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हिंदू त्योहार · Shankaracharya Jayanti

शंकराचार्य जयंती

तिथि / समयवैशाख शुक्ल पंचमी
देवताआदि शंकराचार्य
पालनआदि शंकराचार्य का जन्म
कहाँपूरे भारत में, विशेषकर केरल

महत्व और कथा

शंकराचार्य जयंती आदि शंकराचार्य के जन्म के अवसर पर मनाई जाती है। परंपरा में इन्हें अद्वैत वेदांत के प्रमुख आचार्य और सनातन धर्म के पुनरुद्धारक के रूप में स्मरण किया जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रखा जाता है, और इसका स्वरूप स्मरण, अध्ययन और श्रद्धा का है।

इस दिन का केंद्रीय भाव आदि शंकराचार्य के जीवन और उपदेशों का स्मरण है — विशेष रूप से अद्वैत के उस सिद्धांत का, जो साधक को सत्य की खोज की ओर ले जाता है। यह पर्व किसी फल की मांग नहीं, बल्कि ज्ञान और वैराग्य की दिशा में एक स्मरण है।

भारत में यह पर्व व्यापक रूप से मनाया जाता है, और केरल में इसका विशेष महत्व है। वहाँ इसे श्रद्धा और उत्सव दोनों भावों के साथ मनाया जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

शंकराचार्य जयंती की तिथि वैशाख शुक्ल पंचमी से तय होती है। पंचांग के अनुसार यह तिथि हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर की भिन्न तारीख़ों पर पड़ती है, इसलिए इसकी सटीक ग्रेगोरियन तिथि प्रत्येक वर्ष पंचांग से गणना करके निकाली जाती है और इस पृष्ठ पर दी जाती है।

यह समझना उपयोगी है कि हिंदू पर्वों की तिथियाँ तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि-प्रवेश पर आधारित होती हैं, और ये किसी स्थान विशेष के अनुसार गणना की जाती हैं। इसी कारण एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, अमांत और पूर्णिमांत — इन दो पंचांग परंपराओं के कारण भी तिथि में अंतर दिखाई दे सकता है। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ एक को श्रेष्ठ कहने के बजाय यह स्वीकार करना उचित है कि गणना का आधार भिन्न है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर हैं।

यदि आप अपने नगर या अपने कुल-परंपरा के अनुसार तिथि जानना चाहें, तो स्थानीय पंचांग देखना या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहता है।

पूजा विधि

इस दिन की साधारण और शांत विधि यह है कि प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और आदि शंकराचार्य तथा अपने इष्ट देव का स्मरण करें। घर के मंदिर या पूजा-स्थान में दीप प्रज्वलित करें और पुष्प अर्पित करें।

यह विधि स्थान और परिवार के अनुसार सरल या विस्तृत हो सकती है। किसी विशेष मंत्र, अनुष्ठान या संकल्प के लिए योग्य आचार्य या ज्योतिषी से मार्गदर्शन लेना उचित है।

क्षेत्रीय भिन्नताएँ

शंकराचार्य जयंती भारत भर में मनाई जाती है, परंतु इसका रूप हर क्षेत्र में एक-सा नहीं है। केरल में इसे विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहाँ मंदिरों और मठों से जुड़े कार्यक्रम, प्रवचन और स्तोत्र-पाठ आयोजित होते हैं।

अन्य क्षेत्रों में यह दिन अधिकतर स्वाध्याय, प्रवचन और सत्संग के रूप में मनाया जाता है। जहाँ शंकराचार्य परंप

प्रश्न

शंकराचार्य जयंती कब है?

शंकराचार्य जयंती वैशाख शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

शंकराचार्य जयंती कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में, विशेषकर केरल।

अलग-अलग पंचांगों में शंकराचार्य जयंती की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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