जल्द शुरू हो रहा है। अभी हम ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। आप साइट देख सकते हैं; शुरुआत के लिए निःशुल्क दैनिक पंचांग देखें. Kael Tripton Ltd, Anthropic के Claude Startups प्रोग्राम का सदस्य है।

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
English·न्यूज़लेटर·खाता
दिव्य पंचांगम्DivyaPanchangamपंचांग, मुहूर्त, मंदिर और हिंदू जगत — हर सुबह, हर शहर

नवग्रह · Rahu (North node)

राहु

नवग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्रगतिइस राशि में कब सेअगला राशि परिवर्तन
राहुकुंभ2°09′Dhanishtaवक्री18 मई 20255 दिस॰ 2026, 22:32→ मकर

आज दिल्ली में सूर्योदय पर निरयण (लाहिरी) स्थिति; समय IST में। राहु माध्य पात है; केतु सदा उसके सामने।

राहु: राशि परिवर्तन

  1. कुंभ → मकर
  2. मकर → धनु
पाश्चात्य नामNorth node
स्वराशि— (कुंभ का सह-स्वामी)
उच्चवृषभ / मिथुन
नीचवृश्चिक / धनु
स्वामित्व के नक्षत्रआर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
विंशोत्तरी दशा18 वर्ष
वारशनिवार
रत्नगोमेद
बीज मंत्रॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
जप संख्या18,000
कारकत्वआसक्ति, विदेश, तकनीक, भ्रम

राहु (उत्तर नोड)

राहु वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों में से एक है। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे उत्तर नोड (North node) कहा जाता है। यह कोई भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि चंद्रमा के पथ और सूर्य के पथ के मिलन बिंदु को दर्शाता है। ज्योतिष परंपरा में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। इसका स्वामित्व किसी राशि पर नहीं है, परंतु यह कुंभ (Aquarius) का सह-स्वामी माना जाता है।

कुंडली में भूमिका

राहु का संबंध अत्यधिक आसक्ति, विदेश यात्रा या विदेश संबंध, तकनीक और भ्रम से जोड़ा जाता है। जहाँ भी राहु बैठता है, वहाँ व्यक्ति की रुचि तीव्र हो सकती है — कभी ज्ञान की भूख के रूप में, कभी भौतिक सुविधाओं की ओर खिंचाव के रूप में। परंपरा इसे ऐसा ग्रह मानती है जो सीमाओं को पार करने की प्रवृत्ति देता है — नए देश, नई तकनीक, नई दिशाएँ। साथ ही यह भ्रम का भी कारक है, इसलिए इसके प्रभाव को समझना संतुलन माँगता है।

राहु तीन नक्षत्रों का स्वामी माना जाता है — आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा। जिन जातकों का चंद्रमा इन नक्षत्रों में होता है, उनका जीवन राहु महादशा से आरंभ होता है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि इससे उनके जीवन की दिशा और प्राथमिकताएँ शुरुआत से ही राहु के स्वभाव से जुड़ जाती हैं।

बलवान बनाम निर्बल स्थिति

राहु को तुला और मिथुन में उच्च (exalted) माना जाता है। वृष और धनु में इसे नीच (debilitated) कहा जाता है। ध्यान रहे कि विभिन्न परंपराओं में इन स्थितियों को लेकर मतभेद रहा है — कुछ आचार्य वृष को और कुछ मिथुन को उच्च स्थान देते हैं। इसी प्रकार नीचता के विषय में भी मतभेद मिलता है। इसलिए किसी व्यक्तिगत कुंडली का मूल्यांकन करते समय योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित है।

सामान्य रूप से, जब राहु अनुकूल स्थिति में होता है, तो यह नई तकनीक, शोध, विदेश संबंध और असाधारण क्षमताओं की ओर ले जा सकता है। प्रतिकूल स्थिति में यह भ्रम, अत्यधिक आसक्ति और अस्थिरता के रूप में प्रकट हो सकता है। यह मूल्यांकन व्यक्तिगत कुंडली, अन्य ग्रहों की स्थिति और दशा के संदर्भ में ही किया जाना चाहिए।

भावों के अनुसार प्रभाव (संक्षेप में)

यह वर्णन सामान्य प्रवृत्तियों का है, व्यक्तिगत फलादेश नहीं।

दशा प्रभाव

प्रश्न

राहु ग्रह किसका कारक है?

आसक्ति, विदेश, तकनीक, भ्रम।

राहु का मंत्र क्या है?

बीज मंत्र "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" है, जिसका परंपरा से 18,000 बार जप किया जाता है।

राहु किन नक्षत्रों का स्वामी है?

आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा। जिनका जन्म इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहते होता है, उनका जीवन राहु की महादशा से शुरू होता है।

राहु की महादशा कितने वर्ष की होती है?

120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में 18 वर्ष।

राहु कहाँ उच्च और कहाँ नीच का होता है?

उच्च वृषभ / मिथुन, नीच वृश्चिक / धनु।

यह भी देखें

नवग्रह में और