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हिंदू त्योहार · Raksha Bandhan

रक्षाबंधन

अगली तिथि मंगलवार, 17 अगस्त 2027 · श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (प्रातः; Bhadra covers the previous afternoon)

तिथि / समयश्रावण पूर्णिमा
देवता—
पालनभाई-बहन का बंधन
कहाँपूरे भारत में

रक्षाबंधन 2026 की तिथियाँ

रक्षाबंधन
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (प्रातः; Bhadra covers the previous afternoon)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

रक्षाबंधन: अर्थ, तिथि और विधि

रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र संबंध का पर्व है। यह श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है और भारतभर में — तथा प्रवासी भारतीयों के बीच भी — श्रद्धा और स्नेह के साथ आयोजित होता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। यह पर्व किसी जाति, क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं है; इसका आधार पारिवारिक स्नेह और कर्तव्य की भावना है।

महत्व और कथा

रक्षाबंधन का मूल भाव रक्षा और विश्वास है। "रक्षा" शब्द का अर्थ है सुरक्षा, और "बंधन" का अर्थ है बंधन — अर्थात् वह सूत्र जो रक्षा के संकल्प से जुड़ता है। पारंपरिक मान्यता में यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा से जुड़ा है, जब चातुर्मास का आरंभ भी माना जाता है।

लोक परंपरा में इस दिन से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं, जो क्षेत्र के अनुसार भिन्न रूपों में सुनाई जाती हैं। इन कथाओं का सार एक ही है — रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और परस्पर कर्तव्य का प्रतीक है। पर्व का आध्यात्मिक पक्ष यह है कि मनुष्य अपने भीतर के दोषों से बचाव का संकल्प भी इसी दिन लेता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

रक्षाबंधन की तिथि पंचांग से निकाली जाती है। यह पर्व श्रावण पूर्णिमा को आता है, इसलिए इसका ग्रेगोरियन दिनांक हर वर्ष बदलता रहता है। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के संक्रांति-बिंदु पर आधारित होते हैं, इसलिए एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, अमांत और पूर्णिमांत — इन दो पंचांग पद्धतियों के कारण भी तिथियों में अंतर दिखाई देता है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं। पाठक अपने नगर के लिए स्थानीय पंचांग देखें, क्योंकि स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है।

पूजा विधि

रक्षाबंधन की विधि सरल है और घर-घर में थोड़े भिन्न रूपों में निभाई जाती है। सामान्य क्रम इस प्रकार है:

कुछ परिवार पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद, देव-पूजन के बाद ही सूत्र बाँधते हैं। कुछ स्थानों पर यह कार्य संध्या के समय भी किया जाता है। जहाँ परिवार में कोई विशेष पारिवारिक परंपरा हो, वही क्रम अपनाना उचित माना जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है, परंतु नाम और रूप क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। उत्तर भारत में इसे रक्षाबंधन कहा जाता है। महाराष्ट्र और गोवा में इसी पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जहाँ समुद्र और नारियल से जुड़ी परंपरा प्रचलित है। दक्षिण भारत के कई भागों में इसी दिन अवनि अवित्तम या श्रावण पूर्णिमा के रूप में वेद-पाठ और पितृ-तर्पण की परंपरा है।

कुछ समुदायों में यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रहता; गुरु-शिष्य, मित्रों और पड़ोसियों के बीच भी रक्षासूत्र बाँधने की परंपरा मिलती है

रक्षाबंधन 2027 की तिथियाँ

रक्षाबंधन
मंगलवार, 17 अगस्त 2027श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (प्रातः; Bhadra covers the previous afternoon)

रक्षाबंधन 2028 की तिथियाँ

रक्षाबंधन
शनिवार, 5 अगस्त 2028श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (प्रातः; Bhadra covers the previous afternoon)

प्रश्न

रक्षाबंधन 2027 में कब है?

रक्षाबंधन मंगलवार, 17 अगस्त 2027 (श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (प्रातः; Bhadra covers the previous afternoon)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

रक्षाबंधन कब है?

रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

रक्षाबंधन कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में रक्षाबंधन की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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