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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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मंत्र · Sarva Mangala Mangalye

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

मूल पाठ (संस्कृत)

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

लिप्यंतरण (IAST)

sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike |śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo’stu te ||

अर्थ

हे सभी मंगलों में मंगलमयी, कल्याणी, सभी मनोरथ सिद्ध करने वाली, शरणदायिनी, त्रिनेत्रा गौरी नारायणी! आपको नमस्कार है।

Meaning

O auspiciousness of all that is auspicious, O Shiva (the auspicious one), who accomplishes every aim; O refuge, three-eyed Gauri, Narayani: salutation to you.

देवतादुर्गा (नारायणी)
प्रकारश्लोक
स्रोतदेवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.10
भाषासंस्कृत
जप संख्या1, 3 या 108
कबनवरात्रि; देवी की किसी भी पूजा के आरंभ में
कैसेहाथ जोड़कर पाठ।

प्रश्न

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का अर्थ क्या है?

हे सभी मंगलों में मंगलमयी, कल्याणी, सभी मनोरथ सिद्ध करने वाली, शरणदायिनी, त्रिनेत्रा गौरी नारायणी! आपको नमस्कार है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का जप कितनी बार करना चाहिए?

1, 3 या 108।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का जप कब किया जाता है?

नवरात्रि; देवी की किसी भी पूजा के आरंभ में।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये कहाँ से लिया गया है?

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.10।

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