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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
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नवग्रह · Surya (Sun)

सूर्य

नवग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
सूर्यतुला8°23′Swatiमार्गी17 अक्टू॰ 202616 नव॰ 2026, 19:43→ वृश्चिक

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

सूर्य: राशि परिवर्तन

  1. कन्या → तुला
  2. तुला → वृश्चिक
  3. वृश्चिक → धनु
  4. धनु → मकर
  5. मकर → कुंभ
  6. कुंभ → मीन
  7. मीन → मेष
  8. मेष → वृषभ
  9. वृषभ → मिथुन
  10. मिथुन → कर्क
  11. कर्क → सिंह
  12. सिंह → कन्या
  13. कन्या → तुला
  14. तुला → वृश्चिक
पाश्चात्य नामSun
स्वराशिसिंह
उच्चमेष 10°
नीचतुला 10°
स्वामित्व के नक्षत्रकृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
विंशोत्तरी दशा6 वर्ष
मित्रचंद्र, मंगल, गुरु
शत्रुशुक्र, शनि
समबुध
वाररविवार
रत्नमाणिक्य
बीज मंत्रॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
जप संख्या7,000
कारकत्वआत्मा, पिता, अधिकार, स्वास्थ्य

सूर्य (सूर्य) — वैदिक ज्योतिष में

सूर्य नवग्रहों में प्रमुख ग्रह है। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे "सन" कहा जाता है। वैदिक परंपरा में सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। यह लेख एक संदर्भ-मार्गदर्शिका है — कुंडली में सूर्य का स्थान क्या दर्शाता है और उसकी अवधियाँ कैसे पढ़ी जाती हैं, इसका संक्षिप्त परिचय।

कुंडली में भूमिका

सूर्य को आत्मा का कारक कहा जाता है। ज्योतिष में यह आत्मविश्वास, पिता से संबंध, अधिकार-भाव और शरीर की सामान्य स्थिति से जोड़ा जाता है। ये संकेतक व्यक्ति के जीवन में आत्म-बोध और उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाते हैं।

सूर्य का स्वामित्व सिंह राशि पर है। इसके मित्र ग्रह चंद्र, मंगल और बृहस्पति हैं; शत्रु शुक्र और शनि हैं; तथा बुध तटस्थ (न्यूट्रल) माने जाते हैं। सूर्य का वार रविवार है।

सूर्य तीन नक्षत्रों का स्वामी है — कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा। जिन जातकों का चंद्र इन नक्षत्रों में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी क्रम में सूर्य महादशा से आरंभ होता है।

बलवान बनाम निर्बल स्थिति

सूर्य मेष राशि के 10° पर उच्च का माना जाता है और तुला राशि के 10° पर नीच का। उच्चता और नीचता के ये बिंदु परंपरा में दिए गए हैं; इनका व्यक्तिगत फल केवल पूरी कुंडली के संदर्भ में ही देखा जाता है।

सूर्य की स्थिति को अकेले नहीं, बल्कि लग्न, चंद्र, अन्य ग्रहों की युति-दृष्टि और भाव-स्थिति के साथ मिलाकर पढ़ा जाता है। इसीलिए किसी एक ग्रह को "शुभ" या "अशुभ" कह देना सामान्यतः उचित नहीं माना जाता।

भावों के अनुसार संक्षिप्त प्रभाव

भाव-फल की परंपरा में सूर्य जिस भाव में बैठता है, उस भाव से जुड़े क्षेत्रों में आत्मा और अधिकार का पक्ष उभरता देखा जाता है। उदाहरण के लिए —

ये संकेत केवल स्वरूप बताते हैं; व्यक्तिगत फल के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना ही उचित मार्ग माना जाता है।

दशा प्रभाव

विंशोत्तरी पद्धति के 120 वर्ष के चक्र में सूर्य की महादशा 6 वर्ष की होती है। इस अवधि को आत्मा, पिता, अधिकार और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों के सक्रिय होने के संदर्भ में पढ़ा जाता है।

दशा-फल सूर्य की राशि, भाव, नक्षत्र और अन्य ग्रहों से संबंध पर निर्भर करता है। जैसे ही चंद्र कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा में हो, जातक की दशा-क्रम-आरंभ सूर्य से होता है — यह विंशोत्तरी की परंपरागत गणना का हिस्सा है।

दशा को भविष्यवाणी के रूप में नहीं, बल्कि एक समय-चक्र के रूप में समझा जाता है जिसमें संबंधित विषय अधिक ध्यान माँगते हैं।

उपाय, मंत्र और रत्न

परंपरा में सूर्य के लिए बीज मंत्र है —

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

इस मंत्र का जप संख्या 7,000 बताई गई है। जप शुद्ध उच्चारण, श्रद्धा और नियमितता के साथ किया जाता है; संख्या को लक्ष्य मानकर भी परंपरा में साधना की जाती है।

सूर्य का रत

प्रश्न

सूर्य ग्रह किसका कारक है?

आत्मा, पिता, अधिकार, स्वास्थ्य।

सूर्य का मंत्र क्या है?

बीज मंत्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" है, जिसका परंपरा से 7,000 बार जप किया जाता है।

सूर्य किन नक्षत्रों का स्वामी है?

कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा। जिनका जन्म इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहते होता है, उनका जीवन सूर्य की महादशा से शुरू होता है।

सूर्य की महादशा कितने वर्ष की होती है?

120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में 6 वर्ष।

सूर्य कहाँ उच्च और कहाँ नीच का होता है?

उच्च मेष 10°, नीच तुला 10°।

यह भी देखें

नवग्रह में और