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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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मंत्र · Karagre Vasate Lakshmi

कराग्रे वसते लक्ष्मीः

मूल पाठ (संस्कृत)

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

लिप्यंतरण (IAST)

karāgre vasate lakṣmīḥ karamadhye sarasvatī |karamūle tu govindaḥ prabhāte karadarśanam ||

अर्थ

हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में गोविंद का वास है; इसलिए प्रातःकाल हथेलियों का दर्शन करें।

Meaning

Lakshmi dwells at the fingertips, Saraswati in the middle of the palm, and Govinda at its base: so look at your palms at dawn.

देवतालक्ष्मी, सरस्वती, गोविंद
प्रकारश्लोक
स्रोतपारंपरिक प्रातः स्मरण
भाषासंस्कृत
जप संख्या1
कबजागते ही, बिस्तर छोड़ने से पहले
कैसेपाठ करते हुए दोनों खुली हथेलियों को देखें।

प्रश्न

कराग्रे वसते लक्ष्मीः का अर्थ क्या है?

हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में गोविंद का वास है; इसलिए प्रातःकाल हथेलियों का दर्शन करें।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः का जप कितनी बार करना चाहिए?

1।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः का जप कब किया जाता है?

जागते ही, बिस्तर छोड़ने से पहले।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः कहाँ से लिया गया है?

पारंपरिक प्रातः स्मरण।

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