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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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12 राशियाँ · Tula (Libra)

तुला

राशि क्रम12 में से 7
पाश्चात्य नामLibra
राशि-चक्र में विस्तार180°–210° निरयण (लाहिरी)
स्वामीशुक्र
तत्ववायु
स्वभावचर
नक्षत्रचित्रा (3–4), स्वाति, विशाखा (1–3)
यहाँ उच्चशनि
यहाँ नीचसूर्य
शुभ रंगसफ़ेद / हल्के रंग
रत्नहीरा

तुला राशि का स्वरूप

तुला राशि वैदिक (निरयन) ज्योतिष के अनुसार बारह राशियों में सातवीं राशि है। पाश्चात्य परंपरा में इसे लिब्रा कहा जाता है। इसका निरयन विस्तार 180° से 210° (लाहिरी) तक माना जाता है। इस राशि का स्वामी शुक्र है, तत्त्व वायु है और स्वभाव चर (चलायमान) है। यहाँ शनि उच्च का और सूर्य नीच का होता है।

तुला में तीन नक्षत्रों के चरण आते हैं — चित्रा (चरण 3–4), स्वाति, और विशाखा (चरण 1–3)। यह विवरण उन पाठकों के लिए है जिन्होंने अपनी कुंडली या राशिफल से अपनी राशि जान ली है; यह सामान्य संदर्भ है, किसी व्यक्तिगत भविष्यवाणी के रूप में नहीं।

स्वभाव और व्यक्तित्व की शक्तियाँ

वायु तत्त्व और चर स्वभाव तुला को संतुलन, संबंध और सामंजस्य की ओर ले जाते हैं। शुक्र का स्वामित्व सौंदर्य, माधुर्य, कला और शिष्टता के गुण जोड़ता है। इसलिए तुला राशि वाले प्रायः विनम्र, सहयोगी और न्यायप्रिय स्वभाव के माने जाते हैं। वे दो पक्षों को समझने, मेल-मिलाप बिठाने और वातावरण को सहज बनाने में सहज होते हैं।

चर राशि होने के कारण इनमें गतिशीलता और नए वातावरण में ढलने की प्रवृत्ति रहती है। सौंदर्य, कला, संगीत, सजावट और सामाजिक व्यवहार में रुचि सामान्यतः अधिक देखी जाती है। शनि का उच्चत्व यहाँ अनुशासन, धैर्य और दीर्घकालिक न्याय की समझ को बल देता है।

ध्यान देने योग्य कमियाँ

संतुलन बनाए रखने की चाह कभी-कभी निर्णय लेने में झिझक या दो मन की स्थिति ला सकती है। दूसरों को प्रसन्न रखने की प्रवृत्ति में अपनी आवश्यकता पीछे छूट सकती है। सूर्य का यहाँ नीचत्व आत्म-निर्णय या नेतृत्व में आत्मविश्वास की कमी के रूप में समझा जाता है — यह स्वभाव की प्रवृत्ति है, कोई निश्चित परिणाम नहीं।

वायु तत्त्व के कारण मन चंचल रह सकता है; स्पष्ट सीमाएँ और नियमित दिनचर्या इसमें सहायक मानी जाती हैं।

आजीविका के क्षेत्र

शुक्र और वायु तत्त्व के संयोजन से कला, सौंदर्य, फैशन, संगीत, रचनात्मक लेखन, मीडिया, संचार और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्र स्वाभाविक माने जाते हैं। मध्यस्थता, परामर्श, संबंध-प्रबंधन और साझेदारी आधारित कार्य भी तुला की प्रकृति से मेल खाते हैं।

चर स्वभाव के कारण बदलती परिस्थितियों में ढलने की क्षमता काम आती है। यह सूची मार्गदर्शक है; व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर सटीक दिशा ज्योतिषी से परामर्श द्वारा देखी जाती है।

प्रेम और विवाह

शुक्र स्वामी होने से साझेदारी और संबंध तुला राशि के केंद्र में रहते हैं। मधुर व्यवहार, संवाद और सामंजस्य इनके संबंधों की स्वाभाविक विशेषता मानी जाती है। सातवीं राशि होने के कारण विवाह और साझेदारी का भाव इसमें विशेष महत्व रखता है।

यहाँ कोई विवाह-तिथि, शुभ मुहूर्त या परिणाम नहीं बताया गया है। वैवाहिक निर्णयों के लिए गुण-मिलान और व्यक्तिगत कुंडली का अध्ययन योग्य ज्योतिषी से कराना उचित माना जाता है।

स्वास्थ्य संबंधी सामान्य संकेत

परंपरा में वायु तत्त्व की राशियों का संबंध त्वचा, गुर्दे और शरीर के संतुलन से जोड़ा जाता है। यह केवल पारंपरिक वर्णन है — कोई रोग, निदान या उपचार का दावा नहीं। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी प्रश्न पर योग्य चिकित्सक से परामर्श ही उचित मार्ग है।

उपाय, रत्न और रंग

तुला राशि का शु

प्रश्न

तुला राशि का स्वामी कौन है?

तुला (Libra) राशि का स्वामी शुक्र है।

तुला राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

चित्रा (3–4), स्वाति, विशाखा (1–3)।

तुला राशि का तत्व और स्वभाव क्या है?

तुला वायु तत्व की चर राशि है।

तुला राशि में कौन-सा ग्रह उच्च का होता है?

शनि तुला (Libra) में उच्च का होता है।

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