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हिंदू त्योहार · Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा

अगली तिथि सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

तिथि / समयआश्विन पूर्णिमा
देवतालक्ष्मी
पालनचाँदनी में खीर
कहाँपूरे भारत में

शरद पूर्णिमा 2026 की तिथियाँ

शरद पूर्णिमा
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

शरद पूर्णिमा: अर्थ, तिथि निर्धारण और पूजा विधि

महत्व और कथा

शरद पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है और इसका संबंध मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी से जुड़ा है। शरद ऋतु की इस पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा में होता है, और परंपरा में इस रात का विशेष महत्व बताया गया है।

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को समृद्धि तथा शांति का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी जी की उपासना का विधान है। कई स्थानों पर इस रात को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, जहाँ भक्त रात्रि जागरण करते हुए देवी का स्मरण करते हैं।

इस पर्व का एक और प्रचलित पक्ष चंद्रमा से जुड़ा है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में एक विशेष सात्विक गुण होता है, इसलिए खीर को चाँदनी में रखने की परंपरा है। यह परंपरा लोक आस्था का हिस्सा है और इसे श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

शरद पूर्णिमा की तिथि पंचांग के आधार पर तय होती है। यह अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि प्रवेश पर आधारित होते हैं, इसलिए इनकी गणना स्थान के अनुसार की जाती है।

इसी कारण कभी-कभी एक ही पर्व की तिथि अलग-अलग शहरों में एक दिन आगे-पीछे दिख सकती है। इसके अतिरिक्त अमांत और पूर्णिमांत पंचांग परंपराओं के कारण भी तिथि में अंतर देखने को मिलता है। यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की जाती हैं, और इन्हें इस पृष्ठ पर प्रत्येक वर्ष के लिए दर्शाया जाता है।

ध्यान रहे कि पंचांग की गणना में व्रत, पूजा और स्नान आदि के लिए अलग-अलग समय-सीमाएँ हो सकती हैं। इसलिए अपने निकटतम स्थान के पंचांग या किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है, विशेषकर जब आप किसी विशेष संकल्प या अनुष्ठान की तैयारी कर रहे हों।

पूजा विधि

शरद पूर्णिमा की पूजा सामान्यतः संध्या और रात्रि में की जाती है। परिवार के सदस्य स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल पर एकत्र होते हैं। देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया जाता है और पुष्प, धूप तथा नैवेद्य अर्पित किया जाता है।

यह विधि स्थान और परिवार की परंपरा के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। कहीं विस्तृत अनुष्ठान होते हैं, तो कहीं सरल पूजा ही की जाती है। दोनों ही रूपों में भाव और श्रद्धा को प्रधान माना गया है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

शरद पूर्णिमा पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन इसके नाम और रीति-रिवाज क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। उत्तर भारत में इसे कोजागरी पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है, जहाँ रात्रि जागरण और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र में इसे कोजाग

शरद पूर्णिमा 2027 की तिथियाँ

शरद पूर्णिमा
शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2027आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

शरद पूर्णिमा 2028 की तिथियाँ

शरद पूर्णिमा
मंगलवार, 3 अक्टूबर 2028आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

प्रश्न

शरद पूर्णिमा 2026 में कब है?

शरद पूर्णिमा सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 (आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

शरद पूर्णिमा कब है?

शरद पूर्णिमा आश्विन पूर्णिमा को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

शरद पूर्णिमा कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में शरद पूर्णिमा की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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