मंत्र · Maha Mrityunjaya Mantra
महामृत्युंजय मंत्र
मूल पाठ (संस्कृत)
लिप्यंतरण (IAST)
अर्थ
हम त्रिनेत्र भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका ककड़ी-फल बेल से छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
Meaning
We worship the three-eyed one, fragrant, who increases nourishment. As a ripe cucumber is freed from its stalk, may he free us from death, not from immortality.
| देवता | शिव (त्र्यंबक) |
|---|---|
| प्रकार | वैदिक मंत्र |
| स्रोत | ऋग्वेद 7.59.12; यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 1.8.6) में भी |
| भाषा | संस्कृत |
| जप संख्या | प्रतिदिन 108; पूर्ण अनुष्ठान के लिए सवा लाख |
| कब | ब्रह्म मुहूर्त, सोमवार, शिवरात्रि और श्रावण मास |
| कैसे | स्नान के बाद पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें और 108 मनकों की माला (रुद्राक्ष या तुलसी) पर जप करें; एक माला = 108 बार। रुद्राक्ष की माला पारंपरिक है। |
प्रश्न
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?
हम त्रिनेत्र भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका ककड़ी-फल बेल से छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
महामृत्युंजय मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?
प्रतिदिन 108; पूर्ण अनुष्ठान के लिए सवा लाख।
महामृत्युंजय मंत्र का जप कब किया जाता है?
ब्रह्म मुहूर्त, सोमवार, शिवरात्रि और श्रावण मास।
महामृत्युंजय मंत्र कहाँ से लिया गया है?
ऋग्वेद 7.59.12; यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 1.8.6) में भी।
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