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हिंदू त्योहार · Makar Sankranti

मकर संक्रांति

अगली तिथि शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 · Sun enters मकर (sidereal)

तिथि / समयसौर (सूर्य संक्रांति से)
देवतासूर्य
पालनसूर्य का मकर राशि में प्रवेश
कहाँपूरे भारत में

मकर संक्रांति 2026 की तिथियाँ

मकर संक्रांति
बुधवार, 14 जनवरी 2026Sun enters मकर (sidereal)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

मकर संक्रांति: महत्व और कथा

मकर संक्रांति हिंदू परंपरा का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य को समर्पित है। यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। पंचांग की भाषा में यह एक सौर घटना है — अर्थात् यह चंद्र तिथियों पर नहीं, बल्कि सूर्य के राशि-परिवर्तन पर आधारित है। इसी कारण इसे "संक्रांति" कहा जाता है, जिसका अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण।

इस दिन सूर्य की उपासना की जाती है। सूर्य को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का स्रोत माना गया है, और मकर संक्रांति पर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है, और इसके साथ अनेक स्थानीय रीति-रिवाज जुड़े हुए हैं।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

मकर संक्रांति की तिथि चंद्र गणना से नहीं, बल्कि सौर गणना से तय होती है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, उस क्षण को संक्रांति कहा जाता है। यह क्षण पंचांग में पहले से गणना करके दिया जाता है।

चूँकि यह एक खगोलीय घटना है, इसका सटीक समय हर वर्ष बदलता है। इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल एक जैसी नहीं रहती। पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष की सटीक तिथि और समय की गणना की जाती है, और वह इस पृष्ठ पर दी जाती है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि हिंदू पर्वों की तिथियाँ किसी स्थान विशेष पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य के संक्रमण के समय पर निर्भर करती हैं। इस कारण विभिन्न शहरों के बीच तथा अमांत और पूर्णिमांत कैलेंडरों के बीच तिथि में एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर होती हैं।

पूजा विधि

मकर संक्रांति की पूजा में सूर्य देव की उपासना केंद्र में रहती है। परंपरागत रूप से लोग प्रातः स्नान करके सूर्य को जल अर्पित करते हैं और उनका ध्यान करते हैं। कई घरों में सूर्य को नमस्कार किया जाता है और उनके नाम का जप किया जाता है।

इस दिन दान और पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। तिल, गुड़, चावल और अन्य वस्तुओं का दान करने की परंपरा अनेक क्षेत्रों में प्रचलित है। कुछ स्थानों पर सूर्य को तिल और गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है।

पूजा की विधि, मुहूर्त और सामग्री स्थानीय परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ किसी एक को श्रेष्ठ मानने के बजाय अपने कुल और क्षेत्र की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है। व्यक्तिगत धार्मिक या ज्योतिषीय मार्गदर्शन के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना बेहतर होता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

मकर संक्रांति पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन इसका नाम और मनाने का ढंग हर क्षेत्र में अलग-अलग है।

मकर संक्रांति 2027 की तिथियाँ

मकर संक्रांति
शुक्रवार, 15 जनवरी 2027Sun enters मकर (sidereal)

मकर संक्रांति 2028 की तिथियाँ

मकर संक्रांति
शनिवार, 15 जनवरी 2028Sun enters मकर (sidereal)

प्रश्न

मकर संक्रांति 2027 में कब है?

मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (Sun enters मकर (sidereal)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

मकर संक्रांति कब है?

मकर संक्रांति सौर (सूर्य संक्रांति से) को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

मकर संक्रांति कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में मकर संक्रांति की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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