Debashree Sen
Pacific time readings in Bengali, English and Hindi
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1 अक्टू॰ – 31 अक्टूबर 2026 · वास्तविक गोचर (स्विस एफेमेरिस, लाहिरी) से गणना। पाठ इन्हीं तथ्यों से लिखा गया है।
यह राशिफल 1 अक्टूबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए है। मीन राशि के स्वामी गुरु इस समय कर्क राशि में आपके पंचम भाव में गोचर कर रहे हैं और वक्री नहीं हैं। चंद्र की स्थिति वृषभ राशि तथा रोहिणी नक्षत्र में तृतीय भाव में बन रही है। शनि इस पूरे माह आपकी राशि में, प्रथम भाव में, वक्री अवस्था में रहेगा — इस कारण शनि की साढ़े साती सक्रिय है। यह मास संयम, धैर्य और आत्म-अवलोकन का समय है।
सूर्य आपके सप्तम भाव में कन्या राशि में गोचर कर रहा है, जो साझेदारी और सामने वाले पक्ष से जुड़े विषयों को प्रमुखता देता है। गुरु और मंगल दोनों पंचम भाव में कर्क राशि में हैं — यह रचनात्मकता, संतान, अध्ययन और मानसिक उत्साह से जुड़ा संकेत है। बुध और शुक्र अष्टम भाव में तुला राशि में स्थित हैं, जो गहन शोध, गुप्त विषयों और सूक्ष्म आर्थिक पक्षों की ओर ध्यान खींचते हैं। शनि प्रथम भाव में वक्री होकर व्यक्तित्व और स्वास्थ्य पर दबाव बनाए रख सकते हैं, जबकि राहु द्वादश भाव में और केतु षष्ठ भाव में वक्री हैं। यह संयोजन बाहरी गतिविधि से अधिक आंतरिक कार्य की ओर संकेत करता है।
माह के आरंभ में चंद्र का वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में तृतीय भाव से गुजरना साहस, संवाद और निकट यात्राओं को बल देता है। रोहिणी नक्षत्र स्थिरता और सौम्य दृढ़ता का नक्षत्र माना जाता है, अतः इस काल में किए गए छोटे-छोटे प्रयास स्थायी आधार बनाते हैं। इसी समय सूर्य सप्तम भाव में होने से साझेदार या सहयोगी से संवाद की आवश्यकता बढ़ सकती है। शनि की साढ़े साती के कारण ऊर्जा स्तर में उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए कार्यों को थोड़ा-थोड़ा करके पूरा करना उपयुक्त रहेगा।
माह के उत्तरार्ध में गुरु और मंगल का पंचम भाव में स्थिर रहना योजनाओं को दिशा देता है, परंतु शनि की वक्री स्थिति प्रथम भाव में रहने से शारीरिक थकान और मानसिक भार संभव है। इस समय बुध-शुक्र का अष्टम भाव में गोचर वित्तीय मामलों में सतर्कता की ओर संकेत करता है — विशेषकर उधार, गुप्त दस्तावेज़ों और साझा संसाधनों में। केतु का षष्ठ भाव में होना प्रतिस्पर्धा और सेवा-भाव से जुड़े क्षेत्रों में मिश्रित प्रभाव दे सकता है। निर्णय टालने में ही समझदारी है; जल्दबाज़ी से बचें।
सूर्य का सप्तम भाव में गोचर प्रेम और विवाह संबंधों को सक्रिय करता है। शुक्र का अष्टम भाव में होना भावनात्मक गहराई लाता है, परंतु साथ ही ईर्ष्या या संदेह जैसी सूक्ष्म भावनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताता है। गुरु का पंचम भाव में होना प्रेम में उदारता और सच्चाई को प्रोत्साहित करता है। संवाद खुला रखें, अपेक्षाएँ स्पष्ट रखें। इस माह प्रेम पक्ष में संयम ही स्थिरता देगा।
गुरु और मंगल का पंचम भाव में होना रचनात्मक कार्यों, शिक्षण, लेखन और योजना-निर्माण के लिए अनुकूल संकेत है। शनि की साढ़े साती के कारण करियर में तत्काल बड़े परिणाम की अपेक्षा न रखें; निरंतर प्रयास ही लाभ देगा। बुध और शुक्र का अष्टम भाव में गोचर आर्थिक मामलों में पारदर्शिता और दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता दर्शाता है। निवेश से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें और किसी भी बड़े वित्तीय कदम से पहले पर्याप्त ज
| ग्रह | राशि | भाव (मीन से) |
|---|---|---|
| सूर्य | कन्या | 7 |
| चंद्र | वृषभ | 3 |
| मंगल | कर्क | 5 |
| बुध | तुला | 8 |
| गुरु | कर्क | 5 |
| शुक्र | तुला | 8 |
| शनि | मीन · वक्री | 1 |
| राहु | कुंभ | 12 |
| केतु | सिंह | 6 |
यह इस महीने के वास्तविक ग्रह गोचर (स्विस एफेमेरिस, लाहिरी अयनांश) से बनता है: हर ग्रह को मीन से गिने गए भाव में पढ़ा जाता है। चंद्रमा वृषभ राशि (Rohini नक्षत्र) में, मीन से 3वें भाव में है।
हाँ। शनि मीन में, मीन से 1वें भाव में हैं, जो साढ़ेसाती की अवधि है।
शुभ अंक 4, शुभ रंग पीला।
शनि वक्री हैं (राहु-केतु सदा वक्री चलते हैं)।
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