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हिंदू त्योहार · Chhath Puja

छठ पूजा

अगली तिथि रविवार, 15 नवंबर 2026 · कार्तिक शुक्ल षष्ठी (pradosh)

तिथि / समयकार्तिक शुक्ल षष्ठी
देवतासूर्य / छठी मैया
पालननदी तट पर सूर्य उपासना
कहाँबिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल

छठ पूजा 2026 की तिथियाँ

छठ पूजा
रविवार, 15 नवंबर 2026कार्तिक शुक्ल षष्ठी (pradosh)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

महत्व और कथा

छठ पूजा का मुख्य आधार भगवान सूर्य की उपासना है, और साथ ही छठी मैया की आराधना की परंपरा भी इसमें जुड़ी हुई है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा और समृद्धि का स्रोत माना जाता है, इसलिए उनकी उपासना का यह अवसर श्रद्धा और संयम दोनों से जुड़ा होता है। छठी मैया को संतान की रक्षा और कल्याण से जोड़कर स्मरण किया जाता है।

इस पर्व की विशेषता यह है कि यहाँ पूजा का केंद्र घर के भीतर की मूर्ति या थाली नहीं, बल्कि नदी, तालाब या किसी जलाशय का किनारा होता है। व्रती जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य और उगते सूर्य — दोनों को अर्घ्य देते हैं। यह अर्घ्य अर्पण का क्रम ही छठ को अन्य पर्वों से अलग बनाता है, क्योंकि यहाँ डूबते और उगते दोनों सूर्य को समान आदर दिया जाता है।

परंपरा में यह पर्व बड़े संयम, शुद्धता और उपवास के साथ जुड़ा है। व्रती कई दिनों तक सात्विक आहार और नियमित अनुशासन का पालन करते हैं। यह अनुशासन किसी फल की मांग नहीं, बल्कि कृतज्ञता और समर्पण का रूप माना जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

छठ पूजा की तिथि पंचांग से तय होती है — यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर आधारित है। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के संक्रमण के अनुसार गणना किए जाते हैं, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। इस पृष्ठ पर दी गई तारीखें पंचांग से गणना करके दिखाई जाती हैं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि तिथि का आरंभ और अंत स्थान के अनुसार थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। इसी कारण कभी-कभी एक ही पर्व अलग-अलग शहरों में एक दिन के अंतर से मनाया जाता है। साथ ही अमांत और पूर्णिमांत कैलेंडर पद्धतियों में भी अंतर दिखाई दे सकता है। यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर हैं।

इसलिए यदि किसी अन्य क्षेत्र या परंपरा में तारीख एक दिन आगे-पीछे दिखे, तो वह त्रुटि नहीं, बल्कि गणना की पद्धति का स्वाभाविक अंतर है। अपने निकटतम स्थान के पंचांग या किसी योग्य ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित रहता है।

पूजा विधि

छठ की सामान्य विधि में जलाशय के किनारे सूर्य को अर्घ्य देना प्रमुख है। व्रती जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, और अगले दिन उगते सूर्य को। इसके साथ ही छठी मैया का स्मरण और पारंपरिक सामग्री से पूजा की जाती है।

घर-घर में विधि के विवरण थोड़े भिन्न हो सकते हैं, क्योंकि यह पर्व पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपरा के साथ जुड़ा है। किसी भी चरण में जल्दबाजी या दिखावा न करना ही इस पर्व की भावना के अनुकूल माना जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में मनाई जाती है। इन क्षेत्रों में नदी

छठ पूजा 2027 की तिथियाँ

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गुरुवार, 4 नवंबर 2027कार्तिक शुक्ल षष्ठी (pradosh)

छठ पूजा 2028 की तिथियाँ

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सोमवार, 23 अक्टूबर 2028कार्तिक शुक्ल षष्ठी (pradosh)

प्रश्न

छठ पूजा 2026 में कब है?

छठ पूजा रविवार, 15 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल षष्ठी (pradosh)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

छठ पूजा कब है?

छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

छठ पूजा कहाँ मनाया जाता है?

बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल।

अलग-अलग पंचांगों में छठ पूजा की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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