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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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मंत्र

वैदिक मंत्र और गायत्री

नाम मंत्र

बीज मंत्र (देवता और ग्रह)

स्तोत्र, श्लोक और प्रार्थनाएँ

शांति पाठ

मंत्र क्या है

मंत्र एक पवित्र वाक्य या शब्द-समूह है, जिसे परंपरा में श्रद्धा और एकाग्रता के साथ जपा जाता है। यह केवल शब्द नहीं, बल्कि ध्वनि और भाव का संयुक्त रूप माना जाता है। हमारे यहाँ मंत्रों की परंपरा बहुत विस्तृत है — किसी मंत्र का संबंध किसी देवता से जुड़ा है, किसी का ग्रह से, और किसी का रक्षा या शांति की भावना से।

इस पृष्ठ पर दिए गए विवरण में ये मंत्र शामिल हैं: गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, ॐ नमः शिवाय, हनुमान चालीसा, गणेश मंत्र, महालक्ष्मी मंत्र, विष्णु मंत्र (द्वादशाक्षरी), दुर्गा मंत्र, सरस्वती मंत्र, शनि मंत्र, नवग्रह मंत्र, सूर्य बीज मंत्र, कुबेर मंत्र, कृष्ण मंत्र, राम मंत्र (त्रयोदशाक्षरी), हरे कृष्ण महामंत्र, वक्रतुण्ड महाकाय, गुरु मंत्र (गुरुर ब्रह्मा), ॐ सह नाववतु, असतो मा सद्गमय, पूर्णमदः पूर्णमिदम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः, कराग्रे वसते लक्ष्मी, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, गणेश गायत्री, रुद्र गायत्री (शिव गायत्री), विष्णु गायत्री, लक्ष्मी गायत्री, सरस्वती वंदना (या कुंदेंदु), सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषु, नवार्ण मंत्र, मंगल बीज मंत्र, चंद्र बीज मंत्र, बुध बीज मंत्र, बृहस्पति (गुरु) बीज मंत्र, शुक्र बीज मंत्र, राहु बीज मंत्र, केतु बीज मंत्र और हनुमान मंत्र।

ध्यान रहे कि परंपराएँ भिन्न-भिन्न हैं — उत्तर और दक्षिण भारत की शैलियाँ, स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ, तथा अमांत और पूर्णिमांत पद्धतियाँ अपने-अपने ढंग से इनका पालन करती हैं। इसलिए किसी एक रूप को सर्वमान्य मानना उचित नहीं।

माला से जप

जप सामान्यतः माला के सहारे किया जाता है, जिससे गिनती सहज रहती है और मन एक जगह टिकता है। माला के मनके उँगलियों से सरकाते हुए, धीमे और स्थिर स्वर में मंत्र दोहराया जाता