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हिंदू त्योहार · Krishna Janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी

अगली तिथि मंगलवार, 24 अगस्त 2027 · भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि)

तिथि / समयभाद्रपद कृष्ण अष्टमी (रोहिणी नक्षत्र)
देवताकृष्ण
पालनअर्धरात्रि में कृष्ण का जन्म
कहाँपूरे भारत में

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तिथियाँ

कृष्ण जन्माष्टमी
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

कृष्ण जन्माष्टमी

महत्व और कथा

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पर्व है। पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, और परंपरा में रोहिणी नक्षत्र का भी उल्लेख आता है। इस दिन का केंद्र बिंदु है — मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म। भक्त इस अवसर को उपवास, कीर्तन, भजन और भगवान के बाल स्वरूप की झलक पाने की आकांक्षा के साथ मनाते हैं।

यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है। इसका सार यह है कि जहाँ अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, वहाँ धर्म की पुनःस्थापना के लिए दिव्य शक्ति प्रकट होती है। यह श्रद्धा का विषय है, और इसलिए इसे शांत, भक्तिभाव से ग्रहण किया जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

हिंदू पर्वों की तिथियाँ पंचांग से तय होती हैं, और जन्माष्टमी भी इसका अपवाद नहीं है। यह पर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (रोहिणी) के आधार पर निर्धारित होता है। चूँकि तिथि, नक्षत्र और सूर्य के राशि प्रवेश का हिसाब स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। इसी कारण अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों के बीच भी अंतर दिखाई दे सकता है।

इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। यह ध्यान रखें कि हर स्थान के लिए सटीक समय वहाँ के पंचांग से मिलता है। किसी व्यक्तिगत गणना या मुहूर्त के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित होता है।

पूजा विधि

जन्माष्टमी की पूजा का केंद्र मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का स्मरण है। विधि सरल भी है और गहरी भी — यह भक्त की श्रद्धा पर निर्भर करती है। सामान्यतः निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:

पूजा में किसी विशेष वस्तु या क्रय-विक्रय का बल नहीं दिया जाता; भाव और श्रद्धा ही प्रमुख हैं। जो लोग व्रत रखते हैं, वे अपनी स्वास्थ्य स्थिति और परिस्थिति के अनुसार सरल रूप अपनाते हैं।

क्षेत्रीय विविधताएँ

जन्माष्टमी पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन रूप और रीति में क्षेत्रीय विविधता दिखती है। उत्तर भारत में अनेक स्थानों पर झाँकियाँ, रासलीला और मंदिरों में विशेष सजावट देखने को मिलती है। महाराष्ट्र में दही-हंडी की परंपरा प्रचलित है, जिसमें मटकी फोड़ने का उत्सव होता है। दक्षिण भारत में भी यह पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है, और वहाँ की रीतियाँ स्थानीय परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में भी कुछ अंतर देखने को मिलता है — कहीं व्रत और पूजा का विधान अलग होता है, तो कहीं समय का। इन भिन्नताओं को देखकर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं कि कोई एक ही रीति सही है; प्रत्येक परंपरा अपने स्थानीय पंचांग और आचार का पालन करती है।

क्या करें, क्या न करें

इस पर्व को शांति और भक्ति के साथ मनाना चाहिए। कुछ सामान्य बातें ध्यान में रखें:

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 की तिथियाँ

कृष्ण जन्माष्टमी
मंगलवार, 24 अगस्त 2027भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि)

कृष्ण जन्माष्टमी 2028 की तिथियाँ

कृष्ण जन्माष्टमी
रविवार, 13 अगस्त 2028भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि)

प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 में कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी मंगलवार, 24 अगस्त 2027 (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

कृष्ण जन्माष्टमी कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (रोहिणी नक्षत्र) को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

कृष्ण जन्माष्टमी कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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