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हिंदू त्योहार · Buddha Purnima

बुद्ध पूर्णिमा

अगली तिथि गुरुवार, 20 मई 2027 · वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

तिथि / समयवैशाख पूर्णिमा
देवताबुद्ध / विष्णु
पालनबुद्ध का जन्म
कहाँपूरे भारत में (बौद्ध और हिंदू)

बुद्ध पूर्णिमा 2026 की तिथियाँ

बुद्ध पूर्णिमा
शुक्रवार, 1 मई 2026वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व और कथा

बुद्ध पूर्णिमा, जिसे बुद्ध जयंती भी कहा जाता है, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व भगवान बुद्ध के जन्म से जुड़ा है और इस दिन का स्वरूप अत्यंत पवित्र तथा शांत माना गया है। पंचांग की दृष्टि से यह वैशाख पूर्णिमा का दिन है, और इसी तिथि पर बुद्ध का जन्म हुआ — यही इस पर्व का केंद्रीय आधार है।

परंपरा में इस पर्व को बुद्ध और विष्णु — दोनों से जोड़कर देखा जाता है। कुछ श्रद्धालु इसे बुद्ध के जीवन से जोड़ते हैं, तो कुछ परंपराएँ इसे विष्णु से संबद्ध मानती हैं। यह भेद किसी एक मत को श्रेष्ठ बनाने के लिए नहीं, बल्कि यह दर्शाने के लिए है कि भारत की धार्मिक परंपराओं में यह तिथि कई स्तरों पर आदर पाती है।

इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता इसका शांत और चिंतनपूर्ण स्वरूप है। यह पर्व भारत भर में बौद्ध और हिंदू — दोनों समुदायों द्वारा मनाया जाता है, और इसका स्वरूप किसी उत्सव की भीड़ से अधिक आत्म-निरीक्षण और करुणा से जुड़ा है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

बुद्ध पूर्णिमा की तिथि वैशाख पूर्णिमा से तय होती है, और इसका ग्रेगोरियन तारीख में रूपांतरण प्रत्येक वर्ष पंचांग के आधार पर किया जाता है। पंचांग में तिथि, नक्षत्र और सूर्य के राशि-प्रवेश को स्थानीय समय के अनुसार देखा जाता है, इसलिए यह तिथि एक शहर से दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसी कारण अमांत और पूर्णिमांत — इन दो पंचांग पद्धतियों के अनुसार भी तारीख में अंतर दिख सकता है। जहाँ एक पद्धति में मास की गणना अमावस्या से आरंभ होती है, वहाँ दूसरी में पूर्णिमा से। यह कोई त्रुटि नहीं, बल्कि गणना की भिन्न परंपराएँ हैं।

इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिड़ी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। पाठकों को यह समझना चाहिए कि यदि उनका निवास-स्थान भिन्न है, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में एक दिन का अंतर संभव है। अपने नगर के अनुसार सटीक तिथि के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है।

पूजा विधि

बुद्ध पूर्णिमा की पूजा-पद्धति में सादगी और संयम का विशेष स्थान है। इस दिन का स्वरूप ध्यान, स्मरण और करुणा से जुड़ा माना जाता है। सामान्य रूप से निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:

विधि में क्षेत्रीय और पारिवारिक भिन्नताएँ स्वाभाविक हैं। किसी विशेष अनुष्ठान की सटीक विधि के लिए अपने कुल अथवा स्थानीय परंपरा का अनुसरण करना उचित होता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

यह पर्व भारत भर में बौद्ध और हिंदू — दोनों समुदायों द्वारा मनाया जाता है, इसलिए इसके आचरण में क्षेत्रीय रंग स्पष्ट दिखते हैं। जहाँ बौद्ध परंपरा में यह दिन ध्यान, प्रवचन और विहारों में सामूहिक स्मरण का अवसर होता है, वहाँ हिंदू परंपरा में यह पूर्णिमा-व्रत, दान और स्नान-ध्यान से जुड़ता है

बुद्ध पूर्णिमा 2027 की तिथियाँ

बुद्ध पूर्णिमा
गुरुवार, 20 मई 2027वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

बुद्ध पूर्णिमा 2028 की तिथियाँ

बुद्ध पूर्णिमा
सोमवार, 8 मई 2028वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

प्रश्न

बुद्ध पूर्णिमा 2027 में कब है?

बुद्ध पूर्णिमा गुरुवार, 20 मई 2027 (वैशाख शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

बुद्ध पूर्णिमा कब है?

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

बुद्ध पूर्णिमा कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में (बौद्ध और हिंदू)।

अलग-अलग पंचांगों में बुद्ध पूर्णिमा की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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