27 नक्षत्र · Rohini
रोहिणी
| क्रम | 27 में से 4 |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| देवता | ब्रह्मा / प्रजापति |
| प्रतीक | गाड़ी / रथ |
| गण | मनुष्य |
| योनि | सर्प (नर) |
| नाड़ी | अंत्य |
| राशि-चक्र में विस्तार | वृषभ 10°–23°20′ |
| राशि | वृषभ |
| पद नवांश | 1: मेष, 2: वृषभ, 3: मिथुन, 4: कर्क |
| नामाक्षर | ओ, वा, वी, वू |
| विंशोत्तरी दशा | चंद्र महादशा, 10 वर्ष |
रोहिणी नक्षत्र — स्वामी, देवता, स्वभाव, पाद और अनुकूलता
रोहिणी 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है। यदि आपने अभी अपना जन्म नक्षत्र जाना है और वह रोहिणी निकला है, तो यह संक्षिप्त संदर्भ-पृष्ठ आपके लिए है। यहाँ दी गई सामग्री परंपरागत ज्योतिष साहित्य पर आधारित है, और इसे केवल समझने के लिए पढ़ा जाना चाहिए — व्यक्तिगत फलादेश के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श उचित माना जाता है।
अर्थ और प्रतीक
रोहिणी का अर्थ है "लालिमा से युक्त", "उदीयमान" और "बढ़ती हुई"। इसका प्रतीक रथ या शकट है — वह वाहन जो धीरे, स्थिर और सुनिश्चित गति से अपने लक्ष्य तक पहुँचता है। रथ का यह बिंब रोहिणी के स्वभाव की ओर संकेत करता है: निरंतरता, धैर्य और सृजन की दिशा में आगे बढ़ना।
रोहिणी के अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा / प्रजापति हैं — सृष्टि, वृद्धि और प्रजनन के अधिपति। इसका स्वामी ग्रह चंद्र है, जो मन, भावना और पोषण का कारक माना जाता है। नक्षत्र का गण मनुष्य है, योनि सर्प (पुरुष) है और नाड़ी अंत्य है। ये तीनों तत्व अष्टकूट कुंडली मिलान में प्रयुक्त होते हैं।
रोहिणी का विस्तार वृषभ राशि के 10° से 23°20′ तक है (लाहिड़ी अयनांश के अनुसार, निरयन राशि-चक्र में)। इसका वर्णन सामान्यतः स्थिर, सौम्य और उर्वर स्वभाव के साथ जोड़ा जाता है।
इस नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
परंपरागत वर्णनों में रोहिणी को सौंदर्य-बोध, स्थिरता और व्यवहार-कुशलता से जोड़ा जाता है। चंद्र के स्वामित्व और प्रजापति के अधिष्ठातृत्व के कारण इसे पोषण, रचनात्मकता और संबंध-निर्माण की प्रवृत्ति वाला माना गया है। रथ के प्रतीक के अनुरूप, ऐसे व्यक्ति अक्सर धीमी पर स्थायी गति से कार्य करते हैं और जल्दबाजी से बचते हैं।
यह ध्यान रखना उपयोगी है कि नक्षत्र-वर्णन सामान्य प्रवृत्तियाँ बताते हैं, किसी व्यक्ति का निश्चित फल नहीं। पूरी कुंडली — ग्रह-स्थिति, भाव, दशा और अन्य कारक — मिलकर ही चित्र पूरा करते हैं।
चार पाद
रोहिणी के चार पादों के नवांश इस प्रकार दिए गए हैं:
- प्रथम पाद: मेष नवांश
- द्वितीय पाद: वृषभ नवांश
- तृतीय पाद: मिथुन नवांश
- चतुर्थ पाद: कर्क नवांश
नामकरण की परंपरागत ध्वनियाँ इन चार पादों के लिए क्रमशः ओ, वा, वि, वु बताई गई हैं। विभिन्न क्षेत्रों में नामकरण की शैली में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है, इसलिए अपने परिवार या कुल की परंपरा का पालन करना स्वाभाविक है।
व्यवसाय और धन
शास्त्रीय वर्णन में रोहिणी को सृजन, सौंदर्य, कृषि, वाणिज्य और संबंध-आधारित कार्यों से जोड़ा जाता है। रथ के प्रतीक के अनुसार नियोजित, दीर्घकालिक प्रयासों में स्थिरता का संकेत मिलता है। यह केवल प्रवृत्ति-सूचक है; किसी विशेष आर्थिक परिणाम का वादा या भय यहाँ नहीं दिया जा रहा। धन-संबंधी निर्णयों के लिए अपनी पूरी कुंडली का अध्ययन कराना उचित है।
प्रेम, विवाह और अनुकूलता
अष्टकूट मिलान में रोहिणी के लिए गण मनुष्य, योनि सर्प (पुरुष) और नाड़ी अंत्य का उपयोग होता है। ये तीनों मिलान के आठ कूटों में से तीन हैं, और इनके साथ अन्य कूट भी देखे जाते हैं। मिलान की परंपराएँ उत्तर और दक्षिण भारत में, तथा स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में कुछ भ
प्रश्न
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रोहिणी का स्वामी ग्रह चंद्र है; इसके अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा / प्रजापति हैं।
रोहिणी नक्षत्र किस राशि में आता है?
रोहिणी निरयण राशि-चक्र (लाहिरी अयनांश) में वृषभ 10°–23°20′ तक फैला है।
रोहिणी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर ओ, वा, वी, वू हैं।
रोहिणी में जन्म लेने वाले की दशा किससे शुरू होती है?
विंशोत्तरी दशा चंद्र महादशा (10 वर्ष पूर्ण) से शुरू होती है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा रोहिणी में कितना आगे बढ़ चुका है।
रोहिणी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण मनुष्य, योनि सर्प (नर), नाड़ी अंत्य। ये तीनों अष्टकूट कुंडली मिलान में काम आते हैं।
संबंधित
यह भी देखें
- चंद्र ग्रह
- वृषभ राशि
- विवाह मुहूर्त
- गृह प्रवेश मुहूर्त
- नामकरण मुहूर्त
- अन्नप्राशन मुहूर्त
- संपत्ति खरीद मुहूर्त
- व्यापार आरंभ मुहूर्त
27 नक्षत्र में और
- अनुराधाAnuradha
- आश्लेषाAshlesha
- आर्द्राArdra
- अश्विनीAshwini
- भरणीBharani
- चित्राChitra
- धनिष्ठाDhanishta
- ज्येष्ठाJyeshtha
- कृत्तिकाKrittika
- हस्तHasta
- मघाMagha
- मृगशिराMrigashira
- मूलMula
- पुनर्वसुPunarvasu
- पूर्वाषाढ़ाPurva Ashadha
- पूर्व भाद्रपदPurva Bhadrapada
- पुष्यPushya
- रेवतीRevati
- पूर्व फाल्गुनीPurva Phalguni
- शतभिषाShatabhisha
- श्रवणShravana
- स्वातिSwati
- उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha
- उत्तर भाद्रपदUttara Bhadrapada
- उत्तर फाल्गुनीUttara Phalguni
- विशाखाVishakha