शुभ मुहूर्त · Vivah Muhurat
विवाह मुहूर्त
| नक्षत्र | रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती |
|---|---|
| तिथियाँ | चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या को छोड़कर कोई भी |
| वार | रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| मास | कोई भी, नीचे दिए वर्जित समय को छोड़कर |
| वर्जित | अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक |
| समय खंड | सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक वे घंटे जब नक्षत्र और तिथि दोनों उपयुक्त हों, राहु काल छोड़कर; कम से कम 48 मिनट |
| टिप्पणी | विवाह रात भर चल सकते हैं, इसलिए समय खंड अगले सूर्योदय तक जाता है। |
इस संस्कार में समय का महत्व
विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दो जीवनों का आजीवन साथ है। इसीलिए हमारी परंपरा में इसे संस्कार कहा गया है — एक ऐसा कर्म जो मन, वचन और कर्म से स्थिर होता है। ऐसे अवसर पर पंचांग की शुद्धि देखी जाती है, ताकि कार्य शुभ लग्न में, शुभ नक्षत्र और तिथि के साथ संपन्न हो। मुहूर्त का अर्थ यह नहीं कि कोई फल पहले से तय हो जाता है; मुहूर्त का अर्थ है कि हम अपने प्रयास को शास्त्र-सम्मत ढंग से, शांत मन से आरंभ करें।
ज्योतिष शास्त्रों में विवाह के लिए कई नियम सदियों से चले आ रहे हैं — नक्षत्र, तिथि, वार, मास, और कुछ ऐसे कालखंड जिनमें विवाह वर्जित माना गया है। ये नियम अलग-अलग परंपराओं में थोड़े भिन्न रूप में मिलते हैं, इसलिए यहाँ हम केवल वे बातें लिख रहे हैं जो सामान्य रूप से स्वीकृत हैं।
तिथि-सूची को कैसे पढ़ें
इस पृष्ठ पर दी गई सूची नई दिल्ली के लिए गणना किए गए पंचांग से बनाई जाती है। किसी दिन को सूची में तभी रखा जाता है जब उसका वार और मास नियम पूरे हों, ऊपर बताए गए कोई भी वर्जित कालखंड न चल रहे हों, और सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक कम से कम 48 मिनट के लिए नक्षत्र और तिथि दोनों योग्य हों — राहु काल को छोड़कर।
ध्यान रहे कि विवाह रात्रि में भी चलते हैं, इसलिए समय-सीमा अगले सूर्योदय तक मानी जाती है। सूची में दिया गया समय उसी दिन के लिए है; यदि समारोह मध्यरात्रि के बाद तक जाए, तो अगले दिन का पंचांग भी देखा जाता है।
सूची को अंतिम निर्णय न मानें। यह केवल दिन-स्तर की पंचांग जाँच है। व्यक्तिगत कारण — वर-वधू की जन्म कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न, तथा कुल की परंपरा — ये सब आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं, और तब समय तय होता है।
लागू किए जाने वाले नियम
नक्षत्र
- रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती।
तिथि
- चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या को छोड़कर शेष सभी तिथियाँ।
वार
- रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार।
मास
- कोई भी मास, बशर्ते नीचे दिए वर्जित कालखंड लागू न हों।
जिन कालखंडों में विवाह नहीं
- अधिक (अतिरिक्त) चांद्र मास।
- पितृ पक्ष।
- गुरु या शुक्र का अस्त (वक्री-अस्त दोष)।
- खरमास (सूर्य का धनु या मीन में गोचर)।
- चातुर्मास (देवशयनी से देव उठानी एकादशी तक)।
- होलाष्टक।
समय-सीमा
- सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक वे घंटे जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों योग्य हों, राहु काल को छोड़कर।
- कम से कम 48 मिनट का समय-खंड।
इन नियमों में परंपराओं के भेद भी हैं। उत्तर और दक्षिण भारत की पद्धतियों में, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में कुछ बिंदुओं पर मतभेद मिलता है; अमांत और पूर्णिमांत मास-गणना का अंतर भी इसी कारण दिखता है। इसलिए यहाँ किसी एक मत को अंतिम नहीं कहा गया है — अपने कुल और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार पुरोहित से पुष्टि कर लेना उचित
प्रश्न
विवाह मुहूर्त की तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
नई दिल्ली के गणना किए गए पंचांग से: कोई दिन तभी सूची में आता है जब उसका वार और मास उपयुक्त हों, इनमें से कुछ न चल रहा हो (अधिक (मल) मास; पितृ पक्ष; गुरु या शुक्र अस्त; खरमास (सूर्य धनु या मीन में); चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक); होलाष्टक), और राहु काल के बाहर कम से कम 48 मिनट तक नक्षत्र और तिथि दोनों ऊपर की सूची में हों।
विवाह मुहूर्त के लिए कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती।
क्या इस सूची की तिथि अपने आप में पर्याप्त है?
नहीं। यह सूची केवल दिन-स्तर का पंचांग देखती है। व्यक्तिगत बातें (संबंधित लोगों की कुंडली, ताराबल और चंद्रबल, चुने गए समय का लग्न और कुल की परंपरा) समय तय करने से पहले आपके पुरोहित या ज्योतिषी देखते हैं।
यह भी देखें
- रोहिणी नक्षत्र
- मृगशिरा नक्षत्र
- मघा नक्षत्र
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र
- हस्त नक्षत्र
- स्वाति नक्षत्र
- अनुराधा नक्षत्र
- मूल नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद नक्षत्र
- रेवती नक्षत्र