हिंदू त्योहार · Hanuman Jayanti
हनुमान जयंती
अगली तिथि मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 · चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (noon)
| तिथि / समय | चैत्र पूर्णिमा |
|---|---|
| देवता | हनुमान |
| पालन | हनुमान का जन्म |
| कहाँ | पूरे भारत में |
हनुमान जयंती 2026 की तिथियाँ
- हनुमान जयंती
- बुधवार, 1 अप्रैल 2026चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (noon)
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
हनुमान जयंती: महत्व और कथा
हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को पड़ता है और पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हनुमान को बल, भक्ति, निष्ठा और सेवा का प्रतीक माना जाता है। रामायण परंपरा में वे भगवान राम के परम भक्त हैं, और उनका जीवन साहस तथा विनम्रता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मान्यता है कि हनुमान का जन्म अंजनी माता और केसरी के पुत्र रूप में हुआ। इसी कारण उन्हें आंजनेय भी कहा जाता है। चैत्र पूर्णिमा का दिन इस जन्म-उत्सव से जुड़ा है, और इस अवसर पर भक्त उपवास, पूजन तथा हनुमान चालीसा के पाठ का अनुसरण करते हैं। यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है, और प्रवासी भारतीय समुदायों में भी इसका पालन होता है।
तिथि कैसे निर्धारित होती है
हनुमान जयंती की तिथि पंचांग के अनुसार तय होती है। यह चैत्र पूर्णिमा को आधार बनाकर निर्धारित की जाती है। हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र अथवा सूर्य के राशि-प्रवेश पर आधारित होते हैं, इसलिए एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है। अमांत और पूर्णिमांत परंपराओं के बीच भी तिथि में अंतर देखा जाता है।
इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। पाठक ध्यान दें कि अपने नगर के लिए स्थानीय पंचांग देखना उपयुक्त रहता है, क्योंकि तिथि का आरंभ और समापन स्थान के अनुसार बदल सकता है। किसी विशेष अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित माना जाता है।
पूजा विधि
इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं। घर में भी पूजा-स्थल पर दीप जलाकर, धूप अथवा अगरबत्ती से पूजन किया जाता है। कई भक्त व्रत रखते हैं और संध्या के समय हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करते हैं।
- प्रातः स्नान और संकल्प के साथ पूजा का आरंभ।
- हनुमान जी की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष दीप एवं धूप।
- सिंदूर और चमेली के तेल का अर्पण, जो परंपरा में प्रचलित है।
- हनुमान चालीसा, सुंदरकांड अथवा राम नाम का पाठ।
- प्रसाद का वितरण और भक्तों के साथ सामूहिक पाठ।
पूजा का स्वरूप क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकता है। कहीं सामूहिक पाठ होते हैं, तो कहीं व्यक्तिगत व्रत का पालन किया जाता है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
हनुमान जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है, परंतु पालन की शैली में क्षेत्रीय अंतर दिखता है। उत्तर भारत में अनेक स्थानों पर शोभायात्रा और मंदिरों में विशेष श्रृंगार होता है। दक्षिण भारत में कहीं-कहीं यह पर्व अन्य तिथियों पर भी आचरण में लाया जाता है, और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा का क्रम बदलता है।
स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में भी पालन के तरीके में थोड़ा अंतर मिलता है। कुछ समुदाय व्रत को प्रमुखता देते हैं, तो कुछ पाठ और कीर्तन को। इन भिन्नताओं को स्थानीय आचार का हिस्सा माना जाता है; किसी एक रूप को सर्वमान्य कहना उचित नहीं होगा।
क्या बचना चाहिए
पर्व के दिन श्रद्धा और संयम का पालन करना उपयुक्त माना जाता है। पूजा में जल्दबाजी अथवा दिखावे से बचना चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखें; किसी भी स्वास्थ्य संबंध
हनुमान जयंती 2027 की तिथियाँ
- हनुमान जयंती
- मंगलवार, 20 अप्रैल 2027चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (noon)
हनुमान जयंती 2028 की तिथियाँ
- हनुमान जयंती
- रविवार, 9 अप्रैल 2028चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (noon)
प्रश्न
हनुमान जयंती 2027 में कब है?
हनुमान जयंती मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 (चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (noon)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
हनुमान जयंती कब है?
हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।
हनुमान जयंती कहाँ मनाया जाता है?
पूरे भारत में।
अलग-अलग पंचांगों में हनुमान जयंती की तारीख़ क्यों बदल सकती है?
हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।
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