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हिंदू त्योहार · Guru Purnima

गुरु पूर्णिमा

अगली तिथि रविवार, 18 जुलाई 2027 · आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

तिथि / समयआषाढ़ पूर्णिमा
देवताव्यास
पालनगुरुओं का सम्मान
कहाँपूरे भारत में

गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथियाँ

गुरु पूर्णिमा
बुधवार, 29 जुलाई 2026आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।

गुरु पूर्णिमा: महत्व और कथा

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। परंपरा में इस दिन को वेदव्यास जी से जोड़ा जाता है — वे ही ऋषि माने जाते हैं जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत तथा पुराणों की रचना की। इसी कारण इस तिथि को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, और देवता के रूप में व्यास जी की स्मृति की जाती है।

मान्यता यह है कि इस दिन ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले आचार्यों और गुरुओं का स्मरण किया जाता है। साधक अपने गुरु के चरणों में प्रणाम करता है, उनसे मार्गदर्शन पाने की प्रार्थना करता है, और उस ज्ञान के लिए धन्यवाद देता है जिसने उसके जीवन को दिशा दी। यह दिन किसी व्यक्ति के भविष्य के बारे में कोई दावा नहीं करता; यह केवल श्रद्धा, अनुशासन और सीखने की परंपरा का उत्सव है।

यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है, और प्रवासी भारतीय समुदायों में भी इसका पालन होता है। घरों, आश्रमों, मठों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन गुरु-वंदन की परंपरा देखी जाती है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

गुरु पूर्णिमा का निर्धारण पंचांग के अनुसार होता है, और यह आषाढ़ पूर्णिमा से जुड़ा है। चूँकि हिंदू पर्व तिथि, नक्षत्र या सूर्य के संक्रमण पर आधारित होते हैं, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। इस पृष्ठ पर दी गई तारीखें पंचांग से गणना करके दिखाई जाती हैं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि तिथि किसी स्थान विशेष के समय के अनुसार गिनी जाती है। इस कारण एक ही पर्व अलग-अलग शहरों में एक दिन आगे-पीछे दिख सकता है। साथ ही, अमांत और पूर्णिमांत परंपराओं के अनुसार भी तिथियों में अंतर आ सकता है। इसलिए यदि कहीं तारीख में एक दिन का फर्क दिखे, तो वह पंचांग की गणना पद्धति और स्थानीय समय के कारण होता है।

इस पृष्ठ पर दी गई तारीखें नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश पर आधारित हैं। अन्य स्थानों या अन्य परंपराओं के लिए स्थानीय पंचांग देखना उपयुक्त रहता है।

पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा की पूजा सरल और श्रद्धा-केंद्रित होती है। इसका कोई एक कठोर सार्वभौमिक विधान नहीं है, लेकिन परंपरा में कुछ बातें सामान्य रूप से देखी जाती हैं:

कई लोग इस दिन उपवास रखते हैं, तो कई केवल सात्त्विक भोजन करते हैं। यह व्यक्तिगत श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। किसी भी धार्मिक कार्य की तरह, यहाँ भी विधि से अधिक भावना और अनुशासन का महत्व माना जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

गुरु पूर्णिमा पूरे भारत में मनाई जाती है, परंतु इसके पालन में क्षेत्रीय रंग दिखते हैं।

गुरु पूर्णिमा 2027 की तिथियाँ

गुरु पूर्णिमा
रविवार, 18 जुलाई 2027आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

गुरु पूर्णिमा 2028 की तिथियाँ

गुरु पूर्णिमा
गुरुवार, 6 जुलाई 2028आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)

प्रश्न

गुरु पूर्णिमा 2027 में कब है?

गुरु पूर्णिमा रविवार, 18 जुलाई 2027 (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (sunrise)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।

गुरु पूर्णिमा कब है?

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।

गुरु पूर्णिमा कहाँ मनाया जाता है?

पूरे भारत में।

अलग-अलग पंचांगों में गुरु पूर्णिमा की तारीख़ क्यों बदल सकती है?

हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।

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