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हिंदू त्योहार · Subramanya Shashti

सुब्रमण्य षष्ठी

तिथि / समयमार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी
देवताकार्तिकेय / खंडोबा
पालनकार्तिकेय की पूजा (चंपा षष्ठी)
कहाँकर्नाटक, महाराष्ट्र

महत्व और कथा

सुब्रमण्य षष्ठी का व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। यह दिन भगवान कार्तिकेय को समर्पित है, जिन्हें सुब्रमण्य, स्कंद और मुरुगन जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। महाराष्ट्र में यही पर्व कार्तिकेय के ही एक रूप खंडोबा से जुड़ा माना जाता है और वहाँ इसे चंपा षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

परंपरा में यह दिन शिव-पुत्र कार्तिकेय की आराधना का है। भक्त उनसे बल, धैर्य और संकल्प की स्थिरता की प्रार्थना करते हैं। यह व्रत किसी फल की माँग के बजाय भक्ति, अनुशासन और कृतज्ञता के भाव से रखा जाता है। ज्योतिष की दृष्टि से यह पर्व पंचांग की तिथि-गणना से जुड़ा है, इसलिए इसका स्वरूप पूरी तरह कालगणना पर आधारित है।

कथा का सार

लोक और पुराण-कथाओं में कार्तिकेय को देवताओं के सेनापति के रूप में वर्णित किया गया है। उनका जन्म और उनका पराक्रम दोनों ही साहस और कर्तव्य-पालन के प्रतीक माने जाते हैं। मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को यह आराधना विशेष रूप से की जाती है। यहाँ यह ध्यान रखना उपयुक्त है कि कथा के विवरण क्षेत्र और परंपरा के अनुसार थोड़े भिन्न रूपों में मिलते हैं, इसलिए स्थानीय पद्धति का पालन करना ही उचित माना जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

सुब्रमण्य षष्ठी की तिथि पंचांग से निकाली जाती है — मार्गशीर्ष मास, शुक्ल पक्ष, षष्ठी तिथि। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि-प्रवेश के आधार पर तय होते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। इस पृष्ठ पर दी गई तारीखें पंचांग की गणना से प्राप्त की जाती हैं।

एक ही पर्व अलग-अलग शहरों में एक दिन आगे-पीछे दिख सकता है, क्योंकि तिथि का आरंभ और अंत स्थानीय सूर्योदय के अनुसार देखा जाता है। इसके अतिरिक्त अमांत और पूर्णिमांत परंपराओं में मास-गणना का अंतर भी तारीख को प्रभावित करता है। इसलिए यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश पर आधारित हैं। अपने नगर के लिए सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहता है।

पूजा विधि

पूजा का ढंग घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में भिन्न होता है, पर सामान्य रूपरेखा एक जैसी रहती है।

महाराष्ट्र में खंडोबा की उपासना के साथ यह दिन चंपा षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। कर्नाटक में यह सुब्रमण्य की आराधना से जुड़ा है। दोनों ही स्थानों पर भक्ति और व्रत का भाव समान रहता है, केवल स्थानीय रीति-रिवाज़ अलग होते हैं।

क्षेत्रीय विभिन्नताएँ

कर्नाटक और महाराष्ट्र इस पर्व के प्रमुख क्षेत्र हैं। कर्नाटक में सुब्रमण्य के मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्त व्रत तथा दर्शन को महत्व देते हैं। महाराष्ट्र में यही तिथि खंडोबा और चंपा षष्ठी से जुड़ी मानी जाती है, जहाँ पारंपरिक लोक-आस्था का रंग अधिक दिखता है।

अन

प्रश्न

सुब्रमण्य षष्ठी कब है?

सुब्रमण्य षष्ठी मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

सुब्रमण्य षष्ठी कहाँ मनाया जाता है?

कर्नाटक, महाराष्ट्र।

अलग-अलग पंचांगों में सुब्रमण्य षष्ठी की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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