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हिंदू त्योहार · Holi

होली

अगली तिथि रविवार, 21 मार्च 2027 · फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (pradosh)

तिथि / समयफाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) और अगला दिन
देवताविष्णु / कृष्ण
पालनरंग, होलिका दहन
कहाँपूरे भारत में

होली 2026 की तिथियाँ

होली
मंगलवार, 3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमा (Bhadra covers the previous pradosh; पूर्णिमा ≥ 3½ prahar today, pratipada vriddhi)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

होली: अर्थ, तिथि-निर्धारण और पूजा विधि

होली का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा से जुड़ा है। यह दो भागों में मनाया जाता है — पहले दिन होलिका दहन और अगले दिन रंगों का उत्सव। इस पर्व का संबंध भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से माना जाता है। यह पूरे भारत में मनाया जाने वाला पर्व है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ पंचांग की गणना से निकाली जाती हैं; नीचे दी गई सारणी में प्रत्येक वर्ष की तिथि दी जाती है।

महत्व और कथा

होली का महत्व बुराई पर अच्छाई की विजय और भक्ति की रक्षा से जुड़ा है। परंपरा में होलिका दहन का संबंध प्रह्लाद और होलिका की कथा से जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान विष्णु के भक्त की रक्षा होती है। इसी कारण इस पर्व का संबंध विष्णु से माना जाता है। ब्रज क्षेत्र में इसे श्रीकृष्ण से जोड़कर देखा जाता है, जहाँ यह राधा और कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक बन जाता है।

यह पर्व रंगों और उल्लास का पर्व है। होलिका दहन में अग्नि को साक्षी मानकर पुराने संकल्पों को त्यागने और नए आरंभ की भावना जुड़ी है। अगले दिन रंग खेलना, मिलना-जुलना और मिठाई बाँटना इसका स्वाभाविक अंग है। ध्यान रहे कि यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है; इसका संबंध किसी व्यक्तिगत फलादेश या जीवन-निर्णय की गारंटी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

होली की तिथि फाल्गुन पूर्णिमा के आधार पर तय होती है। पंचांग में तिथि, नक्षत्र और सूर्य के संक्रमण के अनुसार पर्व की तिथि निकाली जाती है। इसी कारण से एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है, और अमांत तथा पूर्णिमांत पंचांग पद्धतियों में भी अंतर दिख सकता है।

होलिका दहन का समय विशेष रूप से पूर्णिमा तिथि और उसके प्रहर पर निर्भर करता है, जबकि रंगों वाला दिन उसके अगले दिन पड़ता है। यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिड़ी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। यदि आप किसी अन्य स्थान पर हैं या किसी विशेष परंपरा का पालन करते हैं, तो स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है। किसी भी व्यक्तिगत मुहूर्त या निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना बेहतर होता है।

पूजा विधि

होलिका दहन की पूजा में अग्नि को साक्षी मानकर संकल्प लिया जाता है। परंपरागत रूप से लकड़ी, उपलों और अनाज की बालियों को एकत्र कर होलिका बनाई जाती है, और उसके दहन के समय पूजन किया जाता है।

यह विधि सामान्य रूप से पालन की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में क्रम और सामग्री में थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी विशेष विधि को अनिवार्य मानकर भय या दबाव बनाना उचित नहीं है।

क्षेत्रीय भिन्नताएँ

होली पूरे भारत में मनाई जाती है, परंतु इसके रूप अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में होलिका दहन और अगले दिन रंगों का उत्सव प्रमुख है। ब्रज क्षेत्र में इसे श्रीकृष्ण से जोड़कर विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर यह एक ही दिन में सीमित रहता है, तो कुछ जगहों पर कई दिनों तक चलता है।

दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्रों में भ

होली 2027 की तिथियाँ

होली
रविवार, 21 मार्च 2027फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (pradosh)

होली 2028 की तिथियाँ

होली
शुक्रवार, 10 मार्च 2028फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (pradosh)

प्रश्न

होली 2027 में कब है?

होली रविवार, 21 मार्च 2027 (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (pradosh)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

होली कब है?

होली फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) और अगला दिन को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

होली कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में होली की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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