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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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मंत्र · Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र

मूल पाठ (संस्कृत)

ॐ भूर्भुवः स्वः ।तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ।धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

लिप्यंतरण (IAST)

oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ |tat savitur vareṇyaṁ bhargo devasya dhīmahi |dhiyo yo naḥ pracodayāt ||

अर्थ

ॐ। भूः, भुवः, स्वः। हम सविता देव के वरणीय तेज का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को सत्कर्म की ओर प्रेरित करें।

Meaning

Om. Earth, sky, heaven. We meditate on the adorable radiance of the divine Savitr; may he inspire our minds.

देवतासविता (सूर्य)
प्रकारवैदिक मंत्र
स्रोतऋग्वेद 3.62.10 (ऋषि विश्वामित्र)
भाषासंस्कृत
जप संख्या108 (एक माला); कम से कम 3 या 10
कबतीनों संध्याओं में: सूर्योदय, मध्याह्न और सूर्यास्त
कैसेस्नान के बाद पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें और 108 मनकों की माला (रुद्राक्ष या तुलसी) पर जप करें; एक माला = 108 बार।

प्रश्न

गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

ॐ। भूः, भुवः, स्वः। हम सविता देव के वरणीय तेज का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को सत्कर्म की ओर प्रेरित करें।

गायत्री मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

108 (एक माला); कम से कम 3 या 10।

गायत्री मंत्र का जप कब किया जाता है?

तीनों संध्याओं में: सूर्योदय, मध्याह्न और सूर्यास्त।

गायत्री मंत्र कहाँ से लिया गया है?

ऋग्वेद 3.62.10 (ऋषि विश्वामित्र)।

यह भी देखें

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