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शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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मंत्र · Vakratunda Mahakaya

वक्रतुण्ड महाकाय

मूल पाठ (संस्कृत)

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

लिप्यंतरण (IAST)

vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭi samaprabha |nirvighnaṁ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||

अर्थ

हे वक्र सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न कीजिए।

Meaning

O curved-trunked one of mighty body, radiant as ten million suns: O Lord, keep all my work free of obstacles, always.

देवतागणेश
प्रकारश्लोक
स्रोतपारंपरिक गणेश श्लोक (मुद्गल पुराण परंपरा)
भाषासंस्कृत
जप संख्या1 या 3
कबकिसी भी नए काम, यात्रा या पूजा से पहले
कैसेहाथ जोड़कर एक या तीन बार पाठ।

प्रश्न

वक्रतुण्ड महाकाय का अर्थ क्या है?

हे वक्र सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न कीजिए।

वक्रतुण्ड महाकाय का जप कितनी बार करना चाहिए?

1 या 3।

वक्रतुण्ड महाकाय का जप कब किया जाता है?

किसी भी नए काम, यात्रा या पूजा से पहले।

वक्रतुण्ड महाकाय कहाँ से लिया गया है?

पारंपरिक गणेश श्लोक (मुद्गल पुराण परंपरा)।

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