा जाता है। यह भी ध्यान रहे कि मिलान की
प्रश्न
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
उत्तर फाल्गुनी का स्वामी ग्रह सूर्य है; इसके अधिष्ठाता देवता अर्यमा हैं।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र किस राशि में आता है?
उत्तर फाल्गुनी निरयण राशि-चक्र (लाहिरी अयनांश) में सिंह 26°40′–कन्या 10° तक फैला है।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर टे, टो, पा, पी हैं।
उत्तर फाल्गुनी में जन्म लेने वाले की दशा किससे शुरू होती है?
विंशोत्तरी दशा सूर्य महादशा (6 वर्ष पूर्ण) से शुरू होती है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा उत्तर फाल्गुनी में कितना आगे बढ़ चुका है।
उत्तर फाल्गुनी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण मनुष्य, योनि गौ (नर), नाड़ी आदि। ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में काम आते हैं।
संबंधित
यह भी देखें
- सूर्य ग्रह
- सिंह राशि
- कन्या राशि
- विवाह मुहूर्त
- गृह प्रवेश मुहूर्त
- नामकरण मुहूर्त
- अन्नप्राशन मुहूर्त
- संपत्ति खरीद मुहूर्त
- व्यापार आरंभ मुहूर्त
27 नक्षत्र में और
- अनुराधाAnuradha
- आश्लेषाAshlesha
- आर्द्राArdra
- अश्विनीAshwini
- भरणीBharani
- चित्राChitra
- धनिष्ठाDhanishta
- ज्येष्ठाJyeshtha
- कृत्तिकाKrittika
- हस्तHasta
- मघाMagha
- मृगशिराMrigashira
- मूलMula
- पुनर्वसुPunarvasu
- पूर्वाषाढ़ाPurva Ashadha
- पूर्व भाद्रपदPurva Bhadrapada
- पुष्यPushya
- रेवतीRevati
- रोहिणीRohini
- पूर्व फाल्गुनीPurva Phalguni
- शतभिषाShatabhisha
- श्रवणShravana
- स्वातिSwati
- उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha
- उत्तर भाद्रपदUttara Bhadrapada
- विशाखाVishakha