हिंदू त्योहार · Pongal
पोंगल
अगली तिथि शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 · Sun enters मकर (sidereal)
| तिथि / समय | सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (तमिल) |
|---|---|
| देवता | सूर्य |
| पालन | तमिल फ़सल उत्सव, 4 दिन |
| कहाँ | तमिलनाडु |
पोंगल 2026 की तिथियाँ
- पोंगल
- बुधवार, 14 जनवरी 2026Sun enters मकर (sidereal)
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
महत्व और कथा
पोंगल तमिलनाडु का प्रमुख फसल पर्व है, जो सूर्य देवता को समर्पित है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से जुड़ा है, और तमिल परंपरा में इसे चार दिनों तक मनाया जाता है। इसका स्वरूप कृषि-जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है — नई फसल, धन्यवाद और उत्सव का समन्वय।
परंपरा में यह अवसर सूर्य की उत्तरायण यात्रा और फसल के पकने के साथ जोड़ा जाता है। सूर्य को जीवन, प्रकाश और ऋतु-चक्र का आधार माना जाता है, इसलिए पोंगल में उनका आभार व्यक्त करना केंद्रीय भाव है। यह पर्व किसी व्यक्तिगत फलादेश या अपेक्षा पर आधारित नहीं, बल्कि सामूहिक कृतज्ञता और श्रम के सम्मान का उत्सव है।
तिथि कैसे तय होती है
पोंगल की तिथि पंचांग के अनुसार निर्धारित होती है। इसका आधार सूर्य का मकर में प्रवेश है — अर्थात् जब सूर्य मकर राशि में संक्रमण करते हैं। इसी कारण इसे तमिल परंपरा में मकर संक्रांति से जुड़े पर्व के रूप में भी समझा जाता है।
चूँकि हिंदू पर्व-तिथियाँ तिथि, नक्षत्र या सूर्य-संक्रमण जैसे खगोलीय आधारों पर निर्भर करती हैं, इसलिए ग्रेगोरियन तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। ये तारीखें पंचांग से गणना करके निकाली जाती हैं और इस पृष्ठ पर दी जाती हैं।
यह भी ध्यान रखने योग्य है कि स्थान और परंपरा के अनुसार तिथि में एक दिन का अंतर आ सकता है। किसी नगर के लिए गणना उस स्थान के सूर्योदय और स्थानीय समय पर आधारित होती है, इसलिए अलग-अलग शहरों में तारीख भिन्न हो सकती है। इसी प्रकार अमांत और पूर्णिमांत पद्धतियों में भी अंतर देखने को मिलता है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश के आधार पर दी जाती हैं।
यदि आप अपने नगर या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सटीक समय जानना चाहें, तो स्थानीय पंचांग देखना उपयुक्त रहता है। व्यक्तिगत कुंडली से जुड़े प्रश्नों के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना बेहतर होता है।
पूजा विधि
पोंगल की पूजा का स्वरूप सरल और घरेलू है, और यह मुख्यतः सूर्य देवता को समर्पित है। परिवार इसे अपनी परंपरा के अनुसार करता है; नीचे सामान्य रूप दिया गया है।
- स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करके पूजा-स्थान या आँगन की सफाई करें।
- सूर्य देवता का आवाहन करें और उन्हें जल अर्पित करें।
- नई फसल से बने प्रसाद, विशेषकर चावल और गुड़ से बनी मिठाई, अर्पित करें।
- दीप जलाएँ और परिवार सहित सूर्य की स्तुति करें।
- प्रसाद ग्रहण करें और समाज के सदस्यों के साथ साझा करें।
कुछ परिवारों में गाय या पशुधन की पूजा भी इस पर्व के दिनों में की जाती है, क्योंकि कृषि-जीवन में पशुधन का विशेष स्थान है। पूजा का भाव आभार और श्रद्धा है, न कि किसी विशेष लौकिक फल की माँग।
क्षेत्रीय विविधताएँ
पोंगल मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है, और वहाँ यह चार दिनों तक चलता है। प्रत्येक दिन की अपनी परंपरा और नाम होते हैं, और घर-घर में इसे फसल, पशुधन और परिवार से जोड़कर देखा जाता है।
तमिलनाडु के भीतर भी क्षेत्रीय अंतर मिलते हैं — कहीं पशुधन की पूजा पर बल अधिक होता है, कहीं फसल-प्रसाद पर। शहरी और ग्रामीण परिवेश में भी इसका स्वरूप थोड़ा भिन्न दिखता है।
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पोंगल 2027 की तिथियाँ
- पोंगल
- शुक्रवार, 15 जनवरी 2027Sun enters मकर (sidereal)
पोंगल 2028 की तिथियाँ
- पोंगल
- शनिवार, 15 जनवरी 2028Sun enters मकर (sidereal)
प्रश्न
पोंगल 2027 में कब है?
पोंगल शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (Sun enters मकर (sidereal)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
पोंगल कब है?
पोंगल सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (तमिल) को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।
पोंगल कहाँ मनाया जाता है?
तमिलनाडु।
अलग-अलग पंचांगों में पोंगल की तारीख़ क्यों बदल सकती है?
हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।
हिंदू त्योहार में और
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- आडि पूरमAadi Pooram
- अक्षय नवमीAkshaya Navami
- अक्षय तृतीयाAkshaya Tritiya
- अनंत चतुर्दशीAnant Chaturdashi
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- बतुकम्माBathukamma
- भाई दूजBhai Dooj
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- भोगीBhogi
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