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हिंदू त्योहार · Lalita Panchami

ललिता पंचमी

तिथि / समयआश्विन शुक्ल पंचमी
देवताललिता त्रिपुर सुंदरी
पालननवरात्रि में ललिता की पूजा
कहाँपूरे भारत में

ललिता पंचमी — महत्व और कथा

ललिता पंचमी का पर्व आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी को समर्पित है। शाक्त परंपरा में देवी ललिता को आदि पराशक्ति का स्वरूप माना जाता है और यह तिथि नवरात्रि के भीतर ही आती है, इसलिए इसका स्वरूप नवरात्रि उपासना से जुड़ा हुआ है।

इस दिन देवी ललिता की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। भक्त उपवास, स्तोत्र पाठ, देवी के नाम का जाप और श्रद्धापूर्वक आराधना करते हैं। पर्व का मुख्य भाव यही है कि साधक अपना ध्यान देवी के उस सौम्य और करुणामय स्वरूप पर केंद्रित करे जिसे ललिता कहा गया है।

यह पर्व भारत भर में मनाया जाता है। चूँकि यह नवरात्रि काल में पड़ता है, इसलिए जहाँ-जहाँ नवरात्रि की उपासना होती है, वहाँ ललिता पंचमी का विशेष महत्व स्वतः जुड़ जाता है।

यहाँ यह ध्यान रखना उपयुक्त है कि ललिता पंचमी की आराधना को किसी व्यक्तिगत फल की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाता। यह श्रद्धा, अनुशासन और परंपरा का विषय है। व्यक्तिगत कुंडली से जुड़े किसी भी प्रश्न के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना ही उचित माना जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

ललिता पंचमी की तिथि आश्विन शुक्ल पंचमी है। पंचांग में तिथि सूर्य और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति से निकलती है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में इसका दिन हर वर्ष बदलता रहता है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ पंचांग की गणना से निकाली जाती हैं।

यह भी समझना आवश्यक है कि हिंदू पर्वों की तिथि किसी एक स्थान, तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि प्रवेश के आधार पर तय होती है। इसी कारण एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे दिख सकता है। इसके अतिरिक्त अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों के अनुसार भी तिथि में अंतर आ सकता है।

इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की गई हैं। यदि आप किसी अन्य नगर में हैं या किसी अन्य पंचांग का अनुसरण करते हैं, तो वहाँ की तिथि में एक दिन का अंतर संभव है।

तिथि को लेकर किसी प्रकार की जल्दबाज़ी या भ्रम की आवश्यकता नहीं है। अपने नगर के पंचांग या स्थानीय परंपरा को देख लेना ही पर्याप्त है।

पूजा विधि

ललिता पंचमी की पूजा सामान्यतः सरल और श्रद्धापूर्ण रीति से की जाती है। परंपरा के अनुसार इसमें निम्न बातें सम्मिलित होती हैं:

पूजा का स्वरूप घर, मंदिर या सामूहिक सत्संग — तीनों में भिन्न हो सकता है। किसी विशेष मंत्र या विधि को अनिवार्य मानने के बजाय अपने कुल या स्थानीय परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।

चूँकि यह तिथि नवरात्रि के भीतर आती है, अनेक स्थानों पर यह पूजा नवरात्रि की समग्र उपासना का ही एक अंग बन जाती है, अलग से नहीं।

क्षेत्रीय विविधताएँ

ललिता पंचमी पूरे भारत में मनाई जाती है, इसलिए इसके आचरण में क्षेत्रीय भिन

प्रश्न

ललिता पंचमी कब है?

ललिता पंचमी आश्विन शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

ललिता पंचमी कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में ललिता पंचमी की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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