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हिंदू त्योहार · Pitru Paksha

पितृ पक्ष

अगली तिथि गुरुवार, 16 सितंबर 2027 · आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (sunrise)

तिथि / समयभाद्रपद पूर्णिमा → आश्विन अमावस्या
देवतापितर
पालनपितरों का श्राद्ध
कहाँपूरे भारत में

पितृ पक्ष 2026 की तिथियाँ

पितृ पक्ष
रविवार, 27 सितंबर 2026आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (sunrise)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

महत्व और कथा

पितृ पक्ष पूर्वजों को समर्पित एक पवित्र काल है, जिसमें पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है। यह अवधि भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक मानी जाती है। इस समय का देवता पितर हैं, और मुख्य अनुष्ठान पितरों के निमित्त श्राद्ध है। यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है।

परंपरा में यह माना जाता है कि इस काल में पितर पृथ्वी के निकट आते हैं और संतान द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से संतुष्ट होते हैं। श्राद्ध का भाव कृतज्ञता, स्मरण और कर्तव्य का है — यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

पितृ पक्ष की तिथि पंचांग से गणना की जाती है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलती है। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि-प्रवेश पर आधारित होते हैं, इसलिए ये स्थान के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों के बीच भी तिथियों में अंतर दिखाई दे सकता है।

इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। वर्ष-विशेष की सटीक ग्रेगोरियन तिथियाँ पंचांग से प्रत्येक वर्ष निकाली जाती हैं और इस पृष्ठ पर सूचीबद्ध की जाती हैं।

पूजा विधि

पितृ पक्ष में श्राद्ध पितरों के निमित्त किया जाने वाला प्रमुख अनुष्ठान है। सामान्यतः इसमें तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण-भोजन जैसे कर्म शामिल होते हैं। विधि, सामग्री और क्रम स्थान तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

किसी विशेष तिथि पर कौन-सा कर्म उपयुक्त है, यह पंचांग और कुल-परंपरा के अनुसार तय किया जाता है। व्यक्तिगत चार्ट या विशेष परिस्थितियों के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित माना जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

पितृ पक्ष पूरे भारत में मनाया जाता है, परंतु इसके आचरण में क्षेत्रीय भिन्नताएँ देखी जाती हैं। उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराएँ, तथा स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदायों की विधियाँ, अपने-अपने ढंग से इस काल का पालन करती हैं। कहीं तर्पण और पिंडदान पर बल दिया जाता है, तो कहीं श्राद्ध-भोज और दान पर।

अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों के प्रचलन के कारण भी तिथियों और नामों में अंतर मिलता है। इन भिन्नताओं को परंपरा का स्वाभाविक हिस्सा माना जाता है; किसी एक शैली को श्रेष्ठ कहना आवश्यक नहीं।

क्या करें और क्या टालें

पितृ पक्ष में श्रद्धा, संयम और स्मरण का भाव रखा जाता है। पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान को पुण्यकारी माना गया है।

कुछ परिवारों में इस काल में मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है, परंतु यह भी क्षेत्र और कुल-रीति पर निर्भर करता है। इस विषय पर कोई भय या दबाव नहीं, बल्कि श्रद्धा और संतुलन का भाव रखा जाता है।

यह पृष्ठ केवल परंपरा और पंचांग-

पितृ पक्ष 2027 की तिथियाँ

पितृ पक्ष
गुरुवार, 16 सितंबर 2027आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (sunrise)

पितृ पक्ष 2028 की तिथियाँ

पितृ पक्ष
सोमवार, 4 सितंबर 2028आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (sunrise)

प्रश्न

पितृ पक्ष 2027 में कब है?

पितृ पक्ष गुरुवार, 16 सितंबर 2027 (आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (sunrise)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

पितृ पक्ष कब है?

पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा → आश्विन अमावस्या को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

पितृ पक्ष कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में पितृ पक्ष की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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