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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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नवग्रह · Mangal (Mars)

मंगल

नवग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
मंगलकर्क21°51′Ashleshaमार्गी18 सित॰ 202612 नव॰ 2026, 20:18→ सिंह

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

वक्री अवधि

मंगल: राशि परिवर्तन

  1. तुला → वृश्चिक
  2. वृश्चिक → धनु
  3. धनु → मकर
  4. मकर → कुंभ
  5. कुंभ → मीन
  6. मीन → मेष
  7. मेष → वृषभ
  8. वृषभ → मिथुन
  9. मिथुन → कर्क
  10. कर्क → सिंह
  11. सिंह → कर्क (वक्री)
  12. कर्क → सिंह
  13. सिंह → कन्या
  14. कन्या → तुला
पाश्चात्य नामMars
स्वराशिमेष, वृश्चिक
उच्चमकर 28°
नीचकर्क 28°
स्वामित्व के नक्षत्रमृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
विंशोत्तरी दशा7 वर्ष
मित्रसूर्य, चंद्र, गुरु
शत्रुबुध
समशुक्र, शनि
वारमंगलवार
रत्नमूंगा
बीज मंत्रॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
जप संख्या10,000
कारकत्वऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि

मंगल (Mars) — वैदिक ज्योतिष में

मंगल नवग्रहों में से एक है और वैदिक ज्योतिष में इसे ऊर्जा, साहस, भाई-बहनों तथा भूमि से जोड़कर देखा जाता है। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे Mars कहा जाता है। यह लेख एक संदर्भ-परिचय है — इसमें बताया गया है कि कुंडली में मंगल का क्या अर्थ है और उसके गोचर-दशा काल को किस दृष्टि से पढ़ा जाता है।

कुंडली में भूमिका

मंगल को ऊर्जा, साहस, भाई-बहनों और भूमि का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय परंपरा में यह ग्रह व्यक्ति के पराक्रम, निर्णय-क्षमता और कार्य-संपादन की प्रवृत्ति से जुड़ा माना जाता है। किसी भी कुंडली में मंगल की स्थिति को उसके राशि, भाव, दृष्टि और अन्य ग्रहों के साथ संबंध के आधार पर पढ़ा जाता है — केवल एक तत्व से निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।

मंगल की अपनी राशियाँ मेष और वृष्चिक हैं। यह मिथुन नक्षत्रों — मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा — का स्वामी माना जाता है। जिन जातकों का चंद्रमा इन नक्षत्रों में होता है, उनका जीवन मंगल महादशा से आरंभ होता है।

बलवान और निर्बल स्थिति

मंगल मकर राशि के 28° पर उच्च का और कर्क राशि के 28° पर नीच का माना जाता है। उच्चता और नीचता को केवल शुभ-अशुभ का लेबल न समझें; परंपरा में इन्हें ग्रह की अभिव्यक्ति की दिशा और तीव्रता बताने वाले संकेतों के रूप में पढ़ा जाता है।

मैत्री-संबंधों की बात करें तो सूर्य, चंद्र और बृहस्पति मंगल के मित्र माने जाते हैं; बुध को शत्रु कहा जाता है; और शुक्र तथा शनि को तटस्थ (सम) माना जाता है। इन संबंधों का उपयोग ग्रह-बल के आकलन में सहायक माना जाता है।

भावों के अनुसार प्रभाव (संक्षेप में)

भाव-फल की परंपरा में मंगल की भूमिका इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस भाव में बैठा है, किस पर दृष्टि डाल रहा है, और किन ग्रहों के साथ युति में है। सामान्य संदर्भ में:

ये संकेत मात्र दिशाएँ हैं। व्यक्तिगत फल के लिए पूरी कुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है, और परंपराओं में भाव-फल की व्याख्या में मतभेद भी मिलते हैं।

दशा के प्रभाव

विंशोत्तरी पद्धति में मंगल की महादशा 7 वर्ष की मानी जाती है। यह 120 वर्ष के चक्र का एक भाग है। दशा-काल को पढ़ते समय ज्योतिषी यह देखते हैं कि मंगल कुंडली में कहाँ स्थित है, उसकी अंतर्दशा और प्रत्यंतरदशा किन ग्रहों की है, तथा गोचर उस समय कैसा है। इसीलिए मंगल दशा को केवल नाम से नहीं, बल्कि संपूर्ण संदर्भ में समझा जाता है।

उपाय, मंत्र और रत्न

परंपरा में मंगल के लिए बीज मंत्र है:

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

इस जप की संख्या परंपरा में 10,000 बताई जाती है। जप की विधि, संकल्प और दिन-समय को लेकर अलग-अलग परंपराओं में भिन्नता मिलती है; किसी योग्य ज्योतिषी से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।

मंगल का वार मंगल

प्रश्न

मंगल ग्रह किसका कारक है?

ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि।

मंगल का मंत्र क्या है?

बीज मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" है, जिसका परंपरा से 10,000 बार जप किया जाता है।

मंगल किन नक्षत्रों का स्वामी है?

मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा। जिनका जन्म इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहते होता है, उनका जीवन मंगल की महादशा से शुरू होता है।

मंगल की महादशा कितने वर्ष की होती है?

120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में 7 वर्ष।

मंगल कहाँ उच्च और कहाँ नीच का होता है?

उच्च मकर 28°, नीच कर्क 28°।

यह भी देखें

नवग्रह में और